Author: ANU MAHESHWARI

ईश्वर के सवाल – अनु महेश्वरी

(देख दुनिया की हालात, व्याकुल हुए प्रभु खुद और कर बैठे इन्सान से कुछ सवाल, बस मेरी कल्पना भर है| कभी कभी ऐसा सोचने लगती हूँ. आखिर प्रभु को …

पतंगे की आहुति – अनु महेश्वरी

एक बार एक गधे को, हुई ईर्ष्या, देख खातिरदारी बकरे की ज्यादा, सोचा उसने मॉल ढोता ‘मै’ बेचारा, मुफ्त में मौज लूट रहा, बकरा सारा| हारकर उसने बकरे से …

रिश्ते टूटने से बच गए होते – अनु महेश्वरी

कभी कभी रिश्ता टूटने का, जितना मलाल इस तरफ होता, उतना ही शायद उस तरफ भी होता| पर पहल करने की जद्दोजहद, फिर से जुड़ने में मुश्किलें है लाती, …

थोड़ा शांत रहना चाहती हूँ – अनु महेश्वरी

थोड़ा शांत रहना चाहती हूँ, सबकी परवाह तो करती हूँ, फिर भी थोड़ा खुद को जानना चाहती हूँ, अपने अंतर मन को थोड़ा टटोलना चाहती हूँ, क्यों अंधानुकरण करते …

ले लो चैन की सांसे ही – अनु महेश्वरी

उच्चाईयो को जितना भी छू लो, व्यस्तता में खो, अगर नहीं संभाले, तुमने अपने ज़िन्दगी के रिश्तों को, एक अपूरणीय खालीपन जीवन में, हमेशा के लिए रह ही जायेगा …

मुश्किल – अनु महेश्वरी

केवल बाहर के नजारो से, कभी अंदर की हालात का, जायजा लेना ही मुश्किल है, अक्सर आलीशान महलो में, रहने वाले लोग भी, भीतर से, वास्तव में बहुत अकेले …

आंसू न बहाया करो – अनु महेश्वरी

हर किसी के लिए, यहाँ, अपने आंसू न बहाया करो, जिन्हे तेरे रिश्ते की ही क़द्र नहीं, वो तेरी भावनाओ को क्या समझेंगे…. अनु महेश्वरी चेन्नई

योगा (हाइकू) – अनु महेश्वरी

योग दिवस भारत का सन्मान गर्व की बात| देश विदेश उत्साह और जोश अच्छी है बात| योग अभ्यास औषधी छूट जाती आती है ऊर्जा| बच्चे या बड़े आसन भिन्न …

अन्नदाता हमारा (हाइकु) – अनु महेश्वरी

तपती धूप सूरज की रोशनी आग उगले| पानी की कमी किसान परेशान सूखे है खेत| कर्ज़ में डुबा अन्नदाता हमारा हाल बेहाल| आवश्यक है राजनीति बंद हो मुद्दा हल …

मुस्कुराहट (हाइकू) – अनु महेश्वरी

खिला चेहरा सुबह की किरणे खुशियाँ लाई| घर की शांति चेहरे का नूर ही बतला गई| अच्छे हो रिश्ते मुस्कुराता है मन आनंद आए| ख़ुश है सब ज़िन्दगी हसीन है लगती प्यारी| जीवन बिता मुस्कुराहट साथ …

अब तुम्हें अपनी तक़दीर लिखनी है – अनु महेश्वरी

खुद जैसी नज़र से, देखोगे, दुनिया भी वैसी ही, दिखेगी, दिल से भलाई अगर करोगे, तुम्हें भी अच्छाई ही मिलेगी| फिर से न कहना, मेरे साथ ही, ऐसा क्यों …

प्रकृति के हर रचना से हमे कुछ सिख मिलती है – अनु महेश्वरी

देखो गुलाब के साथ कांटे भी रहते है यहाँ, जो हमें सतर्क रहना भी सिखाते है और, हर परिस्थिति में शांत रहना भी सिखाते है, प्रकृति के हर रचना …