Author: डी. के. निवातिया

गृहस्थी एक वृक्ष — डी के निवातिया

गृहस्थी एक वृक्ष जिंदगी एक खूबसूरत साज है सरगम जैसा बजा लिया करो पल ख़ुशी के हो या गम के हो मुस्कुराकर बिता लिया करो !! गृहस्थी एक वृक्ष …

अदा — डी के निवातिया

अदा +++++++++++++++ मुझसे मुहब्बत भी बेपनाह करता है फिर भी मेरी हर बात पर बिगड़ता है इसे अदा कहुँ या फितरत जनाब की जो भी हो दिल ये तो …

कैसे मुकर जाओगे — डी के निवातिया

कैसे मुकर जाओगे +++   ***   +++ यंहा के तो तुम बादशाह हो बड़े शान से गुजर जाओगे । ये तो बताओ खुदा कि अदालत में कैसे मुकर जाओगे चार …

प्रेम अनुभूति — डी के निवातिया

दिव्य प्रेम अनुभूति *** दिव्य प्रेम अनुभूति है बौद्धिक अभिव्यक्ति की मन मस्तिष्क के मिलन पर उपजी शक्ति की आत्मा से साक्षात्कार ही आनंद का खजाना है पाया उसी …

तेरी नजरो में — डी के निवातिया

तेरी नजरो में *** मुझे सुनते तो सभी है समझो अगर तुम तो मानू चाहत तो सभी को है पहचानो अगर तुम तो जानू क्या फर्क पड़ता है अच्छा …

तारणहार — डी. के. निवातिया

तारणहार मत्स्य, कूर्म, वराह और नृसिंह सत्य युग के थे अवतार त्रेता युग में भगवान बन राम ने किया था रावण संहार महाभारत के द्वारा द्वापर में कृष्ण ने …

मातृ दिवस — माँ पर कविता — डी. के निवातिया

माफ़ कर देना माँ तुझे मातृ दिवस पर याद नहीं किया मैंने शायद गुम गया कही मातृ दिवस तेरे निश्छल प्रेम की ओट में हर क्षण जो छायी रहती …

अंकुश — डी के निवातिया

मदमस्त हाथियों का डेरा है महावत के अंकुश ने घेरा है बेड़िया बंदिशों कि है पैरो में मस्तक शक्ति का सेहरा है !! ! ! ! डी के निवातिया

गलत कानून या उसका प्रयोग — डी के निवातिया

गलत कानून या उसका प्रयोग निर्भया केस में ऐतिहासिक फैसला देतें हुए जंहा कोर्ट ने लोगो में न्याय और समाज के प्रति सवेदनाओ को मूल्य को बरकरार रखते हुए …

साथ — डी के निवातिया

साथ जो हमेशा मेरे साथ था, वो कभी मुझसे मिला नहीं कम से कम साथ तो था, इसलिये कोई गिला नहीं पर साथ वालो से भी कोई दौलत तो …

सबसे न्यारा — डी के निवातिया

सबसे न्यारा जुर्म की दुनिया में सबसे न्यारा है क्योकि सच्चाई का वो हत्यारा है हर रोज़ मुखातिब होता है मुझसे मेरा दुश्मन भी कितना प्यारा है !! !!! …

मेल हो गया — डी के निवातिया

मेल हो गया *** पास होना था पप्पू को बेचारा फेल हो गया छप्पन इंच के सीने का खाली तेल हो गया पिद्दी सा दुश्मन छाती पे चढ़कर बोलता …

फेल हो गया — डी के निवातिया

फेल हो गया सत्तर साल वालो का तो ख़त्म खेल हो गया। छप्पन इंच का सीना भी अब फेल हो गया । दुश्मन रोज़ जख्म पे जख्म दिये जा …

सर काटते रहे — डी के निवातिया

वो हमारे सर काटते रहे हम उन्हें बस डांटते रहे !! वो पत्थरो से मारते रहे हम उन्हें रेवड़ी बाटते रहे !! लालो की जान जाती रही हम खुद …

श्रमशक्ति — डी के निवातिया

ताज की अद्भुत नक्काशी के काम को, दशरथ मांझी द्वारा पर्वत निढाल को, चढ़ जाते है परवान दुनिया बनाने में, कोटि नमन श्रमशक्ति के ऐसे काम को !! ! …

औषधीय गुण — डी के निवातिया

 औषधीय गुण मुहब्बत हो या नफरत दोनों दिलो के अहसास से होते है, समर्थन से कम लोग आलोचनाओं से ज्यादा ख़ास होते है, यह जरुरी नही की जो वाणी …

देश के लाल फना हो जाते है — डी. के. निवातिया

देश के लाल फना हो जाते है *** पुराने जख्म भरते नहीं की नये फिर से मिल जाते है सेनापतियों की गैरत पे जाने क्यों ताले पड़ जाते है …

कोई नाराज नहीं चाहिये — डी के निवातिया

कोई नाराज नहीं चाहिये   कितने अमन पसंद लोग है यहाँ किसी को कोई आवाज नही चाहिये। रसूख तो खुदा के फरिश्ते जैसा हो पर रोजा -ऐ- नमाज नही …

जिन्दगी संग जुआ

जिन्दगी संग जुआ जिन्दगी के संग जुआ खेलता हूँ , रोज़ एक नया तजुर्बा झेलता हूँ , नीचता की भी परिसीमा होती है नेकी के नाम बदी करते देखता …

सत्ता कितनी प्यारी — डी के निवातिया

सत्ता कितनी प्यारी मेरे देश के हुक्मरानो को सत्ता कितनी प्यारी है रोज़ मरे मजदूर किसान सैनिको ने जान वारी है आदि से अंत तक का इतिहास उठाकर देख …

समाज का आईना — डी के निवातिया

समाज का आईना *** आज अचानक वर्षो के  बाद  विद्यार्थी जीवन में पढ़ी तुलसी जी की वो पंक्तिया एक बच्चे ने उस समय  फिर याद करा दिया, जब वह …

इरादे मजबूत रखना — डी. के. निवातिया

इरादे मजबूत रखना *** नफरत करनी है अगर हमसे तो इरादे मजबूत रखना ! लड़ना पड़ेगा मुकदमा इश्क कि अदालत सबूत रखना !! हुई जो जरा भी चूक तुमसे, …

सोशल साईट हुई मेहरबान — डी. के. निवातिया

नवयुग में लोगो पर सोशल साईट हुई मेहरबान है व्हाट्सएप, फेसबुक पर हर कोई बाँट रहा ज्ञान है सीखने वाले भी वही यंहा, सिखाने वाले भी वो ही फिर …

रांझे की हीर — डी. के. निवातिया

रांझे की हीर कल तक करते देखा था मुहब्बत कि खिलाफत जिनको। आज शिद्दत से करते पाया एक रांझे कि वकालत उनको । ऐसा क्या हुआ, फिजा-ऐ-मिजाज़ ही बदल …