Author: ambikesh

रावण

उस रावण में एक राम छिपा है कुछ मिलता जुलता नाम छिपा है मुझ रावण में कुछ भी तो नहीं मिलता बस झूठा सा अभिमान छिपा है। उस रावण …

स्पन्दन

प्रिये, स्निग्ध सुधि मेरी कि मेरे गाल पर अन्कित तुम्हारा प्रथम चुम्बन मेरे पार्श्व मे बैथी तुम शाद्वल के बिच्हौने मे चपल अधरो मे लेकर सिन्धु सम प्यर मधु …