Author: Abhishek Rajhans

आज मैं क्या लिखूँ

शीर्षक — आज मैं क्या लिखूँ कल रात कैसे गुजारी मैंने क्या मैं वो बात लिखूं तुमसे जो हो ना पायी क्या मैं वो मुलाकात लिखूं अपने सारे जज्बात …

मैंने जिंदा रखा है

दर्पण मेरे कमरे का समर्पित है तुम्हारे अक्श के इंतज़ार में तुम्हारे वजूद को अब तक जिन्दा रखा है मैंने मैंने अपनी रूह में मैंने अभी भी जिंदा रखा …

पता नहीं क्या

शीर्षक–पता नहीं क्या पता नहीं क्या हक़ था मेरा जो तुम्हे अपना समझने लगा था तुम बस मुस्कुराई थी और मैं सपना देखने लगा था पता नहीं क्या था …

जब मैं चला जाऊँगा

शीर्षक–जब मैं चला जाऊँगा तुम्हारी ज़िन्दगी से जब मैं चला जाऊँगा तुम ढूंढोगी मुझे बदहवास हो कर पर मैं लौट ना पाऊंगा अभी पागल कहती हो न मुझे तुम …

हाँ, मैं प्यार में हूँ

हाँ मैं प्यार में हूँ लेकिन सिर्फ तुम्हारे प्यार में नहीं मैं तुम्हारे आँखों की गहराई के प्यार में हूँ मैं तुम्हारे गालो पे बनते गड्ढो के प्यार में …

लिखता रहूँगा नाम तेरा

दिन भर गलियों में घूमेंगे तेरी याद की गठरी लेकर… रात रात भर करवट बदलता रहूँगा तेरे इंतजार की तपिश सह कर … हर सुबह तकता रहूँगा दरवाजे को …