Author: shiv charan dass

तेजाब की बौछार में-गजल-शिवचरण दास

तेजाब की बौछार में चेहरा बचाना चाहिये प्यार और तकरार में सेहरा बचना चाहिये. आंसुओं की बाढ से बहते नहीं गम के पहाड दर्द की देहलीज पर भी मुस्कराना …

शतरंज की सी चाल-गजल-शिवचरण दास

शतरंज की सी चाल उलझती हुई मिली हर शख्स की नकाब उतरती हुई मिली. दोस्तों की भीड में अपना कोई न था जो भी मिली निगाह बदलती हुई मिली. …

गालियों के कलाम-गजल-शिवचरण दास

गालियों के कलाम सब चाबुकों के सलाम देते हैं सरे बाजार घर फूंकनेवाले दान मे कायनात देते हैं. अपनी औकात न भूल जायें जुर्म की तीखी लगाम देते हैं. …

प्रश्न सारे आजकल-गजल-शिवचरण दास

प्रश्न सारे आजकल गुम्बद के खम्बे हो गये हैं चादरे सिकुडी हैं सारी पैर लम्बे हो गये हैं. यों विरासत में मिली त्रासदी की आग यह हंस उजले थे …

सपने सजाकर देखिये-गजल-शिवचरण दास

आप अपने आप को अपना बनाकर देखिये जिन्दगी वरदान है सपने सजाकर देखिये . जब इरादे नेक हों काम कुछ मुश्किल नहीं होंसले के साथ कुछ हिम्मत जुटाकर देखिये. …

रोशनी दायरों में सिमटती रही–शिवचरण दास

रोशनी दायरों में सिमटती रही और हंसी वायदों में उलझती रही. कैद ख्वाबों को मुठ्ठी में कर ना सके जिन्दगी हर कदम पर फिसलती रही. मेरे आका ने किस्मत …

जो हमारी पीर से अन्जान-गजल-शिवचरण दास

जो हमारी पीर से अनजान है उसकी मुठ्ठी में हमारी जान है. आंख में आंसू हमारे पावं में छाले हर कदम पर एक नया शैतान है. वो भला देगा …

इतनी कडवी है-गजल-शिवचरण दास

इतनी कडवी है हकीकत पी नहीं हम पायेगें पी लिया जो घूंट भी तो जी नहीं हम पायेगें. वहशियों की गोलियां जख्मी सीना कर गईं जख्म इतने हो गयें …

क्या निकले आप–शिवचरण दास

सच्चाई की करके बात दुनिया भर को छ्लते आप वक्त पडा तो पहचाना क्या समझा क्या निकले आप. नियम बनाकर स्वयं तोडते आंख बचाकर करते पाप दुनिया चाहे भाड …

दम लिया-गजल-शिवचरण दास

दोस्ती का हक निभाकर दम लिया रिश्ते नातों को भुलाकर दम लिया. सारी दुनिया की सजा हमको मिली बेकसी ने घर जलाकर दम लिया. रोशनी के वास्ते जो लड …

जिन्दगी को आजमाओ-गजल-शिवचरण दास

जिन्दगी को आजमाओ तो मजा आ जायेगा जो किसी का घर सजाओ तो मजा आ जायेगा. अपने गम पर रात दिन रोना बहुत बेकार है दर्द दुनिया का उठाओ …

मन की गहरी-गजल-शिवचरण दास

मन की गहरी दूरियों को पाटता है कौन गैर की मजबूरियों को बांटता है कौन. इन अन्धेरी खाईयों मे रोशनी तो कीजीये कितने विषधर पल रहे हैं जानता है …

उम्र भर हम सिर्फ धोखा खायेंगें-गजल-शिवचरण दास

उम्र भर हम सिर्फ धोखा खायेगें फिर भी खुद को बदल न पायेगें. दोस्त सब दुशमन हुए तो क्या हुआ हम तो सबको अपने गले लगायेंगें . जिसका हमने …

यूं दिलों में ताजगी आ जाये-गजल-शिवचरण दास

यूं दिलों में ताजगी आ जाये काश कि लबों पर रागिनी आ जाये काश. चाहते हैं पाना जिसे हर हाल में जिन्दगी में वो खुशी आ जाये काश. तीरगी …

उलझनो की किताब-गजल-शिवचरण दास

उलझनों की किताब लगते हैं सारे चेहरे नकाब लगते हैं. चाक दामन हुआ तो पहचाना अब तो कांटे गुलाब लगते हैं. आपको क्या गरज है पीने की आप खुद …

आंख दिखलाने लगे हैं-गजल-शिवचरण दास

अपने साये ही यहां जब आंख दिखलाने लगे हैं दोपहर में भी हमें तारे नजर आने लगे हैं. इस शहर में हर तरफ शान्ति का राज है दिन दहाडे …

भूख की मारी हुई यह जिन्दगी-गजल-शिवचरण दास

भूख की मारी हुई यह जिन्दगी दर्द की आरी हुई यह जिन्दगी. पावं काटे हैं जमाने ने यहां सिर्फ बैशाखी हुई यह जिन्दगी. झूंठ के पलडे सदा भारी रहे …

अपने ही यहां अक्सर छ्लेंगें-गजल-शिवचरण दास

पांव नंगे रेत में चलकर जलेगें हमको अपने ही यहां अकसर छलेंगें. राख हो जायेंगी जिस दिन झोपंडी अपनी उनके महलों में दिये घी के जलेंगें. राह मे कितनी …