चलो, अब जिन्दगी को करीब से देखा जाये

चलो, अब जिन्दगी को करीब से देखा जाये

गरीब की झोपड़ी में झाँक के देखा जाये

यहीं पे ईश्वर और उसकी आस्था बसती है

चलो, गरीब के आँसू तैर के देखा जाये।

 

कल ही रात में बड़ी जोर की बारिश हुई थी

झोपड़ी ढह गई होगी जाके देखा जाये

मुआवजा माँगती वहाँ कई लाश तो होंगी

उनकी मुस्कराहट को पास से देखा जाये।

 

चलो, अब जिन्दगी को करीब से देखा जाये

इक चमचमाती कार में चल के देखा जाये

बहुत सुखद लगता है गरीब का दर्द देखना

चलो, भूखे बच्चे को तड़पते देखा जाये।

 

बहुत ऊब गये सूखे ये खलिहान देखकर

अब बाढ़ में सब डूबते बहते देखा जाये

या घृणा की लपटों से खाक हुई जिन्दगी को

गर्म राख में खुद को बटोरते देखा जाये।

 

अधकचरी जिन्दगी फुटपाथ पे देखी जाये

नन्हें बच्चों को भीख माँगते देखा जाये

कचरा बीनती जिन्दगी की फटी झोलियों में

आस की चिन्धियों को करीब से देखा जाये।

 

चलो, अब अपने ही गाँव, शहर, गली, कूचों में

अपनों का जीवन भी करीब से देखा जाये

जिन्हें कहते थे अपना हम प्यार पाने कभी

उन्हें वृद्धाश्रम में गम पीते देखा जाये।

 

उनकी अंतिम साँस क्या दुआ देती है देखें

चलो, बूढ़े आँसू को तड़पता देखा जाये

पाँव कँपते हैं, उठते नहीं, अब क्या करें

चलो, वापस कार में बैठ के देखा जाये।

 

पर तभी पंछी पंख फड़फड़ाते कहने लगे

गैर जिन्दगी को क्या करीब से देखा जाये

तज गुरूर अब तू अपनी यह ढलती शाम देख

मन से कह ‘खुद को ही करीब से देखा जाये’। 

                                 … भूपेन्द्र कुमार दवे 

            00000

7 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 10/07/2017
  2. SARVESH KUMAR MARUT SARVESH KUMAR MARUT 10/07/2017
  3. chandramohan kisku chandramohan kisku 10/07/2017
  4. arun kumar jha arun kumar jha 10/07/2017
  5. Madhu tiwari Madhu tiwari 10/07/2017
  6. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 11/07/2017

Leave a Reply