Author: Bhawana Kumari

सावन

सावन की घटा है छाई, रिमझिम-रिमझिम वर्षा आई। आमो के डाली पर देखो, सखियों ने झुला है डाली। मोर पपीहे ने देखो, जंगल मे कैसी शोर मचायी।