मानव मन – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा बिन्दु

कमजोरी – गुस्सा – चिड़चिड़ापन

आने लगे  हैं  सबमे ।

घृणा – जलन – बिद्रोह

रंग जमाने लगे   सबमे ।

बहस  – बकवास – प्रतिरोध

क्यों छाने लगे  मन में ।

लोभ – प्रतिशोध – मिथ्या

घर बनाने लगे  जन – जन मे ।

अभिमान – आदत – दुश्मनी

जगह पाने लगे सबमे ।

आलस्य – स्वार्थ – चिंता

ऐसे सताने लगे  सबमे ।

 

बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा  बिन्दु

6 Comments

  1. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 20/07/2017
  2. babucm babucm 21/07/2017
  3. Madhu tiwari Madhu tiwari 21/07/2017
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 21/07/2017
  5. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 21/07/2017
  6. arun kumar jha arun kumar jha 21/07/2017

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