Author: Bindeshwar prasad sharma

शहादत – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

गद्दारों को फांसी दे दो, भीतर  घात  जो  करते हैं अपने वतन के  खाते हैं , गले दुश्मन  के लगते हैं। सबसे पहले घर को देखो, युद्ध फिर तुम …

बलिदान – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

चूड़ी रोयी – रोया कंगना, बिंदी माथ की गिर गयी अंगना सुहागन की सिंदूर लुटा है, चित विह्वल से करती क्रंदना। सूनी हाथों की मेहदी है , बिखर गये …

दोहावली – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

रखते सदैव साथ हैं , दिल अपने हनुमान । सीना चीर दिखा गये , राम नाम के शान।। भालू – बंदर साथ थे , जामवंत के संग । राक्षस …

दोहावली – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

सत्य शिवा सुंदर कहो, मन गहो महादेव। चंदन- वंदन नित करो, तभी भजो गुरुदेव।। भस्म रमाये फिर रहे , ऐसे भोले नाथ। स्वामी हैं त्रिलोक के, सबके ऊपर हाथ।। …

गीत – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

चंदन वन के जैसे महके चिड़ियों सा हम चह – चह चहके। वन ये उपवन चमन वतन में हम सोने के जैसे दहके।। ढ़ूढ रहे सूरज की लाली कहाँ …

श्रृंगार – छंद – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

श्रृंगार छंद रात में हम अब होते नहीं काम में बाहर रहते कहीं। तो बता बालक ये कौन है तू गयी जहाँ रह गयी वहीं।। नाक की ये नथिया …

श्रृंगार – छंद – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

श्रृंगार छंद राम को जानो भज लो सभी बोल कर सीता हनुमत अभी । भाग मत अब शरणा गत रहो पार भव सागर से हो अभी ।। झूठ की …

दोहे – (प्रयाग राज) – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

नागा साधू मस्त हैं, अपने – अपने ढंग। ऐसे बिगुल बजा रहे, सब हो जाते दंग।। मेला कुंभ प्रयाग में, लगी गंग के तीर। गंगा यमुना शारदा, संगम बहे …

दोहे – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

सूरदास ने रच दिया , अनुपम यह इतिहास । रूप सलोना लिख गये, जैसे प्रभु हों पास।। जड़ चेतन चैतन्य से, परख लिये अनुराग। ऐसा वर्णन कर गये, दिये …

गीत – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

गीत कोई तो गाया होता किस्मत को आजमाया होता। हुनर कोई आपसे सीखे सबों का दिल बहलाया होता। सीखकर लोग नाम कमा रहे महफिल वो अपना जमा रहे। आप …

गणतंत्र – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

हम नहीं अब चुप रहने वाले चाहे जितना भी आप कर लो । गणतंत्र सिखाता है सभी को मन ऐसे दिल प्रेम रस भर लो।। शत-शत नमन है वीर …

नेता जी – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

जिधर देखिये उधर, नेताओं का गरम बाजार है इधर गठबंधन, उधर एन डी ए की सरकार है। जुमले बाजी देश में, चल रही अब जोर – शोर से देखना, …

दोहावली – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

दोहावली इतना तो करना भला , जो तुम से हो जाय। ऐसी गलती मत करो, लोग सभी घबराय।। संगी साथी जो मिले, करना मन की बात। नाता रिश्ता प्रेम …

मस्त बदन – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

मस्त बदन में रवानी आई याद फिर से पुरानी आई। गदरा या है तेरा यौवन जन्नत से ये जवानी आई।। फूलों सा लगता है चेहरा उस पर लग जाता …

जिद छोड़ो – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

ऐसे में कब – तक, सिसकते रहोगे जिद छोड़ो वरना, फिसलते रहोगे। क़वायद में तेरा, कमी आ गया है आवेग में अब वो, नमी आ गया है गुफ्तगूँ में …

चाँद – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

नज़र की बात को , जुबां पे, कभी लाओ जरा चाँदनी रात हो , फिजाँ को , महकाओ जरा। छुपे हो, बादलों में क्यों तुम, हमें छोडकर दिल दे …

डर – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

डर सा लगता बोलूँ कैसे राज मन की खोलूँ कैसे। प्यार करता ये है मालूम दिल उनका टटोलूँ कैसे। बीच में आते शत्रु सारे प्यार गली में डोलूँ कैसे। …

जंजाल – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

फिकर सबका, जंजाल लेकर बैठा है हर संस्था, एक दलाल लेकर बेठा है। आदमी की कीमत, आज अब कहाँ रहा गरीब, माथे पर, मलाल लेकर बैठा है।    

इंसान का चेहरा – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

शैतान भी रहते हैं, इंसान का चेहरा में हैवान भी सज जाते, दूल्हे का सेहरा में। यहाँ गड़बड़ झाला है, करतूत भी काला है कपटी भी घूम रहे, दाढ़ी …

दुनियाँ की दस्तूर – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

मुश्किल में आज फिर हम, ऐसे ही घिर गये हैं नज़रों में आपके हम, फिर ऐसे ही गिर गये हैं। हालात बदल गये या फिर, थे मजबूर इतने इंसानियत …

नूतन वर्ष – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

हंसकर करो विदाई भैया नये का करो सगाई कोई नही रुशवाई भैया इनको करो अगुवाई। नूतन हो या साल पुराना सबसे गले मिलाई मत करना तूं दोषारोपन सबकी लाज …

साल अंग्रेजी – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

हमें तो कर विदाई भैया, मेरी अवधि अब पूरी दे दिया जितना देना था , कुछ भी नहीं अधूरी। अब आया साल नया है, कर उसकी तैयारी किस्मत चाहे …

दोहे – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

  बीते बचपन खेल में, गये जवानी हार। बूढ़े बैठे रो रहे, यह जीवन का सार ।। दो दिल देखो मिल रहे, दिल में ले अंगार। ऐसा ही अब …

सत्ता की आग – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

सत्ता की आग में अब जल रहे नेता कुर्सी पाने को आज मचल रहे नेता। हर जगह राजनीति की बात चल रही बात अपनी बनाकर निकल रहे नेता। भाषण …

शीत लहर – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

जाड़े की ये मस्त धूप सुहानी याद करा देती रातों को नानी। शीत लहर की ये प्यारी बातें थर – थर सी काँप रही ये रातें। कितनी मुश्किल में …