Author: Dr. Mobeen Khan

बन्दगी

नज़र मिलाकर अग़र तुझे चले ही ज़ाना था तो दिल्लगी क्यों की! इंसान के सामने हाँथ फैलाना था तो ख़ुदा की बन्दगी क्यों की!! तहज़ीब अलग बात है इसे …

“टूटा ज़ो मेरा ख़्वाब तो” डॉ. मोबीन ख़ान

टूटा ज़ो मेरा ख़्वाब तो, आईना बना दिया! ज़लता हुआ चिराग़ था, हँस कर बुझा दिया! उनकी ज़िन्दगी की ख़ातिर, ख़ुशियाँ लुटा दिया!! टूटा ज़ो मेरा ख़्वाब तो, आईना …

“मेरी क़लम भाग-55″डॉ. मोबीन ख़ान

माँ ने अपना फ़र्ज़ अदा किया, पर वो अपना फ़र्ज़ निभाना भूल गए! लगे दुनिया में नफ़रत फ़ैलाने, मोहब्बत फैलाना भूल गए!! क्या गुज़रती होगी इस ज़मीं पर, उसकी …

“वो मेरे साथिया”गीत-डॉ. मोबीन ख़ान

वो मेरे साथिया… मैं तेरा दीवाना हूँ, दुनिया से बेगाना हूँ, क्यों ना मुझको ज़ाने तू, क्यों ना पहचाने तू, बस इतनी सी है मेरी कहानी, तेरी ख़ातिर मिली …

“चाँद की गुस्ताख़ी है”ग़ज़ल-डॉ. मोबीन ख़ान

चाँद की गुस्ताख़ी है, सज़ा भुगतना है आपको!! १ ख़्वाब की फ़र्मैस है, दिन भर तड़पना है आपको! २ रात भर नींद भी तोड़ो, ग़ौसे बदलना है आपको!! ३ …

“मेरी क़लम भाग-19″डॉ. मोबीन ख़ान

मुसीबत चाहे जितनी भी आ ज़ाए, पर ज़मीर का सौदा नहीं किया करते! जिस ज़मी ने तुम्हें रहने के लिए छत दिया, उसकी आबरू को कभी नीलाम नहीं किया …

“मेरी क़लम भाग-18” डॉ. मोबीन ख़ान

# मोहब्बत महलों से नहीं होती, होती है खूबसूरत लोगों से। दीवारों से घर गुलज़ार नहीं होता, होता है बच्चों की किल्कारियोँ से।। # इश्क के दीवानें, ज़मीं फूंक …

“मेरी क़लम भाग-17” डॉ. मोबीन ख़ान

पन्नों पर अपनी मुलाकात की तारीख लिखता हूँ। हौसलों में शेर से भी ज़्यादा ज़िगर रखता हूँ।। छोड़ दे हर घड़ी ज़माने की फ़िक्र करना, पैर ज़मीं पर हैं …

हुस्न-ए-ग़ुरूर ना कर, ए ढल जाएगा

दिल की खूबसूरती, क़ोई ना मिटा पाएगा। हुस्न-ए-ग़ुरूर ना कर, ए ढल जाएगा।। यूँ ना इतरा के चल, तेरा ज़ुनून चढ़ जाएगा। नशा शराब का नहीं ए, ज़ो उतर …

“मेरी क़लम भाग-16” डॉ. मोबीन ख़ान

नफ़रत घोलने वाले हैं, बहुत फ़िज़ाओं में। ऐ ख़ुदा इन्हें, मोहब्बत का ज़रिया बना दे।। अग़र बंहक जाऐं कभी, ज़िन्दगी-ए-सफ़र में। ऐ ख़ुदा इनको, सही रास्ता दिखा दे।। तू …

“मेरी क़लम भाग 12” डॉ. मोबीन ख़ान

ज़ब भी लिखता हूँ, दिल-ए-ज़ज़्बात, आँखों में अश्कों का, समुंदर उतर आता है।। ज़रा देखो बेबसी, इस क़लम की, ना चाहते हुए भी, पन्नों पर हक़ीक़त उतर आता है।।

“मेरी क़लम”डॉ. मोबीन ख़ान

तुम मुझे ज़ख़्म दो, पर मैं तेरा मरहम हूँ। तुम अँधेरा करो मेरी ख़ातिर, पर मैं तेरा आफ़ताब हूँ।। तुम मुझे ठुकराओ कोई बात नहीं, पर मैं तेरा क़द्रदान …

“मेरी क़लम” डॉ. मोबीन ख़ान

उन्हें कह दो कि इतनी नफ़रत ना करें हमसें। अक़्सर ऐसा करने वालों को मोहब्बत हो गयी है हमसे।। रात को अब नींद नहीं आती होगी उनको। क्योंकि हर …

“मेरी क़लम”डॉ. मोबीन ख़ान

मोल तो नफ़रत का है, मोहब्बत तो नीलाम हो ज़ाती है।। जो करते हैं इंसानियत की बातें, उन्हीं की बेइज़्ज़ती सरेआम करदी ज़ाती है।। चोर-उचक्कों के साथ क़ाफ़िला चलता …

“मेरी क़लम भाग-4” डॉ. मोबीन ख़ान

ख़ुदा ने भेदभाव नहीं किया, इन्सान भेदभाव करने लगे।। ये मेरा है, ये तेरा है, ज़ो उनका है छीन लेंगे, दौलत क़ी ख़ातिर लोग ऐसी बातें करने लगे।।

“वतन की ख़ातिर”डॉ. मोबीन ख़ान

एकजुट हो ज़ाओ वतन के रखवालों, इस चमन की हालत बहुत ख़राब है।। हर तरफ़ इंसानियत के दिखे दुश्मन, इंसानों का साँस लेना दुस्वार है।। खुद से पूछोगे अग़र, …