Author: C.M. Sharma

“माँ”…इंतज़ार… सी.एम्. शर्मा (बब्बू)….

    जिन नैनों से देखा तुमने आज उनमे रही ज्योत नहीं… जिन बाहों ने संभाला तुझको बची उनमें ताकत नहीं… ममता का समंदर छलकता अब भी पहले जैसा …

“माँ”…सी. एम् शर्मा (बब्बू)

  धागे प्रेम के…. कच्चे कहाँ होते हैं… देखो ‘माँ’ ड्योढ़ी पे है खड़ी… अकेली….भूखी…प्यासी…. स्थिर काया…एकटुक निहारती… वीरान सी पगडण्डी लगती है उसे… भीड़ इतनी आती जाती में …

कभी मुड़ के देखो ज़रा जिंदगी को…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

कभी मुड़ के देखो ज़रा जिंदगी को… कहाँ छोड़ आये हैं हर इक ख़ुशी को… चले थे जहां से वो परिवार अपना… गये रह वो पीछे ले आये खुदी …

उठा हाथ सब का भला माँगना…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

उठा हाथ सब का भला माँगना… करूँ ना बुरा मैं दुआ मांगना… न हो चमन खौफ परेशाँ ग़मज़दा… करूँ कुछ ऐसा हौसला मांगना… न हो ‘आसिफा’ कोई बेआबरू… जहां …

चल चलें दिल कोई जंगल…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

कैसे कहदें तेरी गलियों से निकलना जो हुआ… आँखों से ख़्वाबों का एक पल में फिसलना जो हुआ… चरमराती हुई दिवारों को क्या देख रहे हो… वायु पानी धरती …

बोझ….सी.एम्. शर्मा (बब्बू)….

मन, काल कोठरी में बंद… दीवारों से टकराता है… गहरे डूब जाता है… कभी… ठक ठक सुनायी देती है… धीमें से दबे पाँव… चलता हो जैसे कोई… या डूबने …

ये फिसल जाएंगे सभी…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

पलकों पे आ के जो अश्क़ ठहरे हैं अभी… नमी की कमी है कदाचित इनमें अभी… शामें उल्फत की साँसों को तेज होने दे… ज़िन्दगी की तरह ये फिसल …

चहूँ ओर गुलाल बिखरे…सी.एम.शर्मा(बब्बू)

पावन धरती हो अपनी पावन हों सब के मन सब  ही  झूमें नाचें  गाएं भूलें तन  ओ मन प्रेमभरी पिचकारी हो मन महका गुलाब हो चहूँ ओर गुलाल बिखरे …

कौन मेरे भीतर और मैं हूँ कौन…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

मेरी आँखों की नींद चुरा कर… है उनमें सपने सजाता कौन…. चुरा के लाली वो अरुण की…. मेरी आँखों को है देता कौन…. जब होता दिल कभी बोझिल…. झोँका …

तुमसे बिछड़ के…सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…

तुमसे बिछड़ के मुझ को सब वो यार पुराने याद आये… हर बात पुरानी याद आयी वो दिन सुहाने याद आये… जब देखूं हंसों के जोड़े मेरी सब यादें …

छोटा मेरा आशियाँ…सी.एम् शर्मा (बब्बू)…

छोटा मेरा आशियाँ… बेटी..तुझमें मेरा जहां… आँखों में तेरी मैं देखूं… तारों भरा आसमाँ…. शोर पवन में सन्न सन्न सन्न सन्न…. पायल तेरी ज्यूं छन् छन्… चहके बुलबुल कूके …

काश ! हम बच्चे ही होते…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

काश ! हम बच्चे ही होते…. दिल से हम फिर सच्चे होते…. न कोई होता वैरी अपना… न हम किसी के दुश्मन होते… काश ! हम बच्चे ही होते…. …

सजे सजाये ताज उतर जाते हैं…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

मेरी तरह आप भी मुस्कुराया कीजिये…. दर्दे सागर हरदम न छलकाया कीजिये…. मुफलिसी भगाने का मजबूत इरादा रखो… हर किसी के आगे हाथ न फैलाया कीजिये… गर पाना है …

अहसास…लघु कथा…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

“कहाँ जा रहे तुम इतनी सुबह?” पत्नी ने पति से पुछा…. “__________”….. कोई उतर न मिलते देख फिर बोली…. “आज माँ दुर्गा का पूजन है, काम पड़ा है…और तुम …

न्यारा हिन्दुस्तान हमारा…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

करें स्वागत नव वर्ष का कुछ इस तरह से… ले प्रण हर कोई अपनी ही समर्था से… भूखा होगा न कोई नंगा यहां इस धरा पे… मिलजुल करें ऐसा …

भारत का नव वर्ष…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

प्रकीर्ति जब अपने उजलेपन में नहाई होगी… हर और यौवन सी मस्त छटा बिखरी होगी…. कोहरा होगा न सर्दी, न मौसम में गर्मी होगी…. मन घूमर बन नाचेगा सुनहरी …

पार्टी…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

कुत्ते..कौवे खाने का आनंद ले रहे थे… छोटे बच्चे खाना निकाल के थैली में रख रहे थे… फेंकी जूठन में से… रात भर जहां नव वर्ष का जश्न चला …

दिल को तेरी बातें सुनाऊँ…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

दिल को तेरी बातें सुनाऊँ…. ऐसे अपना मन बहलाऊँ… गर बात करे तेरी कोई मुझसे… उसको दुनिया के ढंग समझाऊँ…. तुमको उन सबसे छुपाऊं…. उल्फत का मैं धर्म निभाऊं…. …

ज़िन्दगी….सी.एम्.शर्मा (बब्बू)….

भीतर द्वन्द है अपने आप से… जीने मरने का… शोक उल्लहास का… ज़िन्दगी के हर पल का… जो जीया, जो नहीं जीया… व्यथा उभरती है कभी.. संतुष्टि साँसों से …

अपने हाथों जां लुटानी, और है…सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…

इश्क़ मेरे की कहानी, और है… तेरे ज़ख्मों की निशानी, और है… रूह मेरी की तलब बस, एक तू… खुशबु तेरी जाफरानी, और है…. दिल का दिल से मिलना …

कुर्सी…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

हे कुर्सी तू बहुत ही प्यारी है… तेरी लीला बहुत न्यारी है…. तेरे जन्म पे मैं बलिहारी है… हे कुर्सी तू बहुत ही प्यारी है… अपना तेरा कोई धर्म …

मौन…..सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

तुम मौन हो बोलो कुछ जानते नहीं तुम तुम्हारे न बोलने से रिश्ता टूट रहा है हमारा दरार पड़ रही है दिलों में भगवान् के लिए कुछ बोलो मेरी …

भ्रम….सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

चहुँ ओर नगाड़ों का शोर ही शोर बस सुनता है… बिजलियाँ चमकती हैं, ज्वार बादलों में उठता है…. भावों के धारों में, डूब जाते हैं तैराक भी कभी…. लुट …

पिया मिलन की आस…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

II कुंडलियां II मन मेरा बिना घुँघरू, नाचे क्यूँ छम छम     I जलधार मेरी आँखें, बिना बादल छम छम   II बिना बादल छम छम, उठे है दिल में …