गीत -संभावनाओं के स्वर -शकुंतला तरार

गीत-27-6 -2017

संवेदनाओं को अपने स्वर दीजिए

भावनाओं को थोड़ा मुखर कीजिए ||

कोरी कल्पनाओं से नहीं बनती ये ज़िंदगी

समस्याओं से घबरा के नहीं चलती ज़िंदगी

उपेक्षाओं को तह कर निखर लीजिए

संवेदनाओं को अपने स्वर दीजिए ||

भावनाओं को थोड़ा मुखर कीजिए ||

प्रतीक्षाओं को समय से साध कर ज़रा

रचनाओं को शब्दों में बाँध कर ज़रा

संभावनाओं से जीवन रुचिकर कीजिए

संवेदनाओं को अपने स्वर दीजिए ||

भावनाओं को थोड़ा मुखर कीजिए ||

शकुंतला तरार रायपुर (छत्तीसगढ़)

6 Comments

  1. babucm babucm 21/07/2017
  2. Madhu tiwari Madhu tiwari 21/07/2017
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 21/07/2017
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 21/07/2017
  5. Bindeshwar prasad sharma bindeshwar prasad sharma 21/07/2017
  6. arun kumar jha arun kumar jha 21/07/2017

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