Author: davendra87

मेरी यादों की गुल्लक

ठहर जाओ चाँद तारों ठहर जाओ रात ठहर जाओ साजन अभी देर है बहुत होने में प्रात कर लेने दो मुझे मेरे हिस्से का श्रम जानती हूँ नही है …

हिन्दी

भारत माँ की भाषा हिन्दी कवियों की अभिलाषा हिंदी ख्वाब संजोए अंतर्मन की मधुमय शीत सुवासा हिन्दी अखिल विश्व में है सम्मान सार्थक सकल प्रतिष्ठावान देश काल से परे …

बापू अपनी छाया का हमको भी आशीष कमल दो

बापू अपनी छाया का हमको भी आशीष कमल दो हम नन्हे सत्पथ के राही सत्पथ का साहस संबल दो चक्षु पटल के बाहर भीतर अच्छाई देखे हम हर पल …

गई तू कहाँ छोड़ के

सावन सूना पनघट सूना सूना घर का अंगना बहना गई तू कहाँ छोड़ के। दिन चुभते हैं काटों जैसे आग लगाए रैना बहना गई तू कहाँ छोड़ के। बचपन …

प्रेम दिवस

इज़हार-ए- मोहब्बत का होना उस दिन शायद मुमकिन था वैलेंटाइन डे अर्थात प्रेम दिवस का दिन था कई वर्षों की मेहनत का फल एक कन्या मित्र हमारी थी जैसे …

वतन के वास्ते जीना चाहता क्यों नही कोई

वतन के वास्ते मरने की हसरत सबके दिल में है वतन के वास्ते जीना चाहता क्यों नही कोई चलेंगे साथ इक पथ पर सभी के काफिले लेकिन मिलकर इक …

फिर आऊंगा गीत लिए

मिलन के बाद एक दूसरे से बिछड़ रहे प्रेमी प्रेमिका का संवाद- मत रोक मुझे अब जाने दे ऐ मीत मेरे, मेरे साथी फिर आऊंगा गीत लिए मनमीत मिलन …

यकीं तुमने मोहब्बत पर जो दिल से किया होता

कहीं कुछ भी नही है जो तुम्हारी जद के बाहर है यकीं तुमने मोहब्बत पर जो दिल से किया होता नजर जाती जहां तक बस दरख्तों की कतारें थी …

इक मेरे रहने से क्या होता है

इक मेरे रहने से क्या होता है तेरे बिन खाली मकां होता है जो कह न सके हिम्मत से सच मेरी नजर में वो बेजुबां होता है जंग है …

यूँ मिला किसी अजनबी से नही

हौंसला है अगर वक़्त भी साथ है मुश्किलें हैं बड़ी आदमी से नही है दिया जल रहा रोशनी के लिऐ कोई चाहत उसकी किसी से नही फूल चुनकर लिए …

इतना साथ निभा देना

यदि तुम मुझको जान सके हो इतना साथ निभा देना मेरे होने का आशय दुनिया को समझा देना मैं सक्षम पर वक़्त नही था जो सम्मुख वह सत्य नही …

चिता

अनल की लपट धधकती झपट देह कर भस्म निभाती रस्म हृदय उदगार जीव की पुकार पीर प्रतिकार खत्म चीत्कार कर्म का लेख नियति उल्लेख जिधर भी देख भ्रम मति …

चाँद आसमां और इंसान

न जाने कब से आसमां अंगारों मे जलता रहा है दहकते शरारों को जमीं और चाँद मे बदलता रहा है इन्सानों का हाल भी कुछ आसमां के जैसा है …

सीख-हास्य कविता

कई बरस के बाद जिंदगी में दिन ऐसा आया था जब प्यार मोहब्बत की गलियों में खुद को बेबस पाया था लात घूंसों की ऐसी घनघोर घनी बरसात हुई …

आना तू फिर से

ओ मेरी रानी तेरी कहानी तुझको सुनाऊंगा बातें बनाऊँगा आना तू फिर से आना तू फिर से भइया मै तेरा कन्हैया मै तेरा नाचूंगा गाऊंगा बंशी बजाऊंगा आना तू …

आखिर क्यों तुम समझ न पाए

कब से बैठी आस लगाये कितने दिवस के बाद तुम आये मुझको है जाने की जल्दी आखिर क्यों तुम समझ न पाए वक़्त बड़ा,बेरहम हुआ है तुम्हे मिला न …

क्षणिक

जवाब सीधा है सरल है पीछे कई कठिन सवाल है क्षणिक जो भी है एक लंबा संघर्ष है अंतराल है मुस्कुराहटें जो प्रतिमान हैं दिव्यता की पहचान हैं अंतस …

अल्फ़ाज़

बेशक मुझे दो अपने इश्क़ का नज़राना मगर चाहिए उसमे इश्क़ नजर आना भरी महफ़िल में कैसे ना कर देते अमानत तुम्हारी खुद आकर देते लौट जा,और देर यहां …