बदन संगेमरमर — डी के निवातिया

बदन संगेमरमर

बदन संगेमरमर है या तराशा हुआ टुकड़ा कांच सा
शबनम की बूँद ढले तो लगे तपता कनक आंच सा
नजर है की उस उत्कृष्ट जिस्म पर ठहरती ही नहीं
निहारने जो इस गुलबदन को होता प्रतीत रोमांच सा !!

!

डी के निवातिया

18 Comments

  1. angel yadav Anjali yadav 19/07/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 26/07/2017
  2. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 19/07/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 26/07/2017
  3. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 19/07/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 26/07/2017
  4. Madhu tiwari Madhu tiwari 19/07/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 26/07/2017
  5. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 19/07/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 26/07/2017
  6. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 20/07/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 26/07/2017
  7. C.M. Sharma babucm 20/07/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 26/07/2017
  8. दीपेश जोशी 20/07/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 26/07/2017
  9. arun kumar jha arun kumar jha 21/07/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 26/07/2017

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