Author: Bhawana Kumari

जगदम्बे भवानी- Bhawana Kumari

है माँ दुर्गे जगदम्बे भवानी तू तो विद्या दायनी है तेरी महिमा अपरंपार तेरे खेल निराले है कभी काली,कभी गौरी बन तो कभी सरस्वती बन कर नित नए रूप …

पसीने की कीमत-Bhawana kumari

भागती-दौड़ती जिंदगी में, हमें पसीने की कीमत कोई नहीं देता यारो। बहा कर हम अपना पसीना स्वीकारते जिंदगी की सारी चुनौतियां। पसीने की स्याही जब चलती है कोरे कागज़ …

नाजुक कंधे Bhawana kumari

छोटे बच्चे नाजुक कंधे नाजुक कंधे भारी बस्ते बोझ कैसे उठाऊँ में रोज सुबह माँ मुझे जगाती दौड़ा दौड़ा कर ब्रश कराती रगड़ रगड़ कर मुुझे नहलाती कभी चिल्लाती …

साहित्य परिवार का साथ (चार,पांच)Bhawana kumari

4)माना कि संग में आपके दौड़ नही सकती आपके शब्दों को अपने शब्दों से जोड़ कर नही सकती। पूरे होगे मेरे भी सपने जो कल ही हमने संजोए थे। …

साहित्य परिवार का साथ (तीन )-Bhawana Kumari

न जाने वह सुबह कब आएगी जब मैं अपने सपनों को दलदल से बाहर निकाल आशाओ की रथ दौड़ाऊंगी । अगर mill जाए “‘किस्कु’, ‘ अनु ‘,’राजीव,’विजय’, मनुराज’,’अरुण तिवारी’जी …