Author: Bhawana Kumari

नाजुक कंधे Bhawana kumari

छोटे बच्चे नाजुक कंधे नाजुक कंधे भारी बस्ते बोझ कैसे उठाऊँ में रोज सुबह माँ मुझे जगाती दौड़ा दौड़ा कर ब्रश कराती रगड़ रगड़ कर मुुझे नहलाती कभी चिल्लाती …

साहित्य परिवार का साथ (चार,पांच)Bhawana kumari

4)माना कि संग में आपके दौड़ नही सकती आपके शब्दों को अपने शब्दों से जोड़ कर नही सकती। पूरे होगे मेरे भी सपने जो कल ही हमने संजोए थे। …

साहित्य परिवार का साथ (तीन )-Bhawana Kumari

न जाने वह सुबह कब आएगी जब मैं अपने सपनों को दलदल से बाहर निकाल आशाओ की रथ दौड़ाऊंगी । अगर mill जाए “‘किस्कु’, ‘ अनु ‘,’राजीव,’विजय’, मनुराज’,’अरुण तिवारी’जी …

नारी

1) नारी के स्वभाव को  समझने वाला कोई नहीं, तन का पुजारी दुनियाँ सारी,मन का पुजारी कोई नहीं। 2)  नारी को तुम अवला मत कहना यह भुल बहुत ही …