निशान

पूरा करने कमी को अपनी, मानव चलता तो है
आवेग की ऊष्मा से कभी पिघलता, सांचे में ढलता तो है
एक निशान तो रहना चाहिए समय का, फौलाद के जिस्म पर
देखकर जिसे किसी का अश्रु, मुस्कुराकर निकलता तो है।

थोड़ी बहुत खलिश रह ही जानी चाहिए बाकी रिश्तों में
गिला, शिकवा, बद्दुआ,भड़ास में मैल कुछ निकलता तो है
दुखी न होना है उसके रुखे, सूखे, ज़िद्दीपन से
यादकर जिसे किसी की दुआओं का, मरहम निकलता तो है

12 Comments

  1. Lakhbir 18/07/2017
  2. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 18/07/2017
  3. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 18/07/2017
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 18/07/2017
  5. Sonia 18/07/2017
  6. sakshi 18/07/2017
  7. Punkaj Goyal 18/07/2017
  8. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 18/07/2017
  9. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 18/07/2017
  10. arun kumar jha arun kumar jha 18/07/2017
  11. C.M. Sharma babucm 18/07/2017

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