Author: Karma Vaahini

इंसान हूँ

थकी आवाजें,आबरू बगल में,दकियानूसी का लिबास पहनता हूँ। नफरत का व्यापार लगा,सौदा रूहानी कलपुर्जों का करता हूँ।। बिखरी साँसे,खुद से अपरिचित,खबरेें जुबां पे परिंदों की रखता हूँ। इस ज़हान की …

कुछ लफ्ज़ 1. जिस्म का नही जनाब इस रूह का इम्तेहान लीजिए। आंखें ये फरेबी हैं,आप जज्बातों का तकाजा कीजिये।। 2.लफ़्ज़ों की इस हेरा फेरी में सच को झूठ …