Author: chandramohan kisku

शांति की कविता

आसमान में जब गुस्से का आग जल उठेगा जब खेत में उगेगा बोमा,बारूद और बन्दुक हवा में रहेगा विष धर्म दो रूपया भाव से बिकेगा मानवता खून से लतपथ …

माओवादी नहीं हूँ

मैं खेत में खलिहान में काम करता हूँ ईंट भट्टा में क्रेशर मशीनों में काम कर पेट भरता हूँ तुम्हारी भाषा मुझे आती नहीं देह का रंग मेरा अलग …

आजादी का सपना

खिड़की की उसपार से झांक रही वो दोनों आँखें सपना देखती है अनंत नीले आसमान की सुगंध विखेरनेवाली हवा की और पंख पसारकर हर्ष और आनंद के साथ उड़ने …

हूल का आग जला

जब छीन उजाड़ रहे थे लोगों की घर,आंगन कपड़े-लत्ते हरियाली जंगल खेत-खलिहान और मिट्टी के अंदर की पानी तब हूल का आग जला काला धुँआ निकला आसमान की ओर …

तुम्हारा प्यार पाकर

तुम्हारा प्यार पाकर पहाड़-पर्वतों के पेड़-पौधे अति सुन्दर ‘हरे’हुए है नदी भी अपनी चाल बदली है कल-कल गीत गाकर बहती जा रही है कोयल भी गा रही है घर …

याद है तुम्हे ?

याद है तुम्हे कब माँ के साथ बहुत प्यार के साथ मुलाकात किया था जीवन की चढ़ाई-उतराई दुःख और कष्टों को सुलझाने के लिए अनुभवी पिता के पास गये …

कविता की जंगल

लिखी गई है बहुत सी कवितायेँ पहले बहुत सारी जगहों पर अनेक विषयों पर देश और विदेशों में भी लिखी जाएगी बहुत सी कवितायेँ वहां जहाँ लिखी नहीं गई …

प्यारी

मैं आनंद दायिनी आँगन में फूलों सा खिलता हूँ सुगंध फैलता हूँ . पंख फैलाकर उड़ती हूँ अनंत नील आसमान में शिकारियों की तीक्षन दृष्टि मुझ पर है डर …

कित -कित खेलवाली बचपन

कित -कित खेलवाली बचपन —-चंद्र मोहन किस्कू ———————————- नगर की कंक्रीट जंगल में खो गई है मेरी कित -कित खेलवाली बचपन आंगन,जंहा लेटकर दादाजी से कहानी सुनता था अब …

बौद्ध की हंसी

बौद्ध की हंसी ————— आज ही खबर मिला पुरे दुनिया के लोगों को मालूम हुआ कल राजस्थान के पोखरण में अहिंसा के पुजारी गौतम बौद्ध के जन्मदिन पर वैज्ञानिकों …

नींदवाली स्वप्न

नींदवाली स्वप्न ——————- रात की नींद में स्वप्न देखती है लड़की हंसती है निश्चिंत होकर खुशी से जाती है और दौड़ती रहती है रंगीन तितलियों के पीछे पंक्षी बनकर …

मेरी स्वप्न पर IPC 144

मेरी स्वप्न पर IPC 144 ———————- मेरी फूटी छज्जा पुआल की झोपडी में खजूर पाटिया फटा गद्धा पर लेट कर तकते रहता था आसमान की ओर और सोरेन इपिल …

स्वीकारता हूँ

स्वीकारता हूँ _________ मै स्वीकार करता हूँ तुम्हारी गरीबी हालत अत्याचार और शोषण के लिए मै भी एक कारण हूँ जब तुम छोटी थी कुल्ही धूल में खेलती रहती …