Author: bhupendradave

महक जाने दो ख्वाब के मंजरों को

महक जाने दो ख्वाब के मंजरों को बिखर भी जाने दो महकते गजरों को। नशा पीने में नहीं, पिलाने में भी है गौर से तो देख, साकी की नजरों …

बदलके सारे दीवार-ओ-दरों को

बदलके सारे दीवार-ओ-दरों को कर गया वो पराया अपने घरों को। कहाँ तक उड़े चले जाते हैं देखें आस्मां मिला है टूटे हुए परों को। बहा है लहू किसके …

मुझसे मेरी जिन्दगी खफा हो गई

मुझसे मेरी जिन्दगी खफा हो गई मौत को गले लगाकर फना हो गई। मैं नमपलकों से उसे देखता रहा सुलगती जिन्दगी कब धुँआ हो गई। चिड़िया जब हथेली पे …

वो जगह बताओ मुझे तुम जहाँ रहते हो

वो जगह बताओ मुझे तुम जहाँ रहते हो मंदिरो-मस्जिद में भी तुम कहाँ रहते हो। साया ना कहीं दिखा धूप में चलते रहे आग लगा रखी थी तुमने जहाँ …

वो झोपड़ी में खाँसता था झोपड़ी हिलती थी

वो झोपड़ी में खाँसता था झोपड़ी हिलती थी फुटपाथ पर वही आ गया तो धरती हिलती थी। मेरा नाम आया तो उनकी जुबाँ कँपती थी जाम कँपते थे, सुराही …

पिला ऐसी कि हर पैमाना मैखाना लगे

पिला ऐसी कि हर पैमाना मैखाना लगे पिला इतनी कि मैखाना इक पैमाना लगे। बैठ तेरे आगोश में ताउम्र ऐ साकी जिन्दगी हर सूरत अक्स-ए-मैखाना1 लगे। वक्त अब क्यूँ …

अपनी दफ्न जिन्दगी बस तलाशता रहा

अपनी दफ्न जिन्दगी बस तलाशता रहा रात भर वह कब्र सारी खँगालता रहा। पहले सभी यादें चुन चुन जलाता रहा फिर यादों की राख बैठा झुलसता रहा। आँधी में …

इस आँधी को मेरा आखरी सलाम भेज दे

इस आँधी को मेरा आखरी सलाम भेज दे मेरी किस्मत की कतरनें भी तमाम भेज दे। ए डूबते सूरज, बस इक मेहरबानी कर जा अपनी तपस बटोरकर सुलगती शाम …

आज तेरे मैकदे में साकी, सुराही नहीं दिखती

आज तेरे मैकदे में साकी, सुराही नहीं दिखती कहीं चिन्गारी नहीं दिखती, कहीं जिन्दगी नहीं दिखती। हरइक आवाज ऊँची थी, दूर तक गूँजती गई थी इस सन्नाटे के आगोश …

अभी पलकों में हसीन सपने सजने दो

अभी पलकों में हसीन सपने सजने दो कभी आगे इन्हें हकीकत भी बनने दो। तमाम रात मैकदों को खुला रहने दो तमाम उम्र यूँ ही बस मदहोश रहने दो। …

प्रकृति-प्रणय गीत

प्रकृति-प्रणय गीत संध्या की स्वर्णिम किरणों से आलिंगनों का ले उपहार सजी सँवारी संध्या-सी तब करती प्रकृति सोलह श्रंगार। पश्चिम की लाली में बिंधकर शर्माती सकुचाती जाती क्षितिज पार …

मैं जीवन के दुर्लभ दर्पण में

मैं जीवन के दुर्लभ दर्पण में ढूँढ़ रहा हूँ तेरी छवि सुन्दर प्रकृति की भी पावन परछाई में खोज रहा हूँ कृति-चिन्ह निरंतर।   किस किसको खोजूँ, किसको पाऊँ …

मेरे गीतों के शब्दों में श्रंगार सजा दो

मेरे गीतों के शब्दों में श्रंगार सजा दो तुम शब्दों में अर्थ जगाकर संस्कार जगा दो। शब्दों की झंकार तुम्हीं हो प्राणों की हुँकार तुम्हीं हो श्रद्धा का विस्तार …

यूँ ही तुम चुप रहते हो बात करो तो अच्छा लगे

यूँ ही तुम चुप रहते हो बात करो तो अच्छा लगे मंदिर से बाहर आकर साथ चलो तो अच्छा लगे। पत्थर की मूरत हो तराशी मुस्कान से सजे हो …

बिखरी साँसें कहती जाती

बिखरी साँसें कहती जाती हर पल को बस खुश रहने दो। अधरों को मुस्कानों से कुछ बिखरे मोती चुन लेने दो। पीड़ा के पलने से उठकर कुछ कदम जगत …

तुमने अपनी दुनिया सजा रखी है

तुमने अपनी दुनिया सजा रखी है तुमने अपनी दुनिया सजा रखी है भ्रमरों की मस्त महफिल बुला रखी है पर तुमने मुझे तन्हा रहने न दिया कुछ याद अपनी …

चाँद सितारों से रात सजा रखी है

चाँद सितारों से रात सजा रखी है चाँद सितारों से रात सजा रखी है जमीं पे मखमली दूब सजा रखी है। बता, ये दुनिया क्यूँकर सजा रखी है वो …

ऐ खुदा मुझे दवा और दुआ कुछ न दे

ऐ खुदा मुझे दवा और दुआ कुछ न दे दे सके तो अपनी मुस्कान की कतरन दे। इक बहाना चाहिये था मंदिर आने का शुक्र है तूने दर्द दिया …

मुझे देखकर तुम (युगल गीत)   … भूपेन्द्र कुमार दवे

मुझे देखकर तुम (युगल गीत)   गायक “मुझे देखकर तुम मुस्कराती दिखी हो मोहब्बत के गजरे सजाती मिली हो।“ गायिका “मुझे देखकर तुम मुस्कराते दिखे हो शरारत के जल्वे …

कदम दो कदम इक साथ चलो तो बेहतर है

कदम दो कदम इक साथ चलो तो बेहतर है मधुर मीठी बातें भी करो तो बेहतर है।   खोजने सकून चले हो अँधरी बस्ती में चिराग जलाकर साथ रखो …

पीड़ा के पलने पर पलता … भूपेन्द्र कुमार दवे

पीड़ा के पलने पर पलता प्यार नहीं था पछताता। आँसू भी आँखों में आकर नहीं सिसकने अकुलाता।   मुस्कानें मुस्काती दिखती जब मिलती थीं मुस्कानों से यादों की झुरमुट …