केसर सुरंग हू के रंग में रंगौगी आजु

केसर सुरंग हू के रंग में रंगौगी आजु,

और गुरु लोगन की लाज कों पहेलिवौ ।

गाइवौ-बजाइवौ जू, नाँचिवौ-नँचाइवौ जू,

रस वस ह्वैके हम सब विधि झेलिवौ ॥

’ठाकुर’ कहत बाल, होनी तौ करौंगी सब,

एक अनहोनी कहो कौन विधि ठेलिवौ ।

कर कुच पेलिवौ, गरे में भुजि मेलिवौ जू,

ऐसी होरी खेलिवौ जू, हम तौ न खेलिवौ ॥

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