Author: कवि देवेन्द्र प्रताप सिंह "आग"

फर्जी देशभक्त

अभी एक दो दिन में उपजे फर्जी देशभक्तो की पोल खोलती तथा अपने दायित्व से भटके इन फर्जी देशभक्तो को पाठ पढाती मेरी रचना – रचनाकार- कवि देवेन्द्र प्रताप …

बोलता ये ही नीला गगन, अब बहुत हो चुका है रुदन दुश्मनों का करो ना मनन, गोलियों से करो आचमन

पैरोडी -मेरे मेहबूब मेरे वतन तुझपे कुर्बान मैं जानेमन ???? हो गयीं बहुत मन कीं बातें अब तो गोली की बात करो दुश्मन की दुखती रग पकडो उस पर …

घाटी में उतार दो पुरोहित पठानिया

कारगिल, पैंसठ, इकहत्तर वाली विजय और हो रहीं हैं गुम शौर्य की निशानिया चार सूअरो के बदले में सत्रह शेर स्वाहा फ़िर से गढ़ी गयीं कलंक की कहानियाँ अब …

इजरायल की भाषा में घाटी गाजा पट्टी कर दो

उरी घटना से आहत होकर सभी राष्ट्रभक्तों की तरफ़ से मोदी जी को नसीहत देती तथा युद्ध के लिए प्रेरित करती मेरी रचना —   (अगर आप मेरी रचना …

ईद ?: वसुधा करती है चीत्कार हिलकिया भर रहा अम्बर है

ईद के मौके पर ढाका जी सड़कों पर खून की नदियाँ देखने के बाद, सभी जीव प्रेमियों की मौन साधना से  आहत मन से लिखी हुई इस्लाम के प्रति …

आटा डाटा और बाटा ??

लालूजी को समर्पित—- अरे मैं भी कहूँ उनको ज़रूरत आज आटा की मगर मोबाइलिया के रोगियों को खाज डाटा की अगर सस्ता हो डाटा तो समय पर जानते हैं …

AAP का असली चेहरा

AAP का असली चेहरा —- काम की ना धाम की है सिर्फ़ नाम आम की है रोज़-रोज़ आती है खबर नये आलाप की कोई सजा भुगते हत्याओं की, प्रताड़ना …

जल रहा सिंध, क्या मजबूरी ? खंडित भागों से क्यों दूरी ?

जल रहा सिंध, क्या मजबूरी ? खंडित भागों से क्यों दूरी ? होकर अब मुक्त-कंठ रण-शंख बजा दो, तैयारी पूरी आओ सीमा के पार चलें व्याकुल मानवता के हित …

यही हैं नाग वो तक्षक

कौमी एकता दल का सपा में विलय—— न हैं सेवक प्रजा के ये न हैं कानून के रक्षक बिठाकर गोद में रक्खे हैं आदमखोर नरभक्षक नहीँ ढूंढो कभी बिल …

घर घर की कहानी बागवान

ना मात-पिता को पाल सका कुत्ते पर करे गुमान देखो हो गयी कपूतों से घर-घर की कहानी बागवान घर-घर की कहानी बागवान -2 क्यों भूल गया माँ का आँचल …

” आज ख्वाबों में अचानक निर्भया की चीख बोली”

आज ख्वाबों में अचानक निर्भया की चीख बोली सिर्फ़ वो ही तो नहीँ कुछ जिंदगी की सीख बोली अवतरण से ही तो हमने भेद के व्यवहार झेले आस थी …

“दुश्मन दौड़ रहा सरहद की ओर निहारो”

अरे उठो अवनी के अनगिन चाँद सितारो दुश्मन दौड़ रहा सरहद की ओर, निहारो ये वसुंधरा तुमसे कुछ कैसे कह पाए ? किंतु धरा खंडित होकर कैसे रह पाए …

उनके नैनॊं का सजल नीर ही भागीरथ की गंगा है

जिनको हर धर्मों के ध्वज से प्यारा ये अनघ तिरंगा है, जो आजादी की शम्मा में इक जलता हुआ पतंगा है, जिसने अपने कुल का दीपक कर दिया दान …

शत बार नमन उन वीरों को

जिनकी दम पर हम अपने घर नींद चैन की सोते हैं आओ मिलकर हम उनकी यादों में आँख भिगोते हैं शत बार नमन उन वीरों को अपना बलिदान दे …

“बतलाओ तो जश्न मनाऊँ मैं कैसी आजादी का”

“बतलाओ तो जश्न मनाऊँ मैं कैसी आजादी का ” आतंकी की महिमा मंडित मंदिर और शिवाले खंडित पशु प्रेमी की होड़ है फ़िर भी बोटी चाट रहे हैं पंडित …

आतंकी की जाने, गुंडे की परिभाषा भूल गया

गुंडे गौरक्षको का दर्द बया करती तथा सरकारों के ढकोसले पर मोदी जी को नसीहत देती मेरी ताजा रचना– रचनाकार- कवि देवेन्द्र प्रताप सिंह “आग”, इटावा, उ.प्र. Whatsapp – …

कड़वा सच -क्यों करते ढोंग अभी भी क्यों हैं चैन अमन की उम्मीदें

फ्रांस, ब्रसेल्स, भारत, अमरीका, बांग्लादेश तथा अन्य देशों के शहरों के इस्लामिक आतंक के शिकार होने पर भी मौन दुनियाँ से आतंकियों के धर्म की पहचान और खात्मा करने …

मेरी मन व्यथा

मेरी मन-व्यथा — चहुंओर हमें अंधियारे की जयकार सुनाई देती है निशचर की निर्भयता उर हाहाकार सुनाई देती है घनघोर घटा काली काली उर ग्रहण भानु पर छाया है …

मुलायम जी अब करो आगे अपना परिवार

बुलंदशहर की घटना से आहत, तथा up की मौजूदा हालत से व्यथित हो, मेरी कलम से ये पंक्तियाँ निकल ही पड़ी– “करो आगे अपना परिवार” भतीजे, चाचा को उपहार, …

“एक बार शिव-तांडव कर दो काश्मीर की घाटी में”

कश्मीर में आतंकियों के समर्थन पर होने वाले दंगों पर पुरानी सरकारों की तरह सुस्त रवैए पर भारत सरकार पर कटाक्ष करती मेरी ताजा रचना– रचनाकार- कवि देवेन्द्र प्रताप …

एक देश दो निशान ? दो विधान ? नागालैंड को अलग पासपोर्ट ? ?????

बड़ेगा गुमान शुरू होगा अपमान और शत्रुओं का ऊँचा मापदंड होता जाएगा खोएगा अतीत, देशप्रेम ज्वाल होगी शीत हावी देशभक्ति पे पाखंड होता जाएगा चहुंओर होगी अंधकार की ही …

मोमीनों की असलियत ??

आतंकी राह चला जो भी उसको सबकी खैरात मिली जो खेले खूनी खेल उसे क्या हूरो की सौगात मिली दो चार देशप्रेमी मोमिन, बाकी आतंक समर्थक हैं तंजील के …

ईद मुबारक ??

ईद मुबारक ??? ???? एक शक्तिमान की शहादत पे रोई थी जो वो ज़मात हत्याओं की भी मुरीद हो गयी हिंदू त्योहारों पे ज्ञान बांटें बरबादियों का पाक, साफ …

तो हम ईद मुबारक कह दें

“तो हम ईद मुबारक कह लें” कैराना में हिंदू रह लें घर-घर ना आतंकी टहलें हम सहते जाकिर ओवैसी ये कमलेश तिवारी सह लें बाबर की मस्जिद ये ढह …

कैसा है ईमान मुसल्लम ?

कैसा है ईमान मुसल्लम ?? देखो ये ईमान मुसल्लम ढाका में रमजान मुसल्लम कैसे ये फल फूल रहे हैं आतंकी अरमान मुसल्लम जहाँ थे कभी मलमली बिस्तर चलते अब …