आखिर क्यों….

  1. बचपन में माँ तुने सिखाया था,

खिलौना छोड़ना अपने भाई के लिए।

मेरे छोड़े छोटे कपड़ें को,

तुने दिया था मेरी बहन को।

मैं जब रोई थी बहुत तो,

तुम नए खिलौने कपड़ो का

वादा किया था मुझसे।

आखिर माँ छोड़ने की आदत,

तुने मुझे क्यों लगाया।

इस छोड़ने की आदत के कारण

मुझे छोड़ना पड़ा अपना प्रिय खिलौना

नए खिलौनों के खातिर।

मुझे छोड़ना पड़ा सितारों बाला फ्राँक

नए फ्राँक के खातिर।

आखिर छोड़ने की आदत

तुने ही लगाया था मुझे।

और इसी आदत के कारण,

छोड़ते आ रही हूं आज तक,

अपना सब कुछ दुसरो के खातिर।

इसी आदत के कारण

छोड़ना पड़ा मुझे वह आँगन।

जहाँ गुंजी थी  हमारी किलकारी,

दुसरे के आँगन के खातिर।

छोड़ना पड़ा मुझे तुम्हें

पापा, भाई, बहन,और दोस्तों को,

सिर्फ एक पति के के खातिर।

छोड़ना पड़ा मुझे अपना सपना

सिर्फ सास ससुर के खातिर।

यहाँ तक की माँ

नींद भी छोड़ना पड़ा मुझे

बच्चों और परिवार के खातिर।

गहना छोड़ना पड़ा

ननद के खातिर।

बेटा छोड़ना पड़ा

अपने बहुँ, पोते पोतियों के खातिर।

आखिर क्यों छोड़ती रहुँ,

अपना सब कुछ दुसरो के खातिर।

और माँ एक दिन

अपने पति का घर भी,

छोड़ना पड़ा बेटे बहुँ के खातिर।

और मैं जानती हूं माँ

एक दिन मुझे अपनी सांसे भी

छोड़ना पड़ेगा किसी ओर के खातिर।

आखिरी क्यों क्यों क्यों क्यों माँ?

तुने मुझे छोड़ने का आदत लगाया।