Author: आलोक पाण्डेय

वे लोग – आलोक पान्डेय

~~~वे लोग~~~ उदासीन जीवन को ले क्या- क्या करते होंगे वे लोग न जाने किन – किन स्वप्नों को छोड़ कितने बिलखते होंगो वे लोग| कितने संघर्ष गाथाओं में, …

माँ तूझे भूला ना पाया – आलोक पान्डेय

माँ! एक दिवस मैं रूठा था बडा ही स्वाभिमानी बन , उऋण हो जाने को तुमसे भी विरक्त हो जाने को, त्यागी बन जाने को ! घर त्याग चला …

वीर तूझे आना होगा

~~~~~वीर तूझे आना होगा~~~~~ स्वदेश में वीरों तूम्हे तत्क्षण पुनः आना होगा कारण ना पूछना यदि हो, ना ही कोई बहाना होगा | वीर तूझे आना होगा!!! सिरमौर जननी …

विघ्वंस धरा पर क्यों? —“आलोक पान्डेय “

तेरी यादों में जन मुरझाये हुए हैं सोच सोच कर भी सुखाये हुए हैं; क्या यही हश्र होता रहेगा देश कब तक लाल खोता रहेगा! भावनावों में जन आज …

शक्ति – पुंज

धन -धान्य संपदा यौवन जिनके भूतल में समाये जन्मभूमि के रक्षक जिनने अनेकों प्राण गवाये। जिनके आत्म- शक्ति धैर्य से अगणित अरि का दमन हुआ देखा जग अकूत शौर्य …

गौरव उत्थान

देश गौरव पर अच्छी आवाहन कविता – भारत भू वीरोँ का गौरव वीरोँ का स्थान ऋषि मुनि यति तपस्वी योगी करते पुण्य सुखद विश्राम । जहाँ सत्यशोधक लोग बढ़े …

अखंड भारत की ओर

आघातोँ की राहोँ मेँ सुन्दर मुस्कान बढाता जा, राष्ट्रदूत हे वीर व्रती भारत को भव्य सजाता जा, सुस्थिरता को लाता जा । अगणित कर्तव्योँ के पुण्य पथ पर शील, …