Author: C.M. Sharma

कुर्सी…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

हे कुर्सी तू बहुत ही प्यारी है… तेरी लीला बहुत न्यारी है…. तेरे जन्म पे मैं बलिहारी है… हे कुर्सी तू बहुत ही प्यारी है… अपना तेरा कोई धर्म …

मौन…..सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

तुम मौन हो बोलो कुछ जानते नहीं तुम तुम्हारे न बोलने से रिश्ता टूट रहा है हमारा दरार पड़ रही है दिलों में भगवान् के लिए कुछ बोलो मेरी …

भ्रम….सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

चहुँ ओर नगाड़ों का शोर ही शोर बस सुनता है… बिजलियाँ चमकती हैं, ज्वार बादलों में उठता है…. भावों के धारों में, डूब जाते हैं तैराक भी कभी…. लुट …

पिया मिलन की आस…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

II कुंडलियां II मन मेरा बिना घुँघरू, नाचे क्यूँ छम छम     I जलधार मेरी आँखें, बिना बादल छम छम   II बिना बादल छम छम, उठे है दिल में …

रहनुमा ग़ालिब नहीं तो कौन है…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

रूह में न है खुदा तो, कौन है… तुम नहीं गर वो बताओ, कौन है…. लफ्ज़ से वाकिफ नहीं हूँ, उससे मैं… लम्ज़ से मुझको दिखाओ, कौन है…. हार …

न जाने क्यूँ…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

न जाने क्यूँ…. मैं कोशिश कर रहा था… उसकी आँखें पढ़ने की… पर कुछ पढ़ नहीं पाया… चमक में उनकी…. लब सिले न थे उसके… पर मैं कुछ सुन …

तेरी आँखों से क्यूँ नींद उडी रहती है…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)… 

ये मुहब्बत भी मिटाने से न कभी मिटती है… आग ऐसी है जो बुझाने से और जलती है…. दर्द में सुकून कभी सुकून में दर्द सा उठता है… नब्ज़ …

मेरी तन्हाई..मेरी नज़्म..सी.एम्.शर्मा (बब्बू)..

मेरी तन्हाई आज यूं मुझसे मिल कर रोई…. सखी बचपन की बिछड़ी मिली हो जैसे कोई… पल भर में ही हो गयी फिर से वो मेरी…. गिला शिकवा लब …

नैन दियो भरमाए- दोहे -सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

देख देख तन आपना, काहे का अभिमान…. पल में टूटे खिलौना, आन पड़े शमशान…. साँच साँच  तू  बोल  के, झूट  साँच  बनाये…. साँच अग्नि जब आ जली,सबहि दिया जलाये… …

सहज पके सो ही मीठा होये…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

जीवन की राह कठिन, होये तो होये… जीओ शान से मन निर्मल जब होये… बेसबर न हो हर पल तुम फल को… जो सहज पके सो ही मीठा होये…. …

नाज़ुक बहुत हैं इश्क़ के धागे…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

जब भी मिलो तुम, मुस्कुरा के बोलना…. अपनी हकीकत को, छुपा के बोलना…. आईने को झूट कहने से पहले तुम… नज़र अपनी खुद से, मिला के बोलना… अपनी  अना  …

आओ सब दीपावली मनाएं…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

जगमग जगमग धरा हो अपनी… आसमां ख़ुशी से झिलमिलाये… मन से मन का दीप जला के… आओ सब दीपावली मनाएं… मेरा हाथ तेरे काँधे पे हो… तू ज्योति मेरे …

प्यार तो बस महकता महकाता है…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…..

प्यार  का  अंदाज़  मैंने  तुम  से है सीखा…. नज़रें  चुराना भी  तो  तुम्हीं  से है सीखा… इज़हारे  जज़्बात  ब्यान कैसे करूं तेरा… सिले होंठों से आँखों में मुस्काना सीखा…. …

बंद मुठ्ठी की बस ज़मी सी है…सी.एम्.शर्मा (बब्बू)..

रोज़ मरने की……..जुस्तजू की है…. आपसे मिलके ही….ज़िन्दगी जी है… हर किसी सी………..चाह है न मेरी… बंद मुठ्ठी की बस………..ज़मी सी है… वो मिला दिन चार का…… साथ रहा… …

तुझको मिटाया न गया…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

दिल मेरा तुझ बिन किसी हाल बहलाया न गया… भीड़  में  हो  के भी तनहा  मन छुपाया न गया… चाँद  चेहरे  पे  सितारों  से  चमकते  ये  नयना… लाख कोशिश …

एतबार…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

अश्क आँखों से बहाकर कोई इकरार करे… संग दिल दुनिया में कैसे कोई इज़हार करे…. ले मुझे डूबा मेरा दोस्त………मांझी वो मेरा… कैसे अपनों पे भी क्यूँ अब कोई …

मैं बदली हूँ, बस नीर भरी…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

मैं बदली हूँ, बस नीर भरी… बिन बरसे, बरसूं हर घडी… मैं बदली हूँ बस नीर भरी… सावन आये लाये बौछार.. शोलों सा वो करें प्रहार… मन मेरा करे …

शायद….सी.एम्. शर्मा (बब्बू)….

सपनों से निकल हकीकत तुम बन जाओ…. चाँदनी बन मुझमें तुम कभी सिमट जाओ… रात रौशन हो जायेगी मेरी तुमसे ए सनम… आँचल से मुझपे तारों को छिटका जाओ… …

“चौका”- भ्रमजाल….सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…

II जापानी विधा “चौका” II मन का भ्रम संबंधों में दरार दंब प्रहार छिन्न भिन्न संसार फैसला हुआ अपने पराये का तेरा ओ मेरा खून भी बंट गया अंध …

तरुवर छाया कहीं मिल जाती है…सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…

मंद मंद चलती समीर, यूं तेरे बालों को लहराती है…. जैसे मस्त बदली कोई, चाँद को चूम चूम जाती है… सुप्त इश्क़ का अंकुर, उर में हलचल करता है… …