Author: Bindeshwar prasad sharma

आजादी – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

नाम का है आजादी या किस काम का आजादी अंग्रेज का आजादी या हिन्दुस्तान का आजादी। सत्तर साल में अमीर का या गरीब का आजादी खून का आजादी है …

दोहे – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

देखो मेघा घिर गया, ये बादल के साथ बूंद – बूंद अब झर रहा, मौशम का सौगात। गाँव – शहर सब भर गये, नदियाँ करे उफान त्राहि – त्राहि …

भूले गुरु जी चेतना – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

भूल रही क्यों कलियुग में नारी अपनी शर्म क्यों भूला संस्कार पुरुष क्यों भूला है धर्म। भूले गुरु जी चेतना महत्ता अपनी सत्य कर्म इंसान की भी अब इंसानियत …

मौत एक बहाना है – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

मौत तो एक बहाना है सबको एक दिन आना है। नहीं कुछ किसी का भैया माटी में मिल जाना है। फिर क्यों है तेरी – मेरी काहे ताना – …

नर और नारी – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

नर और नारी एक समाना ये सारी  दुनिया ने  जाना। एक सिक्के के दो पहलू हैं कितना इनमें ताना बाना। जैसे अंबर इस धरती पर उदक आग हैं दोनो …

कोका कोला – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

हाय रे तेरी कोका कोला ये पेप्सी की बोतल मिलती सब जगह है भैया रेस्तराँ कहो या होटल। कार्बोकृत पेय ठंढ़ी है भैया मतलब कोका कोला 350 ग्राम पेय …

बहुत रंग देखे हैं दुनिया में हमनें – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

बहुत रंग देखे हैं दुनिया में हमनें गिरगिट के जैसे इंसा हो गया है। कभी रंग गोरा कभी ये गेरुआ है कलियुग में कैसे केचुआ हो गया है। फर्ज …

सम्पूर्ण सौर मंडल – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

ग्रह – नक्षत्र, सम्पूर्ण सौर मंडल, अनन्त तारे ब्रम्हांड में धूल – कण, और भरे ये गैस सारे । आकाश गंगा, अनन्त – अथाह ये भुगोल है गुरुत्वाकर्षण का …

वाह रे बापू – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – (बिन्दु)

कोई इनको गांधी तो कोई मन रखने को बापू कहता है देश व्यापी सड़यंत्र में कोई इनको ऐसे डाकू कहता है। वाह रे नेहरू वाह रे गांधी राजनीति में …

याद तुम्हारी – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – (बिन्दु)

जैसे – जैसे याद तुम्हारी आती है दूर चली जाती तो बड़ा सताती है। लगता डर या कोई भूल भुलैया है हर धड़कन मेरी  मुझे बताती है। प्यार किया …

पत्थर का टुकड़ा – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

पत्थर का टुकड़ा टूटा है जिसको तुम हीरा कहते हो। दिल भी टूटे इसी तरह से जिसको तुम पीड़ा कहते हो। पत्थर तो पत्थर है साथी तुम पत्थर दिल …

पाखंडियों ने रच डाला – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

हिन्दु मुस्लमान सिख इसाई भ्रम  क्यों अब  इन बातों में । आपस में क्यों तू तू – मैं मैं खड़ी है दीवार   विवादों में । जात – पात के  …

ठंढ़ी हवा – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

ठंढ़ी हवा है काली घटा है मस्त फिजाँ है झूम झूम झूम । झूम रे बंधु झूम झूम झूम झूम रे साथी झूम झूम झूम।। ये मन मौजी चाल …

तांका विद्या की कुछ झलकें – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

यादों के दिन फिर ताजी हो गयी बीते वो लम्हें आज सालगिरह जश्न में ढल गयी। कुछ याद के कुछ मुलाकात के वो हर पल खुशबू बिखेरती दिवानगी की …

दूभर जीना हो गया रहना हुआ दुश्वार – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

दूभर जीना हो गया रहना हुआ दुश्वार हर जगह स्वार्थ है हर जगह तिरस्कार । कुछ योगी भोगी बने साधू बन गये चोर बातें नेकी की करते करते नहीं …

आपकी नीयत – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – (बिन्दु)

आपकी बदसलूकी से तबियत अच्छी नहीं लगती न जाने क्यों अब आपकी नीयत अच्छी नहीं लगती। हम तो बदलना चाहते थे आपको जमाने की तरह पर क्या करें आपकी …

प्यार की जुदाई – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

अगर प्यार तेरा जुदा हो रहा है तो समझो दिल ये खफा हो रहा है। चाहतों में मेरे तुम लुट गये थे मंजिल के राहों में तुम छुट गये …

गुजर नहीं होता – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

हर इंसान को प्यार मयस्सर नहीं होता दुआ जितनी भी कर लो असर नहीं होती। कितने संभलने में टूटकर बिखर गये सफ़र में हर वक्त हमसफर नहीं होता। कितना …

रात की नींदे – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

फुर्सत के वो दो पल तुम अब मेरे लिए भी निकाल दो प्यार किया अगर है तो रांझा और हीर की मिसाल दो। झूठ के वादे कर के दिखावा …

मुहब्बत – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

मुहब्बत में हमारे दिल तो मिले पर कैसे हार हो गयी मिलने गये थे अपना समझ के उनसे तक़रार हो गयी। अब हमें संभल कर ही देखना और पढ़ना …

याद तुम्हारी – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

जैसे – जैसे याद तुम्हारी आती है दूर चली जाती तो बड़ा सताती है। लगता डर या कोई भूल भुलैया है हर धड़कन मेरी यह मुझे बताती है। प्यार …

मुहब्बत – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

मुहब्बत में मुझसे कैसा करार हो गया मिले थे हम अपना समझ के रार हो गया। अब तो संभल कर ही होगा देखना उसे पहले ही झलक में मुझे …