Author: Bindeshwar prasad sharma

महा पंडित – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

अपने मन के रावण मारो, इतना तो जरूरी है दहन करते तुम रावण को, क्या तेरा मजबूरी है। खूब जश्न मनाते हो तुम, खूब दिखावा करते हो रावण के …

आँसू – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

जान बूझ कर फंसा है तड़पने दीजिये प्यार किया है थोड़ा सा भटकने दीजिये। घाव जिंदा है नासूर बन जाने दीजिये कुछ समझा कुछ समझ जाने दीजिये। इसके होस …

मृदुल वाणी – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

उनके मुख मृदुल वाणी से रस अमृत सुधा बरसता है उनके प्रखर मुख मंडल से ऐसे ये भाल चमकता है। ज्ञान पराग की तुमड़ी से केसर का चूर्ण छलकता …

पाहन – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

पाहन में विश्वास है इतना, जागृत होकर देखो धर्म संस्कृति ऐसे चलती, जागृत होकर देखो। इस देश का माटी चंदन, जहाँ अमृत गंगा जल है जगह जगह पर देव …

अमर गाथा – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

जिसने गीता कुरआन लिखा है रामायण का गुणगान लिखा है। बाइबिल – गुरुग्रंथ इतना प्यारा कृष्ण लीला रसखान लिखा है। डूबे तुलसी बाल्मीकि डूबे भक्त हरि का सम्मान लिखा …

मंजर – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

लुत्फ़ – ए-रवानी का अब सिलसिला देखिये इस बाग – ए – चमन में फूल इक खिला देखिये। है कितनी दिलकश, नहकतों वाली मंजर अब्रे बहार, इनकी शिकवा न …

कैप्सूल – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

फायदा थोड़ा भी नहीं, न ज्यादा नुकसान करेगा सत्तू आटे की बनी कैप्सूल, न कोई पहचान करेगा। दवा के नाम पर, आज भी लूट अभी तक जारी है लोग …

संकट – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

संकट अगर आज है, तो कल टल जायेगा भरोसा रखिये, हंस कर निकल जायेगा। ज्यादा दिन तक, कोई भी रुक नहीं सकता मेहमान सा, अपने आप वह चल जायेगा। …

कुण्डलियाँ – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

कुण्डलियाँ 01 काल रुके ना बात से, ज्ञान बिके ना हाट टले नहीं होनी कभी , मृत पड़े जब घाट। मृत पड़े जब घाट, लगे सब रोने – धोने …

मुक्तक – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

01 वाह रे इंसान,  जूल्म देख क्यों चुप रहता है क्यों नहीं आगे आता, बुजदिल सा छुप रहता है। जुबां पे ताला बंद रख, कुछ न बोल पाता है सुस्त …

दोहे – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

एक कहानी पर अधारित चंद दोहे। 1 भारी कलियुग पड़ रहा, मानव मन के साथ, दिल भी पत्थर हो गया, इस कलियुग के हाथ। 2 कुमकुम निकली सैर को, …

दोहे -बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

घड़ा काठ का आग पर, चढ़े न दूसर बार निकली बात जुबान से, फिर आवे ना यार। दूध का जला छाछ भी, फूंके, पीये लोग डरते हैं बलवान से, …

देश प्रेम के दोहे – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

सच्चे प्रेमी देश के, हम सब जो भी लोग रहते डूबे भक्ति में, तनिक न करते लोभ। सच्चे सैनिक देश के, रख लेते हैं मान पूजा उनकी है रक्षा …

मेरी जिंदगी – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

कभी हंसाती है तो कभी रुलाती है मेरी जिंदगी ना जाने क्या – क्या खेल दिखाती है मेरी जिंदगी। हम तो गफलत में ऐसे इसी तरह भटकते रहे अबतक …

भाईचारा – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

समझो क्या है भाई चारा बिन इसके है कहाँ गुजारा। बिन मेल कुछ कहाँ है संभव साथ मिले तो दिखे किनारा। हर प्रयास में संग जरूरी है सफल जब …

हलचल – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

सुरमई आँखों में काजल क्या बात है गली में हो रही हलचल क्या बात है। उनकी नाज वो नखरे जान ले लेगी हो जायेंगे कत्ल कितने क्या बात है …

छंद – (कुण्डलियाँ) – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

नहीं चाहिये प्रीत अब, नहीं चाहिये मीत इज्जत अपनी बेचकर, नहीं चाहिये जीत। नहीं चाहिये जीत, दुनिया अंधी हो गयी कैसे यह सब रीत , इतनी गंदी हो गयी। …

ख्यालों में – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

याद अक्सर आ जाती हो मेरे ख्यालों में मुझे तो अब भी छोड़ दो मेरे इन हालों में। चमकती रहो सितारों सा तुम जहाँ भी रहो मुझे अंधेरा ठीक …

दोहे – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

भाषा अविरल जानिये, हृदय तल पर भान हिन्दी हिन्दुस्तान में, भर देती है जान। सरल सुंदर सुडौल है, मीठे जिसके बोल सरगम सी सुर – ताल है, संगम है …

हिन्दी दिवस – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

  तारीख चौदह माह सितम्बर, सन उन्नीस उनचास मिली जगह थी संविधान में, दिवस हिन्दी की खास। सिंधु में आर्यों की हिन्दी, फैली थी उत्तर भारत संस्कृत कि हिंदी …

गणनायक – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

गणनायक गणेश का, कर लो मन में ध्यान देवताओं में प्रथम पुज्य , देव कृपा निधान। ऋद्धि – सिद्धि विनायक, हैं करुणा निधान बाधा – विघ्न हैं हरने वाले, …

हरतालिका तीज – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

भक्ति में थी लीन पार्वती शिव शंकर का साधना में तल्लीन पार्वती शिव शंकर का। देख सखी, सखी की हालत तब कुर्बान हुई बाधा विघ्न सब दूर करने को …

मेरे अल्फाज़ – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

पत्थर को पुजते – पुजते लोग क्यों पत्थर बन गये एक – दूसरे को नहीं समझते इतने बत्तर बन गये। कहाँ गयी वो शर्म – हया जो अपने दिल …

कृपानिधान – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

तेरी शरण में आये हैं हम, हे कृपा निधान हमें सुनाओ केशव – माधव, तुम मुरली की तान। नहीं चाहिए हाथी घोड़ा, न अपनी पहचान भर जाए बस पेट …

मन की अनमोल बातें – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

मन की अनमोल बातें 01. प्यार करने में कोई निवेश नहीं होता बाटते रहिये सूद समेत वापस आयेगा। 02. स्वर्ग और नर्क दोनों तुम्हारे सामने है तय करना है …