Author: Sulochana Verma

टूटे दरख़्त

टूटे दरख़्त ——— क्यूँ मायूस हो तुम टूटे दरख़्त क्या हुआ जो तुम्हारी टहनियों में पत्ते नहीं क्यूँ मन मलीन है तुम्हारा कि बहारों में नहीं लगते फूल तुम …

चन्द्र

ये सर्व वीदित है चन्द्र किस प्रकार लील लिया है तुम्हारी अपरिमित आभा ने भूतल के अंधकार को क्यूँ प्रतीक्षारत हो रात्रि के यायावर के प्रतिपुष्टि की वो उनका …