बेटियों, से ज़िन्दगी होती है – अनु महेश्वरी

समय कब पंख लगा उड़ गया,
कितना कुछ अब है बदल गया,
जिसे अंगुल पकड़, मैंने चलना सिखाया था,
आज वह चलते वक़्त, मेरा हाथ थाम लेती है,
जिस का हाथ पकड़, कभी मै सड़क पार कराती थी,
आज वह अंगुल पकड़, मुझे ही सड़क पार कराती है,
कभी मै सुबह उसे नींद से जगाती थी,
अब वह मुझे, सुबह उठाने लगी है,
जिसकी उलझने मै सुलझाती थी, कभी,
आज वह, मेरी उलझने, सुलझा जाती है सभी,
कभी जिसे मै समझाया करती थी,
आज वह मुझे समझाने भी लगी है,
फर्क बस इतना सा है,
उसके और मेरे समझाने में,
मै जब भी समझाती थी,
हमारे बीच, अनदेखा सा,
एक समाज आ जाता था,
उसके समझाने में, कभी भी,
समाज बीच में नहीं आता है,
उसे सिर्फ, मेरी फिक्र रहती है,
वह और कोई नहीं,
मेरी प्यारी बिटीया है,
जो अब बड़ी हो गयी है,
यह माँ-बेटी का प्यारा सा रिस्ता है,
जो समय के साथ गाड़ा हो गया है|

बेटियों, से ज़िन्दगी होती है,
माँ के दिल के, पास होती है,
उन्हीं से, रोशन जहाँ रहता है,
उन्ही से, घर खुशिया रहती है….

 

अनु महेश्वरी
चेन्नई

16 Comments

  1. arun kumar jha arun kumar jha 21/07/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 03/08/2017
  2. Anderyas Anderyas 21/07/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 03/08/2017
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 21/07/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 03/08/2017
  4. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 22/07/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 03/08/2017
  5. babucm babucm 22/07/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 03/08/2017
  6. angel yadav Anjali yadav 22/07/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 03/08/2017
  7. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 22/07/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 03/08/2017
  8. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 23/07/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 03/08/2017

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