Author: दुर्गेश मिश्रा

“सब्र”- – दुर्गेश मिश्रा

आज टूटा सब्र तो यू ना रुक पायेगा, क्रोध से उत्पन होगा,प्रलय निश्चित आएगा चीरते हुए सनाते को इक युग यू ही बदल जायेगा आज टूटा बाँध तो फिर …

“विडम्बना”- दुर्गेश मिश्रा

ये दुनिया का कैसा दस्तूर.. पास रह कर भी सब इतने दूर.. वो जूठी मुस्कुराहटें …थपथपाती मानो पीठ को अभिमान से… पद, पहोच का अजीब सा ताना बाना, बराबर …

“पुनरागमन” – दुर्गेश मिश्रा

क्यूँ डूब रहा मन का सूरज क्यूँ रूठ रही अंतर वाणी क्यूँ याद आ रहा वो धुंधला पल जिस पर गिर चुकी काली स्याही … क्यूँ डूब रहा मन …

“एक सफ़र” – दुर्गेश मिश्रा

– एक सफ़र देखे मैंने इस सफर में दुनिया के अद्भुत नज़ारे, दूर बैठी शोर गुल से यमुना को माटी में मिलते | की देखा मैंने इस सफर में….. …