Author: Bindeshwar prasad sharma

गरीब बाप – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

गरीब बाप उनके जीवन में कहाँ, कब कोई सबेरा था जिंदगी गुजारा संघर्ष में, जहाँ अंधेरा था। पते की बात ही करते रहे हमसफर बनकर गलती बस इतने कि …

आकाश – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

भग देखो आकाश में एक दिन एक रात में। दोनों का काम उजाला बड़ा यह है मतवाला। एक राजा है दिन का एक चाँदनी रात की । एक तपता …

ग़ज़ल – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

धरती है तो सबकुछ, वर्ना कौन कहाँ ? ना जन्म होता ना मृत्यु , उत्थान ना पतन। तीन लोक – चौदह भुवन सूने पड़ जाते धरती – आकाश सभी …

ग़ज़ल – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

दिल पर एतबार अब होता नहीं मुझको किसी से भी प्यार अब होता नहीं मुझको। जालिमों ने हमें लूट लिया है इस कदर किसी का इंतजार अब होता नही …

दर्द दिल का – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

दर्द दिल का ना मेरा बढ़ाओ क्या होगा ये खुद को बताओ। तुम सोचो न ज्यादा कभी भी वक्त बाकी बहुत है अभी भी। हम मस्त मौला बिंदास ऐसे …

होली के गीत और नगमें-2019-बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

कुंडलियाँ – छंद भाईचारे प्रेम का , होली यह त्योहार मिल जातेे दुश्मन गले, देते रंग निखार। देते रंग निखार , डमाडम ढ़ोलक बाजे उसपर लगा गुलाल,खाओ पकवान ताजे। …

संदल – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

संदल संदल वन को महकते देखा संदली रंग चमकते देखा। कुंदन – कुंदन सा लगता है बसंती हवा बहकते देखा।। तपो भूमि की जैसी लगती चह – चह चिड़ा …

सक – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

सक में स्वभाव बदल जाता वक्त ऐसे यह निकल जाता। बात की तह तक जाता कौन आदमी ऐसे फिसल जाता। समझा भी तो देर हो गयी बाँझ पेड़ भी …

दुल्हिन – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

चूड़ी कंगन हाथ में , गजरा शोभे माथ कन बाली है सोभती , बिंदी पायल साथ। घूंँघट में बैठ जब गयी , तब आई मुस्कान रूप सलोना दिख गया …

ख़्वाब – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

ख़्वाब ही कुछ ऐसा था जो अधूरी रह गयी गिरेबान में झाँका नहीं जो दूरी रह गयी। खामख्वाह परेशान होते रहे जिंदगी भर मृग की तरह ढ़ूढता रहा पास …

रचनाएँ – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

बिजली चमकती जैसे आसमान का आईना बन गया लफ्ज़ इंसान का। हर चेहरे से परेशाँ है क्यों आदमी कोई मिलता नहीं अब पहचान का। ऐसा कोई नहीं पढ़ सके …

रचनाएँ – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

विद्या – दोहा जो मांगो मिलता सदा, भोले से वरदान निर्बल को भी देखिए , है तेरा संतान। दानव को वर में दिया, जो मांगा मुँह खोल हम मानव …

सैनिक वीर – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

चिथड़े – चिथड़े उड़ गये, खून की बह गयी नदियाँ फूट  पड़ा  ज्वालामुखी , दहल  गयी  सब  सदियाँ। कैसा  षडयंत्र  है  तेरा  , वार पीठ पर करने का डर …

शहादत – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

गद्दारों को फांसी दे दो, भीतर  घात  जो  करते हैं अपने वतन के  खाते हैं , गले दुश्मन  के लगते हैं। सबसे पहले घर को देखो, युद्ध फिर तुम …

बलिदान – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

चूड़ी रोयी – रोया कंगना, बिंदी माथ की गिर गयी अंगना सुहागन की सिंदूर लुटा है, चित विह्वल से करती क्रंदना। सूनी हाथों की मेहदी है , बिखर गये …

दोहावली – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

रखते सदैव साथ हैं , दिल अपने हनुमान । सीना चीर दिखा गये , राम नाम के शान।। भालू – बंदर साथ थे , जामवंत के संग । राक्षस …

दोहावली – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

सत्य शिवा सुंदर कहो, मन गहो महादेव। चंदन- वंदन नित करो, तभी भजो गुरुदेव।। भस्म रमाये फिर रहे , ऐसे भोले नाथ। स्वामी हैं त्रिलोक के, सबके ऊपर हाथ।। …

गीत – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

चंदन वन के जैसे महके चिड़ियों सा हम चह – चह चहके। वन ये उपवन चमन वतन में हम सोने के जैसे दहके।। ढ़ूढ रहे सूरज की लाली कहाँ …

श्रृंगार – छंद – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

श्रृंगार छंद रात में हम अब होते नहीं काम में बाहर रहते कहीं। तो बता बालक ये कौन है तू गयी जहाँ रह गयी वहीं।। नाक की ये नथिया …

श्रृंगार – छंद – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

श्रृंगार छंद राम को जानो भज लो सभी बोल कर सीता हनुमत अभी । भाग मत अब शरणा गत रहो पार भव सागर से हो अभी ।। झूठ की …

दोहे – (प्रयाग राज) – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

नागा साधू मस्त हैं, अपने – अपने ढंग। ऐसे बिगुल बजा रहे, सब हो जाते दंग।। मेला कुंभ प्रयाग में, लगी गंग के तीर। गंगा यमुना शारदा, संगम बहे …

दोहे – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

सूरदास ने रच दिया , अनुपम यह इतिहास । रूप सलोना लिख गये, जैसे प्रभु हों पास।। जड़ चेतन चैतन्य से, परख लिये अनुराग। ऐसा वर्णन कर गये, दिये …

गीत – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

गीत कोई तो गाया होता किस्मत को आजमाया होता। हुनर कोई आपसे सीखे सबों का दिल बहलाया होता। सीखकर लोग नाम कमा रहे महफिल वो अपना जमा रहे। आप …

गणतंत्र – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

हम नहीं अब चुप रहने वाले चाहे जितना भी आप कर लो । गणतंत्र सिखाता है सभी को मन ऐसे दिल प्रेम रस भर लो।। शत-शत नमन है वीर …