Author: डी. के. निवातिया

अपना देश – डी के निवातिया

अपना देश *** *** *** अलग अलग है भाषा अपनी, अलग अलग है वेश राम चन्द्र जी जहाँ धरे थे, सन्यासी का भेष बहें प्रेम की गंगा जमुना, आपस …

आज फिसल गया — डी के निवातिया

आज फिसल गया *** वक़्त भी अपनी चाल से आगे निकल गया भविष्य की चाहत में वर्तमान निगल गया भूत अपनी पहचान बनाने में अक्षम हुआ कल से कल …

आया आया राखी का त्यौहार रे – डी के निवातिया

राखी का त्यौहार *** आया आया राखी का त्यौहार रे लाया लाया खुशियों का उपहार रे भाई बहन के अटूट प्रेम का बंधन छाया छाया सावन में ये खुमार …

कवि – दोहे – डी के निवातिया

कवि लिख लिख रचना कवि भये, मांगे सबका प्यार ! खुद न  किसी  को  भाव  दे, बन कर रचनाकार !! नवयुग का आधार है, करते मन की बात ! …

मौन — डी के निवातिया

मौन *** ज्ञान अगर मौन रहा किताबो में दफ़न हो जाएगा अज्ञान आवाज़ बुलंदकर उपस्थिति दर्ज कराएगा पहचान शब्दो को भी सुर से मिलती मौन से नही लहज़े में …

काव्य रो रहा है — डी के निवातिया

काव्य रो रहा है *** साहित्य में रस छंद अलंकारो का कलात्मक सौंदर्य अब खो रहा है। काव्य गोष्ठीयो में कविताओं की जगह जुमलो का पाठ हो रहा है …

घर वापसी — डी के निवातिया

@ घर वापसी @ *** कोई उनसे पूछे ज़रा, उनके कितने घर है जो पार्टी बदलने को घर वापसी कहते है !! बड़ा सरल और सुन्दर जबाब मिला राजनीति …

कहाँ झूलेंगी बिटिया रानी — डी के निवातिया

कहाँ झूलेंगी बिटिया रानी *** बरगद, पीपल, शीशम, नीम पुराने सब काट दिये घर के आँगन और चौबारे छोटे टुकड़ो में बाँट दिये कहाँ झूलेंगी बिटिया रानी,  कैसे गाये …

हरियाली तीज — डी के निवातिया

हरियाली तीज *** बेटियों का त्यौहार है, आओ मना ले तीज झूमे, नाचे, गाये पकवान बना ले अजीज हर घर, हरी भरी खुशियों का सावन बरसे सुख समृद्धि से …

साथ — डी के निवातिया

साथ अक्सर जब टहलता हूँ अकेले अकेले बांधे अपने दोनों हाथ कभी उगते सूरज को निहारने की आस में सुबह सुबह, कभी सूनी सूनी मुझको घेरे रात बातो ही …

रोमांच — डी के निवातिया

रोमांच बदन संगमरमर है या तराशा हुआ टुकड़ा कांच सा शबनम की बूँद ढले तो लगे है तपता कनक आंच सा नजर है की उसके उत्कृष्ट बदन पर ठहरती …

बदन संगेमरमर — डी के निवातिया

बदन संगेमरमर बदन संगेमरमर है या तराशा हुआ टुकड़ा कांच सा शबनम की बूँद ढले तो लगे तपता कनक आंच सा नजर है की उस उत्कृष्ट जिस्म पर ठहरती …

एक नजर — डी के निवातिया

***एक नजर *** बुझती नहीं प्यास साकी अब सिर्फ जाम से दिल झूमने लगता है सूरज ढलते ही शाम से फकत एक नजर जी भर के देख लेने दो …

भोले भण्डारी — डी के निवातिया

आ जायेंगे भोले भण्डारी हे नाथ हमारे दर्शन दे काज सँवारे तुम ही खिवैया जीवन की नैया के आकर पार उतारे तन मन सब अर्पण हम खुद को तुमपे …

ढलता रहता हूँ — डी के निवातिया

ढलता रहता हूँ *** हर रोज़, दिन सा, ढलता रहता हूँ ! बनके दिया सा, जलता रहता हूँ !! कोई चिंगारी कहे, कोई चिराग !  यूँ नजरो में, बदलता …

गाथा एक वीर की — डी के निवातिया !!

मेरे दिल की सबसे अजीज मेरी एक रचना आज आपके समक्ष रख रहा हूँ , इस रचना को मैं लिखते हुए भी रोया था,,, और जब भी पढता हूँ …

बरसात — डी के निवातिया

बरसात *** मनभावन सावन वही, वही बरसात है। दिल में उमंग भी वही, वही जज्बात है। मेंढक की टर्र-टर्र, सोंधी माटी की खुशबु नाचते मयूर, अब कहां मिलती वो …

सावन आया — डी के निवातिया

सावन आया *** सावन आया बरसते बादल पपीहा बोले !! वज्र कड़के घनघोर है घटा नाचे मयूर !! प्रथम वर्षा जलाशय प्रताप नहाते बाल !! बूंदे गिरती पुलकित रमना …

सावन के बदरा — डी के निवातिया

सावन के बदरा ये सावन के बदरा भी बड़े निगोड़े है, मेरे दिलबर की तरह ! रोज़ उमड़ उमड़ आते है, बिन बरसे पास से गुज़र जाते है !! ! …

ईद मुबारक — डी के निवातिया

 ????–::ईद मुबारक::–???? ????????????????????????????????????????????   प्रेम और श्रद्धा से देखो तो रमज़ान में भी राम का नाम नजर आता है। नमाज़ अगर सच्ची हो तो शिव मस्तक में ईद का …

झूठ बिके बेमोल — डी के निवातिया

झूठ बिके बेमोल झूठ के संग झूठ चले, सच ना सच के साथ! चोरो की टोलिया बने, साद अकेले हाथ !! साँच खड़ा बाजार में,  झूठ बिके बेमोल ! …

मिथ्या प्रेम — डी के निवातिया

मिथ्या प्रेम *** एक बकरा पाला था राम किशन ने एक बकरा पाला था रहीम खान ने मर मिटते उनकी  जवानी देखकर कहते थे दोनों, पाला है दिल-ओ-जान से …

अंदाज़-ऐ-एतराज — डी के निवातिया

अंदाज़-ऐ-एतराज *** क्यों आज फिर मौसम का मिजाज बदला है क्या सनम ने आशिक़ी का अंदाज बदला है ! दिल तो पहले ही डूबा है, अश्क-ऐ-समंदर में फिर क्यों …

आओ सीखें हाइकू —एक प्रयास — डी. के. निवातिया

आओ सीखें हाइकू   लहर चली लेखन है हाइकु कैसे लिखेंगे !! सुनो साथियो आओ सीखें हाइकू कैसी है  बला !! हाइकु विधा एक जापानी काव्य जनक बाशो !! …