Author: Abhishek Rajhans

जो भी किया, अच्छा ही किया

तुमने जो किया ,ठीक ही किया तुमने जो भी समझा ,ठीक ही समझा बेकार में ही दिल लगाने निकला था मैं तुमने अक्ल से दिल ठिकाने लगा दिया होश …

मेरी पहली कहानी का दूसरा हिस्सा

समय बहुत तेजी से बदलता है ना, दोस्तो! कब क्या हो जाये कौन जानता है ,किसे खबर होती है । नाज़िया और मैं अब अच्छे वाले दोस्त बन गए …

मेरी पहली कहानी का पहला हिस्सा-“कौन किसे कबूल”

मेरी पहली कहानी-कौन किसे कबूल ये तकरीबन कुछ दस साल पहले की बात थी ,जब मैं ग्यारहवीं में पढ़ता था , गणित में थोड़ा फ़िसड्डी था इसलिए जीवविज्ञान पढ़ने …

तुम मामूली हो, मामूली बन कर रहो ना

गड़े मुर्दे मत उखाड़ो यारो कुछ लोगो की सुकून की नींद क्यों गायब करना चाहते हो तुम मामूली हो , मामूली बन कर रहो ना ये तो खेल है …

मेरे देश की औरते

औरते मेरे देश की औरते बड़ी विचित्रता का बोध कराती है अपने आत्मसम्मान की चिंता किये बिना सब कुछ करती जाती है वो बस सबसे प्रेम करती जाती है …

मेरा गांव बदल रहा है

मेरा गांव अब बदल रहा है थोड़ा-थोड़ा सा शहर हो रहा है काका ,मामा, फूफा -फूफी अंकल-आंटी हो रहे हैं गुड़ के ढेलियों की जगह कुरकुरे-मैग्गी ले रहे हैं …