मगर, वह है कि नहीं आती (भाग-3)…Raquim Ali

भाग-3
29.06.2017, सुबह:
पांच दिन के बाद जब मैं निवास पर वापस अकेले लौटा:

दो बच्चे आँखे बंद, घोंसले में सुस्त पड़े दिखे मुझको
तीसरे अंडे का क्या हुआ, आइडिया   नहीं है  मुझको।

30.06.2017: सुबह
कल के बनिस्पत, आज कुछ मजबूत दिख रहे हैं
दोनों की आँखें खुली हैं, थोड़ा-सा हिल-डुल रहे हैं।

पैरेंट्स में है तालमेल, वे अथक प्रयास कर रहे हैं
वे अपने बच्चों की, ठीक से देखभाल कर रहे हैं।

प्रायः एक बुलबुल घोंसले के पास रुक जाता है
दूसरा साथी, दूर कहीं चारा लेने चला जाता है।

कितना मैं खुश होता, अगर बाल-मन मेरा रहता
न बिल्ली का डर होता, न गर्मी का अंदेशा रहता।

फोटो मैंने खींचा, बच्चे चुप-चाप नीड़ में पड़े हुए हैं
संतोष है मुझको बहुत, अभी वे सुरक्षित पल रहे हैं;

मुझे लगता है, दोनों बुलबुल के भी यही अरमान होंगे
कुछ हफ़्तों से दिल में मेरे, जैसे अरमान मचल रहे हैं-
‘छोटे से वे बच्चे, अभी जो   आराम से  पड़े  हुए  हैं
वे दोनों  मज़बूत  बनें,   घोंसले से  बाहर उड़  सकें;
आसमान में, उन्मुक्त चक्कर पे चक्कर काट सकें
अपनी हिफाज़त  कर सकें, खुद वे चारा  चुग सकें।’

01.07.2017: सुबह
देखते-देखते उनके परों का हुआ, काफी  तेज विकास
उनमें का एक बच्चा कुछ, ज्यादा होनहार लग रहा है;

कभी मादा, कभी नर बुलबुल, आ रहा है, जा  रहा है
रखवाली भी हो जा रही है, चारा भी लाया जा रहा है।

02.07.2017: सुबह
अब गर्मी  का  नहीं है  खतरा, मौसम  काफी खुशनुमा  हो गया है
यहाँ, परसों शाम से रह-रह कर बारिश का जो आगाज़ हो गया है।

अल-सुबह ही, एक चिड़िया भीग कर चारा लाई थी
बच्चों को छोड़ कर, जाने कहाँ  वह रैन  बिताई थी!

02.07.2017: शाम
(आज हफ्ते की छुट्टी में, मैं घर पर था)

आज दिन में, चिड़िया कम ही बार आई थी
एकाध बार ही बच्चों के लिए चारा लाई थी।

03.07.2017:  05:13 AM
(यहाँ पर, हल्की सी बूंदा-बांदी हो रही है)

एक बुलबुल, अपने बच्चों से मिलने आया है
लगता है मुझे, चोंच में चारा भरकर लाया है।

05:50 AM
एक बिल्ली को कमरे में से आता देखा तो मैं घबराया था
फुर्ती से उसे भगाया, बच्चों को   सही-सलामत पाया था।

06:15 AM
दोनों पैरेंट्स बच्चों तक बार-बार आ रहे हैं, जा रहे हैं
इंतजार मैं तो कर रहा हूं, वे कब तक उन्हें उड़ा रहे हैं!

06:30 AM
एक घोंसले से बाहर आ चुका है, डोरी पर बैठा है
दूसरा घोंसले में, उड़ने की तैयारी में तैनात खड़ा है।

06:50 AM
दूसरा बच्चा भी घोंसले को छोड़ बाहर आ चुका है

अब दोनों पैरेंट्स की हरकतें काफी तेज हो चुकी हैं, बुलबुल बार-बार चहक रहे हैं,

पंख में तेज कम्पन कर रहे हैं बच्चे को खिड़की से बाहर लाने का यत्न कर रहे हैं।

07:10 AM
वाह! बच्चा खिड़की से बाहर उड़कर जा चुका है
एक बुलबुल लगातार उड़ने की विधा सिखा रहा है
अब, वह अमरूद की टहनी पर जा कर बैठ चुका है
बच्चे के उड़ने का दृश्य मेरे कैमरे में कैद हो चुका है।

07:50 AM
दूसरा बच्चा, अकेले कमरे ही में छूट चुका था
मैं देखने गया, नहीं दिखा, गायब हो चुका था
मैं घबराया, छत पर, बाहर, ढूंढने लग गया था
थोड़ी देर बाद, कमरे के फर्श पर  मिल गया था।
झट से मैंने उसे पकड़ा, टहनी पर छोड़ दिया था।

08:33 AM
दोनों बच्चे साथ-साथ पतली शाख़ पर बैठे हुए हैं
दोनों बुलबुल, उनकी देखभाल में निरत जुटे हुए हैं।
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इस तरह, रब ने मेरे दिल की एक और, आरज़ू को पूरा कर दिया है
मैंने सज़दे में गिर कर बारगाह-ए इलाही में शुक्रिया अदा किया है।

सब को पैदा करने वाला, पालने वाला एक ख़ालिक़ ही है
हमारी हाज़तों व दुआओं की लाज रखने वाला एक मालिक ही है।

।आमीन, सुम्मा आमीन।

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निष्कर्ष: बुलबुल के मोतल्लिक:

1. अण्डे के हैचिंग का पीरियड: 15-16 दिन

2. बच्चों का घोंसले में रहने का पीरियड: 6-7 दिन

3. तीन अंडों में से एक डमी हो जाता है
बाद में बुलबुल उसे खुद खा जाता है।

4. रोटी, आटा, चना, चावल, आम को नहीं छूता है
अनार, पपीता, मूंग पा जाए तो वह खा जाता है।

5. बच्चों को घोंसले से बाहर निकालने के दौरान
बड़ों की गतिविधियां होती हैं तेज, लगते हैं हैरान।

6. बुलबुल बहुत सोच समझ कर घोंसले को बनाता है
जरा-सी छेड़-छाड़ हो जाय तो, मुश्किल से वापस आता है।

7. कभी न दिया था ध्यान, था मैं बिलकुल अनजान
हो गई मुझको अब बुलबुल के आवाज़ की पहचान।

8. मैं अपने आप को बहुत खुशनसीब समझता हूं-
मुझे देखने को मिला,  क़ुदरत का एक अद्भुत करिश्मा, यानी बच्चों का होता तेज विकास;
मेरी आँखों के ही सामने सुरक्षित बाहर की फिज़ा में पहुंचने का बच्चों का अनुपम प्रयास।

(ख़ालिक़=रचयिता,  हाज़त=जरूरत)
…र.अ. bsnl

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7 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 05/07/2017
  2. raquimali raquimali 05/07/2017
  3. babucm babucm 05/07/2017
  4. raquimali raquimali 06/07/2017
  5. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 06/07/2017
  6. Raquim Ali 06/07/2017

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