कही चला गया

कही चला गया
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वक्त ने हँस दिया
देखकर जीवन मेरा
अपने जो थे
सभी खो गये
जो सुरक्षित रखा हुआ था
सभी बिखर गया।

हिंस्र तूफानी हवा
जीवन में बहुत बार आया है
पेड़ से फल -फूल
टूटकर गिर गया था।

अपनों की याद आने पर
दोनों आँखों से आँसू ही निकलती है
उनके साथ बिताए पल को याद करने
पर देह और मन झुनझुना जाता है।

बिदाई की बातें
स्मरण हो आने पर
यह मन बहुत जोर से रोना चाहती है
बहुत समझाया है
इस पगले मन को
गीत की सुर से सुन्दर फूलों से
फिर भी वह बिदाई की बेला
मन की एक कोने में झलकने से
इन आँखों से आँसू निकल जाती है।

कँहा ढुँढू उन्हें
नील आसमान में या तारों -सितारों में
इन आँखों में
लबालब झरनों का पानी लेकर।

जो अपना था
दूर बहुत दूर चला गया
जो अपने है
दूरी बना लिया ,कहीं चला गया।

……. चंद्र मोहन किस्कू

19 Comments

  1. arun kumar jha arun kumar jha 08/07/2017
    • chandramohan kisku chandramohan kisku 08/07/2017
  2. Madhu tiwari Madhu tiwari 08/07/2017
  3. chandramohan kisku chandramohan kisku 08/07/2017
  4. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 08/07/2017
    • chandramohan kisku chandramohan kisku 10/07/2017
  5. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 08/07/2017
    • chandramohan kisku chandramohan kisku 10/07/2017
  6. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 09/07/2017
    • chandramohan kisku chandramohan kisku 10/07/2017
  7. md. juber husain md. juber husain 09/07/2017
    • chandramohan kisku chandramohan kisku 10/07/2017
    • chandramohan kisku chandramohan kisku 10/07/2017
  8. babucm babucm 10/07/2017
    • chandramohan kisku chandramohan kisku 10/07/2017
  9. SARVESH KUMAR MARUT SARVESH KUMAR MARUT 10/07/2017
  10. chandramohan kisku chandramohan kisku 10/07/2017
  11. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 11/07/2017

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