बेकाबू भीड़ – अनु महेश्वरी

भीड़ का न कोई चेहरा होता,
न ही कोई जात, या श्रेणी होती है,
यह तो बस अराजकता के शिकार,
कुछ लोगो का एक समूह होता है|

यह अक्सर बेकाबू हो जाती,
न देख पाती, न ही सुन पाती,
बस भावनाओ में बहकर ही,
गलत-सही फैसला ले लेती|

उसके कानो तक किसी की,
पुकार भी नहीं पहुँच पाती है,
न ही उसे किसी का दर्द दिखाई देता है,
दरअसल भीड़ के आँख, या कान होते कहाँ है?

लोग भी बिना सोचे समझे,
उस भीड़ के साथ जुड़ते जाते है,
और बस थोड़ी ही देर में,
सब कुछ तहस नहस हो जाता है|

वहाँ इंसानियत मरती है,
मानवता शर्मशार होती है,
पर किसी को भी फरक नहीं पड़ता,
भीड़ हुड़दंग मचाती रहती है|

कभी कभी कुछ नेता गन भी,
अपने फायदे के लिए ही सही,
इस्तमाल करते इस भीड़ को ही,
यह सब बस चलता आ रहा है|

नुकसान तो हो चूका होता है,
इंसानियत का दम, घुट चूका होता है,
हम निजी ज़िन्दगी में, फिर मशगूल हो जाते है,
कुछ दिनों बाद, सब कुछ भूल भी जाते है|

लेकिन कब तक?
कब तक हम यूँ मूक बने देखते रहेंगे?
आज़ादी के नाम पर, बेकाबू भीड़ को, बर्दाश्त करते रहेंगे?
क्या इस भीड़ को रोकने में, हम कोई भूमिका निभा नहीं सकते है?

अनु महेश्वरी
चेन्नई

22 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 03/07/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 03/07/2017
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 03/07/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 03/07/2017
  3. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 03/07/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 04/07/2017
  4. Ram Gopal Sankhla Ram Gopal Sankhla 03/07/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 04/07/2017
  5. chandramohan kisku chandramohan kisku 03/07/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 04/07/2017
  6. babucm babucm 04/07/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 04/07/2017
  7. Aman Parmar 04/07/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 04/07/2017
  8. arun kumar jha arun kumar jha 04/07/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 04/07/2017
  9. Kajalsoni 04/07/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 04/07/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 05/07/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 02/08/2017

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