स्वीकारता हूँ

स्वीकारता हूँ
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मै स्वीकार करता हूँ
तुम्हारी गरीबी हालत
अत्याचार और शोषण के लिए
मै भी एक कारण हूँ

जब तुम छोटी थी
कुल्ही धूल में
खेलती रहती थी
तभी तुम्हे सिखाया था
की घर और समाज की इज्जत
केवल औरतों के पास ही है
और औरतों को ही उसे बचना होगा
फिर तुम्हे बताया था
सहना औरतों की
गौरवशाली परम्परा है

मै ही तो तुम्हारी
मन की उर्वर मिट्टी में
इस बीज को बोया था
की औरतों की प्रतियोगिता
औरतों से ही संभव है
मर्द से नहीं

मर्द श्रेष्ठ जात होते है
और वे श्रेष्ठ ही रहेंगे
औरत -औरतों में दुश्मनी
मै ही बनाया था

मै स्वीकार करता हूँ
मै तुम्हारी सोई हुई
असीम शक्ति को
पनपने नहीं दिया
दया -दर्द लज्जा की
आभूषण से सजाकर
मै तुम्हे अपाहिज बना दिया हूँ

मै स्वीकार करता हूँ
तुम्हारी हो रही अपमान के लिए
मै भी कारण हूँ
माँ गर्भ में लड़की
तुम्हे स्वागत नहीं किया
घर की बहु के रूप में भी नहीं

तुम्हारी उन्नति को देखकर
सभी तरह की कामों में
बाधा का सृजन किया था
हाँ ,मै यह भी स्वीकारता हूँ

पर आज मेरी मन की
चट्टान तोड़कर
केवल यही बात है
की कष्ट सह रही औरतों की
आजादी युग
बहुत दूर नहीं है।

12 Comments

  1. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 11/07/2017
    • chandramohan kisku chandramohan kisku 13/07/2017
  2. Madhu tiwari Madhu tiwari 11/07/2017
    • chandramohan kisku chandramohan kisku 13/07/2017
  3. C.M. Sharma babucm 12/07/2017
    • chandramohan kisku chandramohan kisku 13/07/2017
    • chandramohan kisku chandramohan kisku 13/07/2017
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 12/07/2017
    • chandramohan kisku chandramohan kisku 13/07/2017
  5. arun kumar jha Arun kumar jha 12/07/2017
  6. chandramohan kisku chandramohan kisku 13/07/2017

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