मेरे सवाल

भीड़ में भी तन्हा क्यों है हम,

क्यों टूटे टूटे से है हम.

जोड़ते है जिन रिस्तो को हम,

बड़ी सिद्दतों के साथ हर वक्त,

क्यों पड़ जाते है अकेले हम.

क्यों मन मेरा रूठा है,

क्यों मन मेरा सूना है,

जिंदगी है ,सपने है ,जो लोग है,

उनमे बहुत अपनापन है.

अपने ही बारे में इतने सवाल क्यों है,

अपने मन मे इतने विचार क्यों है.

क्यों कुछ पाने से,

कुछ खोने से डरते है हम.

क्यों भीड़ में भी तन्हा है हम,

क्यों टूटे टूटे से है हम…

क्यों टूटे टूटे से है हम….

क्यों तन्हा तन्हा है हम…

 

17 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 13/07/2017
    • अंजली यादव Anjali yadav 16/07/2017
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 13/07/2017
    • अंजली यादव Anjali yadav 16/07/2017
  3. chandramohan kisku chandramohan kisku 13/07/2017
    • अंजली यादव Anjali yadav 16/07/2017
  4. arun kumar jha arun kumar jha 13/07/2017
    • अंजली यादव Anjali yadav 16/07/2017
  5. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 13/07/2017
    • अंजली यादव Anjali yadav 16/07/2017
  6. C.M. Sharma babucm 14/07/2017
  7. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 14/07/2017
    • अंजली यादव Anjali yadav 16/07/2017
    • अंजली यादव Anjali yadav 16/07/2017
    • अंजली यादव Anjali yadav 16/07/2017
  8. अंजली यादव Anjali yadav 16/07/2017

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