Author: Bindeshwar prasad sharma

गीत – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

भोजपुरी गीत काहे बइठल बाड़ू मनवां के मार ए गोरी लागत नइखे काहे जियरा तोहार ए गोरी। विरह के आग में जलत बाड़ू काहे याद पिया के अब काहे …

आस्तिन का सांप – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

आग मत लगाओ, अब दाग मिटाओ कुण्डली मार बैठा, नाग भगाओ। आस्तिन का सांप, फन काढ़े बैठा उस दुश्मन का पुराना राग हटाओ। घर से लेकर बाहर तक पहचानो …

ख्याल बदलिए – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

ये दुनिया धन के लिये रोती बहुत है पाने के ख्याल में सोचती बहुत है। किस किस को क्या क्या समझाये अब हम ले जाना नहीं पर बटोरती बहुत …

दिल की आरमां – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

प्यार ऐसा किये कि बदल ही गये मेरे दिल के आरमां मचल ही गये। था भरोसा नहीं फिर भरोसा किया प्यार मंजिल को पाने निकल ही गये। जिगर में …

बेवकूफ़ – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

चंदन की लकड़ी समझ, मैं बबूल घीसता रहा मूर्खता थी मेरी, जो उसूल पीसता रहा चापलूसी, ठग बजारी से, कहाँ तक बचियेगा जिसे वाटर प्रूफ समझा, वह भी रीसता …

नादानियाँ – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

याद आने लगे हैं वो यादों के पल कुछ ख्यालों में आ गया बीता जो कल। अब तो तन्हा भी रहना गवारा हुआ इश्क मुहब्बत का कैसा देखो ये …

मेरी – तेरी – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

ये मेरी – तेरी, इसकी – उसकी क्या है रिश्ता – नाता, ये इश्क – मुहब्बत क्या है। ये लेना-देना, ये बुरा – भला क्या है हम तुम और …

हाइकु – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

कवि – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु) हाइकु पानी का स्त्रोत रसातल की ओर गहरी चिंता। तपती धरा जेठ की दोपहरी सूखता जल। एक कदम स्वच्छता अभियान स्वच्छ भारत। कटते …

दोहे – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

सतयुग आयु लाख बरस, त्रितायू दस हजार द्वापर घट हजार भये, कलियुग सौ में भार। करो जितना करना है, ये काया है कांच जाने कब चटक जाये, मानो बिलकुल …

एहसास – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

क्यों उलझे इनके बातों में है कद्र नहीं जज्बातों में ये बहरे गूंगे लंगड़े हैं इनकी संख्या जामातो मैं मूकदर्शक बन हम देख रहे क्यों दर्द नहीं एहसासो में।

दोहे – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

आखर आखर योग से, शबद दिये बनवाय ताल मेल संयोग से, दसो दिशा लहराय। शब्द को संधि कीजिये,उपजे मन की बात जो समझ में आ जाये, कोउ न पूछे …

नसीहत – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

न समझिये ना समझाने की बात करो लगी आग उसे बुझाने की बात करो दिल जल रहा है उसे और न जलाओ प्रेम से नीयत नसीहत की बात करो।

उम्र – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

उम्र चाहे जितनी हो,दिल पे कोई फर्क नहीं पड़ता रिश्ता बनाये जो रखता है,उनमें दर्क नहीं पड़ता। खुद को वक्त पर बदल लेना भी,कोई कृष्ण से सीखे कर्म अगर …

कवि – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

जिसका जो है मन वही लिख रहा है जैसे – तैसे कविता सीख रहा है। कवि सम्मेलनों में क्या कहे हम गला फाड़ – फाड़ कर चीख रहा है।

अपनी सोच – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

किसी को प्यार दो तो सोचेगा किसी को मार दो तो क्या सोचेगा। जिसे मदद चाहिए वह अपंग है जो मदद देगा वह तंग है। सुख में सौ साथी …

ग़ज़ल – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

उनके दहलीज पर पाँव जमाना,अब जमाना लगता है उनके तबस्सुम निगाहें नूर, कितना तराना लगता है। खुदा खैर करे, जिंदगी संवर जाये अपनी,उसे देखकर उनके खुद का पहरेदार भी, …

होली मुबारक – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

चित्त चेतना जागृत हो, मन निर्मल हो विचार सारे गम दुख भूलकर, खोलो मन के द्वार। राजा रंक सब एक भये,रहे न मन में खार होली रंग चटकार का, …

होली हाइकु – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

रंग गुलाल मन बसे पलास उड़े आकाश। राधा – मोहन संग सखि सहेली गावत होली। मस्त फागुन अगन विरह के मीठे खुमार। बढ़े उमंग बच्चों बूढ़ों के संग करता …

हाइकु – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

देखो आकाश टेसू के रंग लाल जिया बेहाल। फूले पलास हाय रे मधुमास गोरी के आस। बसंती हवा होली के हुड़दंग पिया के संग। मन को मोहे फागुन के …

नटवरलाल – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

कर्ज बैंकों से लेकर अमीर ,अपना ये देश छोड़ देते हैं गरीब किसान कर्ज में डूबकर,अपना देह छोड़ देते हैं। वाह रे माल्या और नीरव जैसे गद्दार,देश के नटवर …

बरकत – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

कीड़े मारने वाले दवा में भी अब कीड़े पड़ रहे जिसके थे लम्बे उमर समय से पहले सड़ रहे। हाय तौबा मची है मिलावट की आज दुनिया में शादी …

महाशिवरात्रि – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी महाशिवरात्रि निष्ठापूर्वक अनुनय-विनय करने की एक रात की जग राता । चंद्र और सूर्य का योग परम धाम मोक्ष प्राप्त करने की अवधि। बहुत सारे दंतकथा …

पकौड़ी नीति – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

गलती तभी होती है जब कोई भी विकल्प नहीं होता समस्या जस की तस रह जाती,काया कल्प नहीं होता। उत्पादन कम और बड़ी जन समूह, कौन बचाएगा इसे खेत …