Author: Dr. Mobeen Khan

“मुस्कुरा कर ना चलें”डॉ. मोबीन ख़ान

कह दो उन्हें की हर घड़ी, मुस्कुरा कर ना चलें। मेरा दिल मचल जाता है, यूँ सरमा कर ना चलें।। अग़र पास आना नहीं है, तो अदा दिखाकर ना …

“हक़ीक़त” डॉ. मोबीन ख़ान

चाँद है पर चांदनी नदारत। फ़ूल हैं पर ख़ुश्बू नदारत।। इंसान हैं पर इंसानियत नदारत। नफ़रत है पर मोहब्बत नदारत।। ये कलयुग है मेरे दोस्त। दोस्त तो है पर …

“मेरी क़लम भाग-3” डॉ. मोबीन ख़ान

घोड़े की रेस को, कभी गधे नहीं जीत सकते। अगर जिंदगी की रेस हो, तो बुज़दिलों पर दाव नहीं लगाया करते। पर जब फैसला कोई खच्चर ही करेगा, फिर …

“मेरी क़लम भाग-2” डॉ. मोबीन ख़ान

ज़ुर्म देखकर नहीं उम्र देखकर, जुर्म का फैसला किया जाएगा।। अगर आप नाबालिग हुए तो, जुर्म करने पर इनाम दिया जाएगा।। किसी की आबरु लुटे तो लुटे, पर नाबालिग़ …

“मेरी क़लम भाग-1″डॉ. मोबीन ख़ान

ज़ो ज्ञानी होते हैं, वो आप की गलतियों को छुपाते हैं। पर मूर्ख आपके पीछे, आपका मज़ाक बनाते हैं।। जिन्हें ज़वाब नहीं आता,वो सिर्फ़ सवालों में वक़्त बिताते हैं। …

हाइकू?सत्य?डॉ मोबीन ख़ान

सहमे लोग क्यों आया है तूफान ख़त्म ज़िन्दगी। १ तरसे लोग नहीं हुई बारिस ढेर किसान।। २ ये है मज़ाक ना समझे ज़माना हुआ हैरान, ३ मोबीन हँसा उनके …

“दस्तक”डॉ. मोबीन ख़ान

एक,दो,तीन नहीं,अनगिनत ज़ख़्म दिया है लोगों ने इंसानियत को। देखो कैसे इंसानियत घुट-घुट के सांस ले रही है।। इतनी आसानी से कामयाबी नहीं मिलेगी, नफ़रत फ़ैलाने वालों को। अब …

“इंसाफ़”डॉ. मोबीन ख़ान

क़ानून तो सिर्फ़ है, मोहताज़ लोगों के लिए। गुनेहगारों को बचाने के लिए सिफारिशें हो जाती हैं।। लाख कोशिशों के बाद भी ज़ुर्म ख़त्म होता नहीं। इस जहाँन में …