गीत- सावन ने ली है अंगड़ाई -शकुंतला तरार

 गीत

“सावन ने ली है अंगड़ाई”

छम-छम-छम-छम स्नेह झर रहे

सावन ने ली है अंगडाई,

बादल के गजरे गुंथवाकर

प्यासी धरती हरषाई ||

1-अलकों में पलकों की छाया

सांझ सवेरा ज्यूँ मिलते

अपने ही सपनों के उपवन

गीले छप्पर में खिलते

टहनी-टहनी डाली-डाली

नव पल्लव भी इठलाई ||

2-चिड़ियों के पर गीले-गीले

अखबारों सा भीगा मन

एहसासों की झड़ी सुहानी

पल-छिन ,पल-छिन सीला तन

बिम्ब कल्पनाओं के भीगे

धूप की बगिया खिल आई ||

3-जीवन क्या है अर्थ भेद क्या

इस मौसम ने समझाया

श्यामल मृदुल कालिंदी है

चाँद उतर नभ से आया

निंदियारी पलकों से छनकर

पर्णकुटी भी मुस्काई ||

शकुंतला तरार रायपुर छत्तीसगढ़

13 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 18/07/2017
    • shakuntala tarar 19/07/2017
    • shakuntala tarar 19/07/2017
  2. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 18/07/2017
    • shakuntala tarar 19/07/2017
  3. arun kumar jha arun kumar jha 18/07/2017
    • shakuntala tarar 19/07/2017
  4. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 18/07/2017
    • shakuntala tarar 19/07/2017
  5. C.M. Sharma babucm 19/07/2017
    • shakuntala tarar 19/07/2017
  6. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 19/07/2017

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