एक नजर — डी के निवातिया

***एक नजर ***

बुझती नहीं प्यास साकी अब सिर्फ जाम से
दिल झूमने लगता है सूरज ढलते ही शाम से
फकत एक नजर जी भर के देख लेने दो मुझे
बेशक कर देना मुझे बदनाम उसके नाम से !!

!

डी के निवातिया

14 Comments

    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 25/07/2017
  1. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 18/07/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 25/07/2017
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 18/07/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 25/07/2017
  3. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 19/07/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 25/07/2017
  4. C.M. Sharma babucm 19/07/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 25/07/2017
  5. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 19/07/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 25/07/2017
  6. Madhu tiwari Madhu tiwari 19/07/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 25/07/2017

Leave a Reply