Author: admin

सूरज उगने के संग ही

सूरज उगने के संग ही, आसमां में खो जाती है, प्यारी-सी आवाज सुनाकर, खुश बहुत वो करती है , प्यारी-सी चिड़िया मेरी, मन को बहुत लुभाती है। नन्हें-नन्हें पंखों …

जब एक ‘टेलर’ बना पार्षद

(1 ) आधी ‘उम्र’ चीथड़ों को गूंथने में काड़ दी, आधी में ‘वरिष्ठ पार्षदी’ हाथ आई है। छोड़ि देगों लोक-लाज अवना करों लिहाज़, ‘भेड़िया’ के घर आज खुद भेड़ …

भारत देखो लुटगईं-भारत की नारियाँ

(१) अपने ही घर में मिटगईं , सिंदूर लालियाँ ! भारत देखो लुटगईं, भारत की नारियाँ !! बेटा मरा आगे पड़ा, माँ ता न रो सकी ! अंतिम समय …

पहचानो-कौन है ?

(1) छोटा सा कद लागे,गोल-मटोल सो, गोल से गाल,लिये हैं ललामी ! स्वेत हैं केस,रहें विखरे, मुख मूछ-मुड़ी,पहने कुरता पजामी !! (2) चारा जि खाए,पचाए गयो, अव रेल में …

माँ

माना आज बसा ली है हमने अपनी इक छोटी सी दुनिया, पर चलते-फिरते लौट आता है मन किसी और सदी मैं… जब हमारी पूरी दुनिया हुआ करती थी तेरा …

तहखाना

कुछ दिन पहले, मस्तिष्क की देहलीज से चलते-चलते, जब पहुंचे तहखाने में अपने दिल के, पाया इक पोटली में बंद तेरी यादों को… कुछ यादें थीं जो इक कोने …

चातक प्रेम

प्रियतम मेरे, तुम्ही प्रेम हो परिभाषित। सुग्र्ह स्वर्ण रूप वाली तुम, मधुर विचार अधीन। तुम पर मनह अधर सब अटके, गीत तुम्ही जीवन संगीत।। सृजित पुष्प सी कुसमित हो …

फागुनी हवाओं के पीताम्बरी फूल

पके हुए खेतों के आर पार बसंती हवाओं से जूझते अलग अलग तने खड़े सिहरती लताओं से घिरे फागुनी हवाओं के फूल क्या नाम विशेष दूं इन्हें किस के …

विश्वरूप

दोनों ही उस आकाश के परपार हो जाते हैं पलक शून्य दृष्टि संग उसी एक लय में थिर, यकायक अपनी ही गति के विपरीत सचेतन धारण करने लगते कुंडलिनी …