Author: babucm

कहाँ से लाऊँ ढूंढ के…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)..

घर था कभी जो अब मक़ान हो गया… ज़िंदा लाशों का वो शमशान हो गया…. कच्चे घरों में आती थी रिश्तों की खुशबू… पक्के क्या हुए सब सुनसान हो …

हाइकू….सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…. 

नील गगन महबूब आँगन चाँद दीदार आकाश गंगा अनगिनत तारे तेरी चुन्नरी कोयल कूके मकसद इसका प्यार की बोली दिल समझे बिना लिपि ज्ञान की नैनों की भाषा मंदिर …

गद्दारों की हामी न भरें…सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…

नेता एक हवा में उड़ता…. जूते चप्पल लहराता… हवा में उड़ने से जब महरूम हो गया… संसद भी उसके साथ खड़ा हो गया… बेशर्मी की हद्द हो गयी… सारी …

सन्मार्ग पर धर तू पग..सी.एम्.शर्मा (बब्बू)..

IIछंद – कुंडलियांII पग धर नभ पर चलत ही, ऊंची रही उड़ान… तन मन से जब कट गया, गैर हुआ इंसान… गैर हुआ इंसान, मन प्रेम मोल न जाना…. …

जिस्म मिटटी है…सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…

जिस्म मिटटी है सुना बहुत मैंने… पहले यकीं न था पर अब… यकीं होने लगा है…. जिस्म मिटटी है… हर कोई आता है नश्तर ले के… खोदता है अच्छी …

पल नहीं लगता….सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…

ता उम्र लगा रहा दिल अपना बनाने को तुम क्या आये पल लगा इसे बदल जाने को…. तिनका तिनका जोड़ आशियाँ था बनाया उसने… सरफिरों की पलक न झपकी …

हाइकू….सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…

आग घर की… पानी से काबू हुई… मन की आग ? बेरोज़गारी…. सड़क पे हुजूम… शिक्षा निष्फल ?… संसद खाली… नेता सड़क पर… जुबां से आग… अपहरण… हुजूम की …

सिर्फ तीन दृश्य?…सी. एम्. शर्मा (बब्बू)..

सो जा लाडो मेरी… इक राजकुमार आएगा… बिठा घोड़े पे दूर देस ले जाएगा…. सो जा लाडो मेरी… कितना मधुर सा लगता है…सुनना…. “साडा चिड़ियाँ दा चम्बा वे बाबुल …

मिलके भी हम रहे जुदा..सी. एम्. शर्मा (बब्बू)..

मिलके भी हम रहे जुदा जज़्बात क्या करे… तन्हाईओं में भी फिर मुलाक़ात क्या करे….. है रात सी सहर तेरी ज़ुल्फ़ों के साये में… दुनिया के रंजो गम को …

वंदना….सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…

हे अम्बिके जगदम्बिके…. वंदना तेरी वंदना…. ओजस्विनी…तमहारिणी करुणामयी तेरी वंदना….. कर कमल और तिरशूल माँ… खडग कर दे हर दंम्भ चूर माँ… भव तारिणी…ह्रदय वासिनी… नवदुर्गे रूप माहेश्वरी…. वंदना …

ये रंग….सी. एम्. शर्मा (बब्बू)….

ये रंग है तेरे मेरे प्यार के… मेरे संसार के… हर मौसम बहार के… ये रंग… खिलतें हैं जब तेरी हंसी की तरह… मन कस्तूरी महकता है मेरा… रोम …

माँ-ईशवर……सी. एम्. शर्मा (बब्बू)….

IIछंद-चोपाईII कर जोर खड़ा प्रभु के आगे, मन में भाव कभी ही जागे… माँ ‘चंदर’ आवाज़ लगायी, रोम रोम मिठास घुल आयी… कैसे कथन करूं जस तैसा, अनुभव जो …

माँ का आँचल….सी. एम्. शर्मा (बब्बू)….

सुनहरी शाम के मंज़र बड़े प्यारे थे… फलक पे चमक रहे सितारे थे… उछाला हवा में माँ ने बच्चे को ज्यूं ही… माँ के आँचल में बच्चे संग सभी …

मात-प्रेम…सी. एम्. शर्मा (बब्बू)….

IIछंद-चौपाईII दाम पड़ती छोटी जाए, कृष्णा उदर बंध ना पाए… माँ लल्ला का बंधन चाहे, योगी भी पकड़ना चाहे… माया धारी में जो उलझे,योग ज्ञान तप से ना सुलझे… …

माँ महिमा….सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…

IIछंद-चोपाई II मैया चाँद दिला दो मुझको,गर लगता मैं प्यारा तुझको… नहीं मिला जो चाँद खिलौना,गुस्सा मैं फिर तुमसे होना… मत अपना तुम लल्ला कहना,नन्द लाल मैं बन के …

रहमत खुदा की..सी. एम्. शर्मा (बब्बू) ..

गर रोने का नाम प्यार होता तो हम भी रो लेते…. करके नुमाईश ज़ख्मों की वाहवाही ले लेते… नादान रहे समझे नहीं मोहब्बत व्योपार भी होता है… एक हाथ …

ममता बंधन….सी. एम्. शर्मा (बब्बू)..

IIछंद-चोपाईII नटखट कान्हा भागें आगे, मात यशोदा पीछे पीछे… पकड़ लिए कान्हा जब माँ ने, बाँध दियो ओखली संग में…. जिसको देखे टूटें बंधन, बंधे वो ममता के बंधन… …

“माँ” को समर्पित…सी.एम्.शर्मा (बब्बू)..

IIछंद – चौपाईII ऊषा किरणें चरण पखारें, पुरवाई चंवर झुलायें… नाटक करते नटखट कान्हा, मूंदें आँखें ज्यूं सोने का… बलिहारी लीला पे उसकी, श्याम सलोनी सूरत जिसकी …. डांटे …

फासले दिल के…..सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

जुस्तजू में ही, बिखर गए, सपने मेरे… चर्चे भी हर तरफ, उम्मीद से, निकले मेरे…. वक़्त गुज़रा है, कुछ इस-तरहा, मेरा… अपने ही रूप में, दुश्मन नज़र, आये मेरे…. …

गधों का मता…..सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…..

यह राजनीति भी कैसी राजनीति है…. बिना सर पैर सरपट भागती है…. मुद्दे सब पीछे छूट जाते हैं… जनता भौचक्की ताकती रह जाती है…. इलेक्शन आते ही नेताओं के …

मन मेरा इत उत भागे रे….सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…

मन मेरा इत उत भागे रे…. उड़ जाए बदली बन कभी… कभी चाँद सा झांके रे…. जंगल में सबने क़ानून बनाया… दुश्मन भी जिसने दोस्त बनाया… बिल्ली मौसी के …