कुछ इस तरह मैंने उसका ख़त पड़ा

कुछ इस तरह मैंने उसका ख़त पड़ा
पहले दरवाजे को बंद किया
और फिर सिटकनी लगाई
और उसे हिलाकर देखा की सब ठीक है

फिर एक कोने मे जाकर
उसे आहिस्ता से खोलकर
पहले दीवार पर नज़र दौड़ाई
और फिर फर्श की तरफ देखा

इसी दरमियाँ एक भागते चूहे को भी देखा
ऐंसा भगा मनो जैंसे ज़िस्म से रूह

मैं कुछ मायने नहीं रखता उनके लिए अब
जो मेरे लिए सब कुछ थे
एक गहरी साँस लेकर मैंने ऊपर देखा
कुछ इस तरह मैंने उसका ख़त पड़ा !!

by Anderyas

5 Comments

  1. babucm babucm 22/07/2017
  2. Anderyas Anderyas 22/07/2017
  3. arun kumar jha arun kumar jha 22/07/2017
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 22/07/2017
    • Anderyas Anderyas 22/07/2017

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