Author: babucm

फैसला…..सी.एम्. शर्मा (बब्बू)….

आये हो मज़ार पे तो मेरी नज़रों में खामोशियों को देख… दहकते जज़्बातों पे डाले कैसे कफ़न मैंने उसको देख…. दर्द के समंदर की गहराईयां नज़र आएंगी दिल में …

माँ..सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

एक चुप्प सी लगी है…. आँखें खुली खुली सी…. राह देखती हैं…. न झपकी हैं न रोई हैं…. वीरान सी…. यादों के बवंडर में…. उलझे…सुलझे…. सवालों …जवाबों में… डूबी …

रात ख़त्म कहाँ हुई है….सी.एम्. शर्मा (बब्बू)….

(2122 x 3 प्रभावित ) फिर उसे मैं यूं बुलाने जा रहा हूँ…. मौत का पैगाम लेने जा रहा हूँ… रात ख़त्म कहाँ हुई है आज मेरी… शहर में …

दिल ने की दिल से हरेक बात….सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…

मिले जो तुम, तेरी आँखों ने कुछ कहने न दिया…. दिल ने की दिल से हरेक बात कुछ रहने न दिया… आये तुम ख्वाब में रात गुलज़ार हो उठी …

जिस्म मिटटी है-1….सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

(ये मेरी रचना जिस्म मिटटी है…. http://www.hindisahitya.org/94252 का भाग है) नए पौधों की संभाल…देख रेख… बहुत ही ज़रूरी है… एक कुशल सा माली आता है… और अपनी जरूरत मुताबिक़… …

आदाब अर्ज़ है…सी.एम्.शर्मा (बब्बू)…

दर्दे दिल लिया है मैंने दिल के बदले…. साँसों में नाम तेरा है मेरी जां के सदके… तू पास रहे या दूर गम नहीं है मुझको… रगों में बहती …

ख़ुश्बू प्यार की….सी.एम्.शर्मा (बब्बू)….

रिश्तों में प्यार की सचाई तुम क्या जानों… कैसे होती दिल से बात तुम क्या जानों…. रहते हो तुम जो ज़मीं से सदा ही ऊपर… कैसी होती सोंधी ख़ुश्बू …

आओ न मेरे प्राणाधार…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)..

चले आओ ना ह्रदय द्वार… मन मेरा करे चीत्कार… कहाँ हो मेरे प्राणाधार…. चले आओ ना ह्रदय द्वार… मूक मन अस्थिर ज्योति…. तड़पें अधर,चाह गंगोत्री…. लुटती सांसें तन जीर्णाकार.. …

कहाँ से लाऊँ ढूंढ के…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)..

घर था कभी जो अब मक़ान हो गया… ज़िंदा लाशों का वो शमशान हो गया…. कच्चे घरों में आती थी रिश्तों की खुशबू… पक्के क्या हुए सब सुनसान हो …

हाइकू….सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…. 

नील गगन महबूब आँगन चाँद दीदार आकाश गंगा अनगिनत तारे तेरी चुन्नरी कोयल कूके मकसद इसका प्यार की बोली दिल समझे बिना लिपि ज्ञान की नैनों की भाषा मंदिर …

गद्दारों की हामी न भरें…सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…

नेता एक हवा में उड़ता…. जूते चप्पल लहराता… हवा में उड़ने से जब महरूम हो गया… संसद भी उसके साथ खड़ा हो गया… बेशर्मी की हद्द हो गयी… सारी …

सन्मार्ग पर धर तू पग..सी.एम्.शर्मा (बब्बू)..

IIछंद – कुंडलियांII पग धर नभ पर चलत ही, ऊंची रही उड़ान… तन मन से जब कट गया, गैर हुआ इंसान… गैर हुआ इंसान, मन प्रेम मोल न जाना…. …

जिस्म मिटटी है…सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…

जिस्म मिटटी है सुना बहुत मैंने… पहले यकीं न था पर अब… यकीं होने लगा है…. जिस्म मिटटी है… हर कोई आता है नश्तर ले के… खोदता है अच्छी …

पल नहीं लगता….सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…

ता उम्र लगा रहा दिल अपना बनाने को तुम क्या आये पल लगा इसे बदल जाने को…. तिनका तिनका जोड़ आशियाँ था बनाया उसने… सरफिरों की पलक न झपकी …

हाइकू….सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…

आग घर की… पानी से काबू हुई… मन की आग ? बेरोज़गारी…. सड़क पे हुजूम… शिक्षा निष्फल ?… संसद खाली… नेता सड़क पर… जुबां से आग… अपहरण… हुजूम की …

सिर्फ तीन दृश्य?…सी. एम्. शर्मा (बब्बू)..

सो जा लाडो मेरी… इक राजकुमार आएगा… बिठा घोड़े पे दूर देस ले जाएगा…. सो जा लाडो मेरी… कितना मधुर सा लगता है…सुनना…. “साडा चिड़ियाँ दा चम्बा वे बाबुल …

मिलके भी हम रहे जुदा..सी. एम्. शर्मा (बब्बू)..

मिलके भी हम रहे जुदा जज़्बात क्या करे… तन्हाईओं में भी फिर मुलाक़ात क्या करे….. है रात सी सहर तेरी ज़ुल्फ़ों के साये में… दुनिया के रंजो गम को …

वंदना….सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…

हे अम्बिके जगदम्बिके…. वंदना तेरी वंदना…. ओजस्विनी…तमहारिणी करुणामयी तेरी वंदना….. कर कमल और तिरशूल माँ… खडग कर दे हर दंम्भ चूर माँ… भव तारिणी…ह्रदय वासिनी… नवदुर्गे रूप माहेश्वरी…. वंदना …

ये रंग….सी. एम्. शर्मा (बब्बू)….

ये रंग है तेरे मेरे प्यार के… मेरे संसार के… हर मौसम बहार के… ये रंग… खिलतें हैं जब तेरी हंसी की तरह… मन कस्तूरी महकता है मेरा… रोम …

माँ-ईशवर……सी. एम्. शर्मा (बब्बू)….

IIछंद-चोपाईII कर जोर खड़ा प्रभु के आगे, मन में भाव कभी ही जागे… माँ ‘चंदर’ आवाज़ लगायी, रोम रोम मिठास घुल आयी… कैसे कथन करूं जस तैसा, अनुभव जो …

माँ का आँचल….सी. एम्. शर्मा (बब्बू)….

सुनहरी शाम के मंज़र बड़े प्यारे थे… फलक पे चमक रहे सितारे थे… उछाला हवा में माँ ने बच्चे को ज्यूं ही… माँ के आँचल में बच्चे संग सभी …

मात-प्रेम…सी. एम्. शर्मा (बब्बू)….

IIछंद-चौपाईII दाम पड़ती छोटी जाए, कृष्णा उदर बंध ना पाए… माँ लल्ला का बंधन चाहे, योगी भी पकड़ना चाहे… माया धारी में जो उलझे,योग ज्ञान तप से ना सुलझे… …

माँ महिमा….सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…

IIछंद-चोपाई II मैया चाँद दिला दो मुझको,गर लगता मैं प्यारा तुझको… नहीं मिला जो चाँद खिलौना,गुस्सा मैं फिर तुमसे होना… मत अपना तुम लल्ला कहना,नन्द लाल मैं बन के …