Author: Abhishek Rajhans

कहाँ है हमारा संविधान

शीर्षक–कहाँ है हमारा संविधान देखिये भाईयो और बहनों हम सब भारतवासी ही है सबसे बड़ा लोकतंत्र है हमारा क़ानून की किताब भी है भैया अरे वही जिसे हम संविधान …

तुम्हारे बाद भी

शीर्षक — तुम्हारे बाद भी तुम्हारे जाने के बाद भी कुछ नहीं बदलेगा यहाँ फिर कोई इंसान के खाल ओढ़े दरिंदा नोच खायेगा किसी बच्ची के जिस्म को अखबार …

मैं फिर आऊँगा

शीर्षक–मैं फिर आऊंगा मैं फिर आऊंगा तुम्हारे सपनो में तुम्हारे सपनो की तस्वीर बन तुम्हे नींद से जगाने या तुम्हारी नींद चुराने मैं फिर आऊंगा बादल बन तुम्हे खुद …

रोसड़ा जिला बनाओ

शीर्षक–रोसड़ा जिला बनाओ बहुत हुआ बहुत हुआ अब रोसड़ा वाले जाग जाओ अपने हाथो से रोसड़ा को जिला बनाओ सियासत के गलियारों में अब तो धमक दिखाओ दर्द को …

अगर मैं लड़की होता

शीर्षक–अगर मैं लड़की होता अगर मैं लड़की होता तो क्या सबकुछ होता ऐसा जैसा होता आया है क्या माँ मुझे भी मेरे भाई जितना प्यार मुझे भी देती मुझे …

लक्ष्य संधान हो….

शीर्षक–लक्ष्य संधान हो… बहुत हुआ अपरिचित हो कर जीवन जीना अब कोई मनुष्य व्यर्थ न हो निज जीवन का कोई तो अर्थ हो हर जीवन चरित्र को गुणगान हो …

भूल नहीं पाता तुम्हे

शीर्षक-भूल नहीं पाता तुम्हे आज भी घर के बरामदे में बैठ अपने चश्मे को पोछता हुआ मैं इंतज़ार कर रहा तुम्हारा हवा बहती हुई जब पर्दों को उड़ा ले …

हे भारत ! हे भारती !

शीर्षक–हे भारत! हे भारती ! जहाँ शिव के जटा से निकली गंगा की धार है जहाँ घर-घर में कामधेनु का दुलार है वीरो की वीरभूमि बलिदानों से भरी अद्भुत …

है मुझे भी इंकार प्रिये

शीर्षक-है मुझे भी इंकार प्रिये जब मैं बीच समन्दर मझदार में था जब लहरों में बिन पतवार था जब वक़्त मेरा ,तेरे इंतज़ार में था था तुझे इंकार प्रिये …

ऐ नौकरी

कितनी सिद्दत से चाहा तुझे हर पल बस चाहा तुझे घर छोड़ा परिवार छोड़ा हुस्न का दीदार छोड़ा गाना छोड़ा गुनगुनाना छोड़ा तुम्हे पाने की जिद में महीने -महीने …

पहचान

मैं औरत हूँ कमजोर,लाचार,बेजार कहाँ जीती मैं ज़िन्दगी अपनी कहाँ लेती साँसे खुद से मेरी साँसो से भी हैं सबको इनकार मेरी साँसे तो होती है किसी ना किसी …

किस बात का है इंतज़ार

शीर्षक-किस बात का है इंतज़ार किस बात का है तुम्हे इंतजार क्यों हो रहा है तू बेजार रास्ते हो चाहे मुश्किल जितने अपने पांव से सफ़र कर यार चट्टानों …