Author: Bhawana Kumari

समय

समय की मार ने मुझको ऐसा मारा, आज मैं खुब रोया और पश्चताया। सच कहते थे पापा और मम्मी, बेटा तुम समय के मोल को पहचानो। तुम अगर समय …

नाजुक कंधे

छोटे बच्चे नाजुक कंधे, नाजुक कंधे भारी बस्ते, बोझ कैसे उठाऊ मैं, रोज सुबह मम्मी मुझे जगाती, दौड़ा दौड़ा कर ब्रश कराती, रगड़ रगड़ कर मुझे नहलाती, कभी चिलाती …

रिश्ते का धाराशाही होना

सूखे पत्ते की तरह आज हर रिश्ता धीरे धीरे धाराशाही होता जा रहा है रिश्ते टूटने की खबर से बेखबर इन्सान को अपनी नौका(जीवन) के आगे हर रिश्ता बौना …

सावन

सावन की घटा है छाई, रिमझिम-रिमझिम वर्षा आई। आमो के डाली पर देखो, सखियों ने झुला है डाली। मोर पपीहे ने देखो, जंगल मे कैसी शोर मचायी।