बेटी का आँगन

आ जाओ अब इस आंगन में
अपनों की प्यारी लाडो सबकी .
कल का अफसाना बन कर ,
अब तू तुलसी इस आंगन की .
फूलो की शबनम बन जाना ,
छम छम पायल से,
आंगन महका देना .
छोड़ कर अब वो बसेरा ,
अब चिड़िया तू इस आंगन की…
बना के जन्मो जनम का रिस्ता .
प्रेम की डोर उड़ा डालो,
बिखरे तो फूलो की ,
माला बना डालो
अब बन जाना इस बगिया का हिस्सा .
क्योकि ,अब तू फुलवारी इस बगिया की .
मिलाकर दो आंगन की हरियाली को ,
एक संगम रच डालो,
किसी के बाहों का हार,
अपने गले का हार बना डालो ..
आ जाओ इस आंगन में ,
क्योकि तू तुलसी मेरे आंगन की ,
अपनों की प्यारी लाडो सबकी,
         तू फुलवारी मेरे आंगन की,
         तू दुनिया मेरे आंगन की .
         तू तुलसी मेरे आंगन की

      ANJALI YADAV KGMU

7 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 04/07/2017
    • angel yadav Anjali yadav 04/07/2017
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 04/07/2017
    • angel yadav Anjali yadav 04/07/2017
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 04/07/2017
    • angel yadav anjali yadav 05/07/2017
  4. arun kumar jha arun kumar jha 04/07/2017

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