Author: डी. के. निवातिया

बधाई सन्देश

बधाई सन्देश आपके निश्छल प्रेम, सहयोग और आशीर्वाद से प्राप्त प्रतिफल के प्रतीक इस प्रमाण पत्र के  लिए आप सभी साथियो का तहदिल से धन्यवाद एवं कोटि कोटि आभार व्यक्त …

सच क्या होता है—डी के निवातिया

(सच क्या होता है) हमने जो पूछ लिया सच क्या होता है ! तिलमिला के बोले ऐसे न बयां होता है !! लांघ रहे हो आदो-अदब का दायरा जनाब …

महादेव—डी के निवातिया

ज   पाप पुण्य के युद्ध में जो खुद को मिटाता है। त्याग कर अमृत हलाहल विष अपनाता है। निस्वार्थ लोकहित में जीवन अर्पण कर दे। वो स्वयंशंभू, नीलकंठ, …

जुर्म—डी के निवातिया

वो करते सवाल तो जवाब हम देते हर जुर्म अपने सर आँखों पर लेते कम से कम गुनाह तो बताया होता फिर चाहे सजा-ऐ-मौत क्यों न देते।। ! ! ! …

एहसास-ऐ-गैर — डी के निवातिया

मुहब्बत के नाम का पाठ वो दिन रात रटता है। जरा सा छेड़ दो तो ज्वालामुखी सा फटता है।। क्या हालात हो गये आज दोस्ताना-ऐ-जहाँ के जिसे मानो अपना …

हमारे नेता—डी के निवातिया

विकास की डोर थाम ली है हमारे नेताओ ने । अब नये शमशान और कब्रिस्तान बनायेंगे।। कही भूल न जाओ तुम लोग मजहब की बाते याद रखना इंसानियत को …

मांझी—डी. के. निवातिया

लड़ाई गर मुद्दे पर हो तो लड़ने में मजा आता है उलझकर उलझनों में जीने का आनद आता है चिकनी सडको पर रफ़्तार आजमा लेते है सभी तूफानी लहरो …

कलयुगी भक्ति में शक्ति

कलयुगी भक्ति में देखि शक्ति अपार, तभी तो बन बैठे वो महान ! कितने मुखड़े छिपे इन चेहरो में, इससे विचलित है स्वंय भगवान !! लूट खसोट कर अमीर …

तमाशे–शेर -डी के निवातिया

न पूछो बेबसी, बेताबी का आलम यंहा कोई गुमशुम,  तो कोई हैरान नजर आता है ! ये जिंदगी भी कितने तमाशे दिखाये   इसकी महफ़िल में हर कोई परेशान …

रण भेरी—कुण्डलिया छन्द—डी के निवातिया

कुण्डलिया छन्द एक छोटा सा प्रयास आब सबकी नजर हाथ जोड़ सब चल पड़े, नेता चारो ओर ! किसकी झोली क्या मिले, रात जगे या भोर !! रात जगे …

मुहब्बत की शाम—डी. के. निवातिया

वफ़ा होने से पहले मुहब्बत की शाम न हो जाये ! प्यार के इम्तिहान में, कही नाकाम न हो जाये !! बेवफ़ा लोगों की सौबत में रहना क़िस्मत ही …

बसंत बहार— प्रकृति पर कविता —डी. के. निवातिया

बसंत बहार बागो में कलियों पे बहार जब आने लगे, खेत-खलिहानों में फसले लहलाने लगे ! गुलाबी धुप पर भी निखार जब आने लगे, समझ लेना के बसंत बहार …

बेइमान बहुत है—–(डी.के. निवातियाँ )

लोग शहर के अनजान,एक दूजे से हैरान बहुत है ! देखकर हालात इंसानियत के, दिल परेशान बहुत है !! बिकता है देखो मजहब आज आतंक के इस बाजार में …

गुनाह—गजल-नज्म— डी. के. निवातिया

क़त्ल न कोई गुनाह किया हमने ! बस दर्द ऐ दिल बयाँ किया हमने !! जाने क्यों नुक्ताचीनी होने लगी ! जरा लबो को जो हिला दिया हमने !! …

बेटियाँ

घर आँगन की पहचान होती है बेटियाँ हर चेहरे की  मुस्कान होती है बेटियाँ राम, कृष्ण भी लेकर आते है अवतार ममता का ऐसा भण्डार होती है बेटियाँ !! …

हिन्द धरा—डी के निवातिया

ये हिन्द धरा है शेरो की मत इस पर तुम प्रहार करो ये पावन धरा है देवो की इसे शीश झुका प्रणाम करो !! ये देखो हिन्द हिमालय से …

दिल की खोली — डी के निवातिया

खाली है दिल कि खोली इसको भर दो कुछ दौलत अपनी हमे  ईनाम कर दो नहीं चाहिये कुबेर या जमीं का टुकड़ा थोड़ी सी चाहत अपनी मेरे नाम कर …

भूमिका—डी. के. निवातिया

आजकल प्रत्येक कार्य में प्रतियोगिता हो गयी भूमिका अहम् इसमें सोशल साइट की हो गयी परिवर्तन और विकास की ये कैसी लहर चली वास्तविकता क्षेत्र की जिसमे कही गुम …

??रचना को प्रतियोगिता में विजयी बनाने के लिए नम्र निवेदन ??

मुझको-मेरा-हक-दो  बेटी शीर्षक के अंतर्गत  मेरे द्वारा रचित यह यह रचना प्रतियोगिता में शामिल है अत  आप और आप के सभी साथियो से नम्र निवेदन है की इस रचना …

आज का नवयुवक—डी. के. निवातिया

आज का नवयुवक अजीब हाल में दिखता है आज का नवयुवक जागा है मगर कुछ खोया खोया सा हँसता भी है पर कुछ रोया-रोया सा जीवन संघर्ष की इस …

प्रथम किरण—डी. के . निवातिया

दरख्तों से पत्तियो तक लुढ़कती शबनम सिमटती पुष्प कपोल ! निशा छिपती नजर आये, ज्यो रवि की प्रथम किरण से मिले भोर !! ! ! ! डी. के . …

सुनो ……शेरो शायरी—-डी. के निवातिया

सुनो, कुछ नही है तो यादो में आते क्यों हो पल – पल ख्यालो में आकर सताते क्यों हो न किस्मत अपनी, न जिगर तुममे इतना फिर सपने दीद …

तैयार हो जाओ—डी. के. निवातिया

तैयार हो जाओ …. आया है मौसम चुनावी बरसात का, बरसाती मेंढक अब तैयार हो जाओ चल निकलेगी अब तुम्हारी लाटरी थाम झोला छतरी  तैयार हो जाओ !! जम …

अमीरी-गरीबी—ज़िन्दगी पर कविता—डी के निवातिया

अमीरी-गरीबी बहस छिड़ गयी एक दिन अमीरी और गरीबी में !! नाक उठा ‘अमीरी’ बोली बड़े शान से काम बन जाते है सिर्फ मेरे नाम से हर किसी की …

गुमसुम—डी. के. निवातिया

कुछ तो बात है जो गुमसुम हो, राज-ए-दिल कभी खोला करो, दिल ऐ हालात नही तो न सही, अपने लबो से तो कुछ बोला करो… !! ! ! डी. …