Author: davendra87

तुम जो रूठे किनारा मिलेगा कहां

झूठ का दौर है झूठा हर ठौर है मेरे सच को ठिकाना मिलेगा कहां जब तलक तेरे दिल मे हूँ महफूज़ हूँ तुम जो रूठे किनारा मिलेगा कहां धूप …

चीनी का बोरा

लहजे में फिजा में मिठास है घर मे शीतल सुमन सुवास है प्रभास है घर में। गमो की घुड़दौड़ पर नन्ही लगाम है सुबह सुहानी मदमस्त शाम है। हवा …

तुम्हारे बिना

लब खामोश रहे लेकिन ख्वाहिश गूंजी सूने भवनों में तेरी आँखों के दो आंसू आ टपके मेरे नयनों में। तेरा मेरा नाता क्या है सिसक सिसक कर पीड़ा रोये …

सितम गुलों का न झेला जाएगा

अभी तो ये खेल खेला जाएगा तुम्हारे पीछे सारा मेला जाएगा खुश है वो शख्स महफिले यार में देखना शहर से अकेला जाएगा मंजिल की ओर बढ़ चौकन्ना रह …

हम और तुम

*हम और तुम* जहां की रंजिशों में प्रेम के गीत रचेंगे हम और तुम अब यादों के राजमहल में रोज मिलेंगे हम और तुम तुम्हारे सुरों के संगीत पर …

मेरी यादों की गुल्लक

ठहर जाओ चाँद तारों ठहर जाओ रात ठहर जाओ साजन अभी देर है बहुत होने में प्रात कर लेने दो मुझे मेरे हिस्से का श्रम जानती हूँ नही है …

हिन्दी

भारत माँ की भाषा हिन्दी कवियों की अभिलाषा हिंदी ख्वाब संजोए अंतर्मन की मधुमय शीत सुवासा हिन्दी अखिल विश्व में है सम्मान सार्थक सकल प्रतिष्ठावान देश काल से परे …

बापू अपनी छाया का हमको भी आशीष कमल दो

बापू अपनी छाया का हमको भी आशीष कमल दो हम नन्हे सत्पथ के राही सत्पथ का साहस संबल दो चक्षु पटल के बाहर भीतर अच्छाई देखे हम हर पल …

गई तू कहाँ छोड़ के

सावन सूना पनघट सूना सूना घर का अंगना बहना गई तू कहाँ छोड़ के। दिन चुभते हैं काटों जैसे आग लगाए रैना बहना गई तू कहाँ छोड़ के। बचपन …

प्रेम दिवस

इज़हार-ए- मोहब्बत का होना उस दिन शायद मुमकिन था वैलेंटाइन डे अर्थात प्रेम दिवस का दिन था कई वर्षों की मेहनत का फल एक कन्या मित्र हमारी थी जैसे …

वतन के वास्ते जीना चाहता क्यों नही कोई

वतन के वास्ते मरने की हसरत सबके दिल में है वतन के वास्ते जीना चाहता क्यों नही कोई चलेंगे साथ इक पथ पर सभी के काफिले लेकिन मिलकर इक …

फिर आऊंगा गीत लिए

मिलन के बाद एक दूसरे से बिछड़ रहे प्रेमी प्रेमिका का संवाद- मत रोक मुझे अब जाने दे ऐ मीत मेरे, मेरे साथी फिर आऊंगा गीत लिए मनमीत मिलन …

यकीं तुमने मोहब्बत पर जो दिल से किया होता

कहीं कुछ भी नही है जो तुम्हारी जद के बाहर है यकीं तुमने मोहब्बत पर जो दिल से किया होता नजर जाती जहां तक बस दरख्तों की कतारें थी …

इक मेरे रहने से क्या होता है

इक मेरे रहने से क्या होता है तेरे बिन खाली मकां होता है जो कह न सके हिम्मत से सच मेरी नजर में वो बेजुबां होता है जंग है …

यूँ मिला किसी अजनबी से नही

हौंसला है अगर वक़्त भी साथ है मुश्किलें हैं बड़ी आदमी से नही है दिया जल रहा रोशनी के लिऐ कोई चाहत उसकी किसी से नही फूल चुनकर लिए …

इतना साथ निभा देना

यदि तुम मुझको जान सके हो इतना साथ निभा देना मेरे होने का आशय दुनिया को समझा देना मैं सक्षम पर वक़्त नही था जो सम्मुख वह सत्य नही …

चिता

अनल की लपट धधकती झपट देह कर भस्म निभाती रस्म हृदय उदगार जीव की पुकार पीर प्रतिकार खत्म चीत्कार कर्म का लेख नियति उल्लेख जिधर भी देख भ्रम मति …