रिश्ते का धाराशाही होना

सूखे पत्ते की तरह

आज हर रिश्ता

धीरे धीरे धाराशाही

होता जा रहा है

रिश्ते टूटने की खबर से

बेखबर इन्सान को

अपनी नौका(जीवन) के आगे

हर रिश्ता बौना

नजर आ रहा है।

लोग ये नहीं समझते

जब जब रिश्ते टूटते है

नौका ठहर सी जाती है।

और इन्सान बिल्कुल

अकेला रह जाता है

इस विशाल समुद्र(दुनिया) मे।

तब कहीं समझ में आता है

नौका का समुद्र में

अकेला रहने से ज्यादा गम

रिश्ते टूटने से होता है।

फिर भी विशाल रुपी समुद्र में

नौका तो चलती रहती है।

पर रिश्ते कभी नहीं जुड़ पाते

और कभी जुड़ भी गए

तो उसकी डोर इतनी

कमजोर होती है

कि हल्की हवा के झौके मे

पुनः टूट  जाती है।

और धीरे धीरे

रिश्ते के धागे

इतने कमजोर हो जाते हैं

कि दूर दूर तक

उसके जुड़ने की

कोई किरण नहीं दिखती।

और रिश्ते का धौरंदा

रेत की महल की तरह

धाराशाही हो जाता है।

14 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 17/07/2017
  2. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 17/07/2017
  3. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 17/07/2017
    • Bhawana Kumari Bhawana Kumari 18/07/2017
  4. arun kumar jha arun kumar jha 17/07/2017
    • Bhawana Kumari Bhawana Kumari 17/07/2017
  5. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 17/07/2017
    • Bhawana Kumari Bhawana Kumari 17/07/2017
  6. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 17/07/2017
    • Bhawana Kumari Bhawana Kumari 17/07/2017
  7. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 18/07/2017
    • Bhawana Kumari Bhawana Kumari 18/07/2017
  8. babucm babucm 18/07/2017

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