Author: Anuj Lahari

कसूरबार मैं (इंसान) ही हूँ।

पेड़ों की सूखी टहनियों का, बेवक़्त मौसमों के इन कहर का सूखी नदी तालाबों और नहर का कसूरबार मैं ही हूँ…… रिश्तों में पड़ी खटास का, अग्रज अनुज की …