Author: Bindeshwar prasad sharma

गजल – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा बिन्दु

  शिलशिला प्यार का चल रहा जमाने से प्यार हो जाता बस रिश्ता एक बनाने से   इसे खेल मल समझो बड़ी कयामत है ये फलता और फूलता भी …

लोभा गइनी हम – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा बिन्दु

    चॉद तहरा के देखनी लोभा गइनी हम गम जतना रहे सब भुला गइनी हम।   चाह में ऐसे काहे बदल गइनी हम का कहीं अइसन काहे निकल …

भीज गये सपने – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

भीज गये सपने   जब सपने आये ऑखों में तो नीन्द खुली थी रातों में वो सपना तो इक सपना था जो भीज गये बरसातों में।   इक भूल …

दिल कोई ले गया – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

  हम देखते रहे दिल कोई ले गया ढं़ूढते रहे उनको जो दर्द दे गया।   ऐसा लगता वह मेरे ही पास में यार रहता था मेंं भी तलास …

आचरण – बी पी शर्मा बिन्दु

आचरण कर्ज में रूपया पैसा मिलेगा कर्ज में प्यार मिलता नहीं। जो चाहो सब कुछ खरीदो बाजार में ज्ञान बिकता नहीं। झूठ कबतक तुम बताते रहोगे झूठ छुपाने से …

नशा खुरानी – बी पी शर्मा बिन्दु

  नाम ही काफी है समझने परखने के लिए किसी के पास कुछ भी नहीं आम आदमी की तरह सारा व्यवहार मिलता जुलता कोई अंतर नहीं अंतर है ऑख …

अमानुश से मानुश – बी पी शर्मा बिन्दु

    चोर उचक्का पाकेटमार ठग लूटेरा बेईमान। अपहरण ड़ाका कत्लेआम घूस खोरी सरेआम। हवाला घोटाला बाप से बाप क्यों करता है ऐसा पाप। हेरा फेरी जालसाज तस्करी क्यों …

आपकी तस्वीर ( गजल ) – बी पी शर्मा बिन्दु

    आपकी तस्वीर अब भी संभ।ल कर रखे  हैं अपना दिल आपके लिए निकाल कर रखे  हैं।   न किया कबूल रिश्ता -ए- इंतजार में एक दीया बस …

गज़ल – बी पी शर्मा बिन्दु

मेरे चश्म उनके चेहरे का नूर पढ़ता रहा बेवफा क्या जाने अपना कसूर पढ़ता रहा।   हमने की थी कोशिशें बहुत उन्हें पाने की हाले दिल कि ही अपनी …

सम्पत्ती – बी पी शर्मा बिन्दु

अवैध तरीके से कमाया धन उससे बनाये सम्पत्ती सब के सब पाप है इसके भोग में लिप्त सारे पापी है । यह आपके भाग्य और कर्मो का लेखा जोखा नहीं …

जीवन की पहचान

    सबकी मंजिल एक है,मालिक सबका एक धरती-अम्बर एक है साथी ,सूरज चंदा एक। आत्मा अनेक एक परमात्मा, है रूप अनेक माया-मोह बंधन में क्यों, अब बर्बस विवेक। …

चेतना की डोर

  अतीत को न आंकिये अब नासमझ निगाहों से बन जाएगी जहर जिंदगी बेबुनियाद इरादों से। आने वाला कल ही भविष्य के लिए उजागर होगा मानवमात्र का उसका कर्म …