रोमांच — डी के निवातिया

रोमांच

बदन संगमरमर है या तराशा हुआ टुकड़ा कांच सा
शबनम की बूँद ढले तो लगे है तपता कनक आंच सा
नजर है की उसके उत्कृष्ट बदन पर ठहरती ही नहीं
निहारे जो भी उस अनुठे सौंदर्य को लगे रोमांच सा !!

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डी के निवातिया ……!!

 

16 Comments

  1. Madhu tiwari Madhu tiwari 21/07/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 27/07/2017
  2. Ram Gopal Sankhla Ram Gopal Sankhla 21/07/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 27/07/2017
  3. chandramohan kisku chandramohan kisku 21/07/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 27/07/2017
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 21/07/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 27/07/2017
  5. arun kumar jha arun kumar jha 21/07/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 27/07/2017
  6. Anderyas Anderyas 21/07/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 27/07/2017
  7. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 22/07/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 27/07/2017
  8. babucm babucm 22/07/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 27/07/2017

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