Author: abaadh

नहीं- नहीं

प्यारी प्यारी भोली भाली प्यारी ऑंखें , प्यारी बातें बातों में बस एक ही बात नहीं नहीं और नहीं नहीं मैंने पूछा प्यार है मुझसे वो बोली की नहीं …

कर्ज

कुछ बिना भुनी सांसें संभल रखी हैं , चुकाने को जो ले रखी थीं उधर किसी बनिया से जो एक साथ खर्च हो गयी मुझसे कुछ बेटे के होने …

यादें

जब भी यादों की टूटी हुई छत की दरारों से कुछ बूंदे टपकती हैं ना जाने क्यों कहीं कुछ जला – जला सा लगता है क्यों गूंजती हैं कानो …