Author: Ambarish Srivastava

महाकवि तुलसी-महिमा

दन्त पंक्ति पट खोल, मुख महिं बोला राम जब| सुत उपजा अनमोल, हुलसी हुलसी, जग चकित|| (सोरठा) राजापुर शुभ रत्न समाना| उपजा जहँ तुलसी विद्वाना|| छंद शिरोमणि बाबा तुलसी| …

भारतमाता-गान

शत-शत वंदन भारत माता धन्य हमारी माटी, सदाचार ही बने आचरण ऐसी हो परिपाटी| केरल तमिल चरण माता के सिंह हस्त गुजराती वक्षस्थल उत्तर प्रदेश शुभ सब संतान अघाती …

‘जागे दिल्ली आज’: कुंडलिया

सच्ची कुंडलिया सुनें, देखें सारे बिम्ब. बन्दर-बिल्ली एक हैं, एक आज अवलंब.. एक आज अवलंब, ‘खाप’ को भान करा दें, अन्यायी को याद, छठी का दूध दिला दें, थर-थर …

आरोग्य दोहावली

दही मथें माखन मिले, केसर संग मिलाय. होठों पर लेपित करें, रंग गुलाबी आय..   बहती यदि जो नाक हो, बहुत बुरा हो हाल. यूकेलिप्टिस तेल लें, सूंघें डाल …

‘ठगे गए हम लोग’ : कुंडलिया

खोया प्यारा गाँव है, खोये हैं आधार. नहीं रही वह सभ्यता, नहीं रहा वह प्यार. नहीं रहा वह प्यार, शहर ने सब कुछ निगला. विषय वासना रूप, वमन कर …

‘कान्हा लालमलाल’ : कुंडलिया

होली रंगों से भरी, कान्हा लालमलाल. सतरंगी आँचल ढके, राधा मले गुलाल.. राधा मले गुलाल, हर्ष से गले लगाए. पिचकारी की धार, प्रीति का रस बरसाए. नत नयनों में …

‘फुर्र हैं पापड़-गुझिया’: कुंडलिया

गुझिया मीठी रसभरी, टपकाती है प्यार. पापड़ उसके साथ में, नाचे बीच बजार. नाचे बीच बजार, झूमती खेले होली. पकवानों के बीच, मौज हो हँसी-ठिठोली. चुर्र चुर्र संगीत, बजाते …

‘होली’ : सार/ललित छंद

भाँग चढ़ाये रंग जमाये, मादक चले बयारी. छंद-छंद के पुष्प खिले हैं, सजी हुई फुलवारी.. भाँग चढ़ाये रंग जमाये, रंगे साथी संगी. तरह तरह के रँग दिखाता, जीवन है …

‘जग भरमाया है’: मनहरण घनाक्षरी

गोरी-गोरी बाँकी छोरी, लागे चाँद की चकोरी, धन्य भाग सासू मोरी, तोहफा पठाया है. कंचन सी काया तोरी, काहे करे जोरा-जोरी, मुखड़े को देख गोरी, चंदा भी लजाया है. …

कह-मुकरी या ‘मुकरी’

(मुकरी , की परिभाषा मुकरी , का अर्थ मुकरी – मुकरीसंज्ञा स्त्री० एक प्रकार की कविता । कह मुकरी । वह कविता जिसमें प्रारंभिक चरणों में कही हुई …

‘दे-दे मारें ईंट-ईंट: रूप घनाक्षरी

क्रूर सूदखोर होशियार बड़ा आदमी है, सत्य कहा नारियों ने दें सुधार पीट-पीट. देखे जहाँ नारी प्यारी वहीं टपकावे लार, झटका करंट लगे उछले ये फीट-फीट. मसका हमेशा मारे …

‘ उसकी ही कहिये’ सांगोंपांग/सिंहावलोकन घनाक्षरी

कहिये ये  घनाक्षरी, रस से जो हरी भरी, सांगोपांग शब्द-शब्द , कहते ही रहिये. रहिये सदा प्रसन्न, घरवाली तन्न भन्न, देती रहे दन्न दन्न, सिर-माथे गहिये. गहिये ये नेह …

‘देश को प्रणाम है’ : मनहरण घनाक्षरी

शीश हिमगिरि बना, पांव धोए सिंधु घना, माँ ने सदा वीर जना, देश को प्रणाम है | ब्रम्हचर्य जहाँ कसे, आर्यावर्त कहें इसे, चार धाम जहाँ बसे, देश को …

‘खुद ज्ञानवान है’: मनहरण घनाक्षरी

‘सिन्धु’ से ही ‘हिन्दू’ बना, कहते जिसे हैं जाति, ‘हिन्दू’ सुविचारधारा, जाति नहीं, शान है | सच्चे सारे आदि-ग्रन्थ, जिनमें है रामसेतु, सच्चे ही हैं धर्मग्रन्थ, सामने प्रमाण है …

हास्य-व्यंग्य दोहे:

चिमटा बेलन प्रेम का, खुलकर करें बखान. जोश भरें हर एक में, ले भरपूर उड़ान..   जगनिंदक घर राखिये, ए सी रूम बनाय. चाहे सिर पर ही चढ़े, वहीं …

‘नारी’ आधारित कुंडलिया:

(१) नारी से नैना मिले, उपजें कोमल भाव. फँसे मोह के चक्र में, नर का यही स्वभाव. नर का यही स्वभाव, जानती है यह नारी. तभी रूपसी आज, सुशोभित …

गणात्मक मनहरण घनाक्षरी

सूत्र : र ज र ज र ल र ज र ज र (रगण जगण)x2 +रगण+लघु, (रगण जगण)x2 +रगण राजभा/जभान/राजभा/जभान/राजभा/ल राजभा/जभान/राजभा/जभान/राजभा ___________________________________ छोड़ अंग अर्ध-नग्न भूल वस्त्र देख तंग, …

‘गाँव’ तब और अब : दोहे

____________________________ महके माटी गाँव में, चंदनस्वेदी देह. मदमाये महुआ मदिर, आपस में हो स्नेह.. कच्ची महके गाँव में, बास मारती देह. पी के लुढके शाम को, कहाँ रहा है …

‘व्यंग्य कुंडलिया’

  (१) चोरी यद्यपि पाप है, चोरी है अपराध. फिर भी चोरी कीजिये, ऑफीसर को साध. ऑफीसर को साध, चलेगी रिश्वतखोरी. बिजली पानी टैक्स, कीजिये जमकर चोरी. चोखा है …

‘कुछ कुंडलिया छंदबद्ध परिभाषा सहित’

(१) (कुंडलिया की परिभाषा) दोहा कुण्डलिया बने, ले रोले का भार, अंतिम से प्रारम्भ जो,  होगा बेड़ा पार, होगा बेड़ा पार, छंद की महिमा न्यारी, अंत समापन दीर्घ, कहे …

‘मत्तगयन्द सवैया परिभाषा/वंदना’

  सातहु भानस ले गण ‘अम्बर’ दो गुरु अंतहिं मत्तगयन्दा. ये मतवाल गयंद क चाल मनोहर चौपद रूप सुनंदा. अंतिम को दुहराइ पढ़े जब सिद्ध हो नाम सवाइ अनंदा. …

“सरस्वती वंदना”

शुभ्र वस्त्र शांत रूप, नैनन में ज्ञानदृष्टि, देवी हंसवाहिनी को हाथ जोड़ ध्याइये. चरण कमल से हैं, आसन कमल का है, ब्राह्मी ज्ञान दायिनी को, शीश ये नवाइये. पुस्तक …