Author: Aman Nain

कविता :– किसान कैसे तेरे हालात है, कवि :– अमन नैन

किसान कैसी तेरे हालात है रो रहा वर्तमान है सामने तेरे अंधकार है है शीत कैसा पड़ रहा वो थरथराता गात है है आधी अँधेरी रात तो भी किसान …

कविता :– साधु का जीवन , कवि :– अमन नैन

जिंदगी हमारी साधु की सादा भेष सादा बाना हमारा कर्म हमरा चलते रहना कभी ना एक जगह ठहरना काम हमारा मांग कर खाना प्रभु का गुणगान करते रहना बुरा …

कविता :– आजादी के दिवाने, कवि :– अमन नैन

अंधकार के युग में उमीद की एक रौशनी देखी थी आजादी के दीवानो के सिर सरफरोजी की तमन्ना को परवाने चढ़ाते देखा है अपने खून से माँ के आँचल …

कविता:– हस्ती मिटा ली , कवि ~~ अमन नैन

उड़ती चिड़िया से दिल लगा बैठे खुले आसमान को अपना समझ बैठे दुनिया से परे अपना अलग आसियाना बनाने की सोचने लगे जज्बातो पर नही रहा काबू उड़ते अरमानो …

कविता :– जलवा तेरे हुस्न का, कवि:– अमन नैन

यादे वो तेरी लगती है बहुत प्यारी वो लबो का बोलना जो मेरा दिल कभी ना भूल पाएगा चहरे की वो मासूमियत फूलो की तरह वो मुस्कान कभी ना …

माँ दुनिया मे सबसे न्यारी :-, अमन नैन

माँ दुनिया मे सबसे न्यारी लगती है स्वर्ग से प्यारी करती परवरिश बच्चो की न्यारी चरणो मे जिसके सूरज भी झूक जाए ऐसी तपस्वी है मॉ दुनिया मे मॉ …

कविता–मौज वह बचपन की, कवि- अमन नैन

मौज वह बचपन की बडी न्यारी थी होती सायं बडी प्यारी थी सुबह स्कूल दोस्तो के साथ जाते थे गलियो मे किलकारी मारते रहते थे लेकर बहाना पेट दर्द …

कविता ::— एक था गॉव कवि ::—  अमन नैन

  पुराना था जमाना एक था गॉव हमारा पनघट पर जाती थी पानी लेने औरते इक्ट्ठी बुढ्ढे बैठा करते थे महफिल लाकर चबूतरे पर किसान चलते थे खेतो मे …

कविता :– माटी मेरे खेत की, कवि:– अमन नैन

माटी मेरे खेत की  लगे स्वर्ग से प्यारी सै कुदरत से मिली मुझे सौगात न्यारी सै फर्ज माँ का यह निभा रही सै चीर कर छाती अपनी पेट हमारा …

एक नन्नी सी जान — कवि:- अमन नैन

एक नन्नी सी जान को नंगे पांव  अंगारों पर चलते देखा है  प्यारी से आँखों में उसके मैने ‌सपनों को उडता देखा है खिलौनों की छोडकर उसे तलवारों से …