Author: babucm

त्रिवेणी – आजाद – प्रबुद्ध भारत – सी.एम्. शर्मा (बब्बू)..

(१) ध्वजारोहण… आन, बान, शान हर भारतीय का… राष्ट्रीय एकता. (२) वन्देमातरम… भारत की रूह की आवाज़.. ज़िन्दगी को सलाम. (३) शहीदों के बलिदान से… आजाद हुआ भारत.. मानसिकता …

चलो आज प्रण हम दुबारा करें…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

चलो आज प्रण हम दुबारा करें… पड़े भीड़ जब भी देश अपने पे… हर क़तरा खून का उसपे वारा करें…. चलो आज प्रण हम दुबारा करें… हर तरफ हो …

चिराग बुझने न दें….सी.एम्. शर्मा (बब्बू)….

जलाएं है चिराग घर हमारे, शहीदों ने अपना लहू देके… जात, पात और धर्म की आग से आओ इसे बुझने न दें… \ /सी.एम्. शर्मा (बब्बू) (साइट की प्रॉब्लम …

त्रिवेणी – इतिहास..सी.एम्.शर्मा (बब्बू)..

(१) तन धुला मन कलुषित रहा… गंगा अपवित्र होने लगी.. पंगु होती नैतिकता.. (२) त्रिवेणी कहूँ या संगम मन का… रिश्ता था विश्वास,प्यार और त्याग का… आओ ढूंढें लुप्त …

त्रिवेणी….सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

(१) रुको, देखो, चलो… जीवन तुम्हारा है.. अपनों को बेसहारा न करो. (२) धर्म, जात, ताज… कोई कीमत नहीं तुम बिन.. इंसान हो तुम ! (३) बजुर्गों की लाठी… …

नमामी महांदेव गंगा धराये….सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

II छंद – भुजंगप्रयात II ( यमाता x 4 / 122×4 ) नमामी महांदेव  गंगा  धराये    I जटाजूट शंभू पिनाकी धराये    II नमामी कपाली भक्तवतसलाये I नमामी …

नमो देव भोले…सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…

II छंद – भुजंगप्रयात II नमो देव भोले नमो देवनाथं   I नमो शंकरा सर्व भूताधिवासं II नमो शूलपाणी विरूपाक्ष रूद्रं I नमो अंबिकानाथ पादार्विन्दं  II (नमन करता हूँ …

आ जाओ न अब साजन…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

सावन की रुत भीगा मौसम…. भीगा है मेरा मन….. राह मैं तेरी देखूं हर पल…. आ जाओ न अब साजन…. मेहंदी रचा हाथों पे मैंने… नाम तेरा छुपाया उसमें…. …

प्रतीक्षा…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)….

आखिर क्यूँ तुम मुझको तलाशते रहते हो……. बदहवास से इधर उधर भटकते रहते हो….. जीए होते निस्वार्थ प्यार में तुम एक पल भी…. कह उठते खुद कि तुम मेरे …

रम जाओ तुम मुझमें ऐसे..सी.एम्.शर्मा (बब्बू)…

IIछंद-चौपाईII रम जाओ तुम मुझमें ऐसे,रंग मिला पानी में जैसे… तुम सज जाओ ऐसे दिल में,जैसे देव सजे मंदिर में…. ढूंढूं कहीं खुदा मैं क्यूँकर,मंदिर हो चाहे गिरिजा घर… …

रिमझिम बारिश निकली मेरी आखों से…सी.एम्. शर्मा(बब्बू)..

(22×5+2) दुनिया के पहरे से डरती रहती है… दिल आँगन में सबसे छिप के मिलती है…. दिल में तेरे जो है वो बतला दे ना…. शाम सवेरे यूं ही …

तू ही इक हमारा है…सी.एम्.शर्मा (बब्बू)…

कोई रिश्ता नहीं तुमसे फिर भी, तू सबसे प्यारा है…. ज़मीं से आसमान तक, सिर्फ तू ही इक हमारा है…. कर के जहां से मोहब्बत, खो दिया था सब …

इंतज़ार-1….सी.एम्.शर्मा (बब्बू)….

(क्षणिकाएं) १. बूँद फूल पे… लरजती सी… घबराहट में… ख़त्म होने की… २. माँ की आँखें सूनी… राह भी सूनी… सूने दिल की… आह लबों पे… ३. भाव भंवर… …

आभार…..सी.एम्. शर्मा (बब्बू)….

चतुर्थी है आज चैत्र नवरात्री की… तुम्हारा अवतरण दिवस… लक्ष्मी रूप में हमारे घर… मेरी चाहत..मेरी मन्नत…. तुमने पूरी की…. आभार मेरे रोम रोम से…. तेरा… मेरी प्यारी सी …

अमिट रिश्ते…सी.एम् शर्मा (बब्बू)….

खाली सा मकाँ है… ईंट पत्थरों का…. कभी बोलते थे खिड़की दरवाज़े…. घंटियाँ बजती थी बच्चों की आवाज़ में… कभी-कभी कोई कर्कश आवाज़… झकझोर जाती थी दीवारों को…. मीठे …

माना मेरी ज़िन्दगी-1….सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

माना मेरी ज़िन्दगी है तेरे करार में…. लेकिन खुदा नहीं तू दुनियावी दयार में…. कैसी हवा चली है के लुट गया चमन चमन…. कफ़न तक भी खिंच गए मायावी …

प्रतिमा-बुत्त…..सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

मैं हर शाम उसको देखने को बेचैन सा हो जाता था…. ना जाने उसकी सूरत में क्या कशिश थी…. देह रंग संगमरमरी था उसका…. पर उस से ज्यादा लिबास …

आसमाँ देखता रहा…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)..

बिखरते रिश्तों का मैं जहॉं देखता रहा… करीने से बना मकाँ देखता रहा…. जिस गुल से थी चमन में खुशियां कभी… बेआबरू होते उसी को गुलिस्ताँ देखता रहा… नज़रों …

जोगी पीर बढ़ती जाए…सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…

लोचन जलकण… भरी बदरी से… अधरों के स्वर… भीगी वीणा से… ठिठुर ठिठुर…. बहते सुनते… मन फूल खिला आँगन महका… जग जेठ महीना… बरसे,महके,बदले… मन अधीर निरीह… निकले भंवर …

नसीब की किताब….सी.एम्.शर्मा (बब्बू)…

सपने सारे डूब गए मेरे आँखों के सैलाब में…. रात जब वो मिले मुझे रकीब संग ख्वाब में…. कुछ दुनिया का सितम कुछ खुदारी मेरी भी … बिक न …

एक मुद्दत हुई तुमसे आँखें मिलाये हुए….सी.एम्. शर्मा (बब्बू) ..

एक मुद्दत हुई तुमसे आँखें मिलाये हुए…. सदियां हो गयी ज़िन्दगी को मुस्कुराये हुए… बारिश अबकी बार होनी ही चाहिए…. अरसा हुआ आँखों में आंसू लहराए हुए… दिल है …

जो मिल जाते तुम एक बार……सी.एम्. शर्मा (बब्बू)..

खवाब मेरे सच हो जाते… जो मिल जाते तुम एक बार… मिल जाता मुझे संसार… जो मिल जाते तुम एक बार… पलकों पे बिठाता तुम्हें… नयन जल नहलाता तुम्हें… …

फैसला…..सी.एम्. शर्मा (बब्बू)….

आये हो मज़ार पे तो मेरी नज़रों में खामोशियों को देख… दहकते जज़्बातों पे डाले कैसे कफ़न मैंने उसको देख…. दर्द के समंदर की गहराईयां नज़र आएंगी दिल में …