Author: Bhawana Kumari

सपनों का टुटना

मैंने अपने सपनों को टुटते देखा है मैंने अपने अरमानों को कुचलते देखा है। ख्वाहिश नहीं थी मुझे किसी राजधराने की बहुँ बनु। ख्वाहिश नहीं थी मुझे किसी जमींदार …

समय

समय की मार ने मुझको ऐसा मारा, आज मैं खुब रोया और पश्चताया। सच कहते थे पापा और मम्मी, बेटा तुम समय के मोल को पहचानो। तुम अगर समय …

रिश्ते का धाराशाही होना

सूखे पत्ते की तरह आज हर रिश्ता धीरे धीरे धाराशाही होता जा रहा है रिश्ते टूटने की खबर से बेखबर इन्सान को अपनी नौका(जीवन) के आगे हर रिश्ता बौना …

सावन

सावन की घटा है छाई, रिमझिम-रिमझिम वर्षा आई। आमो के डाली पर देखो, सखियों ने झुला है डाली। मोर पपीहे ने देखो, जंगल मे कैसी शोर मचायी।