मुक्म्मल जहॉ- अरूण कुमार झा

एक मुक्म्मल जहॉ की खातिर
लड़ना मुनासिब
होना हैं वो सही होगा
तू चले चल मुसाफिर

राह कांटो से भरी हो
या पथरीली हो
तेरे कदमो के निशान
चाहे लहू से गीली हो

रात घनघोर हो काली हो
बरस रहा हो पानी
बांध ले हौशला
लिखेगा तु ही नई कहानी

किस्मत से तू पूछता हैं
क्या हैं वो राजी
वो तो हैं कर्मी के संग
कर मेहनत ले बाजी

लड़ कर भी अगर हारा
तो कल अफसोस न होगा
अन्तर आत्मा का तेरे सिर
कोई दोष न होगा

जिन्दगी क्या हैं
आज हैं कल ऱूठ जाऐगी
तेरी कोशिसे
तेरा जनून जिन्दा रह जाऐगी

महान भगत सिहं सम
कल तेरा कारवा होगा
जिस्म मिट जाऐगी
पर नाम अमर जंहा होगा

14 Comments

  1. babucm babucm 13/07/2017
    • arun kumar jha arun kumar jha 13/07/2017
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 13/07/2017
    • arun kumar jha arun kumar jha 13/07/2017
  3. chandramohan kisku chandramohan kisku 13/07/2017
    • arun kumar jha arun kumar jha 13/07/2017
  4. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 13/07/2017
    • arun kumar jha arun kumar jha 14/07/2017
  5. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 14/07/2017
    • arun kumar jha arun kumar jha 14/07/2017
  6. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 14/07/2017
    • arun kumar jha arun kumar jha 14/07/2017
    • arun kumar jha arun kumar jha 15/07/2017

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