Author: Bindeshwar prasad sharma

बदल गये – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा ( बिन्दु )

धरती बदली और न चांद बदला सूरज वही है, न आसमान बदला। बदल गए हम, आप और वो लालच में न जाने क्यों इंसान बदला। नीयति बदल गयी हमारी, …

मोर पिया – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा बिन्दु

सजनवा रे मोर घरे अइबा कि नाहीं मोर घरे अइबा कि नाहीं अइबा कि नाहीं सजनवा रे मोर घरे अइबा कि नाहीं । सास ननद जी मारेले ताना हमरे …

मानव मन – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा बिन्दु

कमजोरी – गुस्सा – चिड़चिड़ापन आने लगे  हैं  सबमे । घृणा – जलन – बिद्रोह रंग जमाने लगे   सबमे । बहस  – बकवास – प्रतिरोध क्यों छाने लगे  मन में । …

कामयाबी – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा बिन्दु

जब भी कोई ख्यालों के समन्दर में बहकर चला जाता है कुछ पल के लिए ही  सही  वह दिल में उतर आता है  । ढूंढता है मोती जैसा कुछ …

हाइकु – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा बिन्दु

1 भ्रमित मन कलयुग की माया झूठ का सया 2 राधा – मोहन दो तन एक जान कृपानिधान 3 मानुष तन अनमोल रतन लालच मन 4 प्यासी अखिया साजन …

विश्वास – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा बिन्दु

”   भगवान से ज्यादा ख़ुद पर भरोसा करो यकीन मानो यह जिन्दगी बदल जाएगी. ” ********** ”   विश्वास जम गई तो और क्या जहाँ पर तुम वहीं …

हवा – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा बिन्दु

रुख हवा की बदलते देखी अंधियों  में उसे मचलते देखी. उजड़ रहे थे जो मेरा आशियाँ फितरत को उसे मसलते देखी. थी वह रात काली था सन्नाटा चमन आँखों …

रिश्ते – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा बिन्दु

” ग़ौर से देखो तो समझ में आ जाएगा आधा – अधूरा मै यूँ ही उलझ जाएगा ये तो जिन्दगी के रिश्ते हैं मेरे दोस्त दिल से प्यार किया …

निश्चल जीवन – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा . बिन्दु

  ऐसी अकल सिखा दे जीवन सफल बना दे हम करते रहे याद तेरी ऐसा अटल बना दे । हम प्रेम की वाणी बोलें मन अमृत रस ही घोलें …

रिमझिम चॉद – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा बिन्दु

  सावन की रात जो चंदानी आई है बदली भी धूंधट में जान ले लाई है । ऐसे लगता है जैसे परियों की रानी शरमा गई अगर तो पानी …

ऑख का जादू – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा बिन्दु

   न ऑख का जादू था न जंतर कोई टोना था मचलते हुए गुनगुनानें लगे देख तुम्हें पास आने लगे। न कोई ऐसा इरादा था न कोई वैसा इसारा …

फूलों की महफिल – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा बिन्दु

  खुशबु चमन के डालियों पर आके लग गये जो फूल थे महकते वो गलियों में सज गये। कुछ फूल थे कुर्वानियों के सर पर चढने को और जो …

इश्क का पैगाम – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा बिन्दु

    वक्त ने सिखलाया है कि अब तुम्हें ही प्यार दूॅ क्यों न ये जिन्दगी साथ-साथ रहकर गुजार दूॅ। इश्क का पैगाम लिए कब-तक धुमते रहेंगे हम क्यों …

रिश्ता – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा बिन्दु

  दिल करता है दे दूॅ दिल को पर मेरा मन डरता है देख रहा हूॅ दुनिया को अब प्यार में आहें भरता है। अक्सर धोका दे जाती है …

तेरे दरबार में – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा बिन्दु

  चैन मिलता ही नहीं अब कहॉ जाये हम बडी सुकून तेरे दरवार में,  तो आए हम बहुत भटके हैं और ठोकरे भी खाये हैं गलत रास्ते से अपने …

सुंदर समाज – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा बिन्दु

    हम सुधरेंगे तो अपने घर सुधर जायेंगे गॉव सुधरेंगे फिर शहर भी सुधर जायेंगे । हम बदलेंगे तो ये किस्मत बदल जायेगी नजारें गॉव शहर बदल, उनमे …

बरसात – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा बिन्दु

  बरसात हो रही है बरसात होने दे दूर खड़े हैं इतने अब पास होने दे। ये बिजलियॉ ये बादल घनघोर घटा ये काजल एक साथ होने दे बरसात …

मानवता का हनन – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा बिन्दु

”  आये थे मरहम लगाने, चूना लगाकर चल दिये लोग समझ पाते,कि वेश बदलकर निकल लिये | मानवता का हो रहा हनन,अब इनकी ऊँची कद हो गयी चापलूसी, ठग …

मटर का दाल – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा बिन्दु

  लालच ने बना दिया मटर से ऐसे अरहर दाल मशीने बनी ऐसी, सेहत का हो गया बुरा हाल । तकदीर किसान की ऐसी बिगड़ी कहीं पर मारे गये किसान …

गजल – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा बिन्दु

  जिंदगी की सफर से, किधर निकल गये ढ़ूढ़ना था उनको, हम फिर फिसल गये ।   जालिमों ने क्या, ये शितम जूल्म ढ़ाये भटकते रह गये हम, और …

गजल – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा बिन्दु

  सपना खुद अपनी कहानियॉ लिखता रहा गुजरे हुए लम्हों की खामियॉ लिखता रहा ।   गलतियॉ जितनी भी थी रूबरू हो गई छुप – छुप मेरी नादानियॉ लिखता …

एल एल पी पी – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा बिन्दु

पंचायत सरपंच और मुखिया जी जैसे तैसे रह गये दुखिया जी । जीत जाते है नोट बांटकर रोब दिखaते हैं ड़ांटकर । नोट छीटकर दाना ड़ाला था लुटा दिये …