मैं तो विकल्प को संकल्प कर चुनूँगा ।।

जीविका और जीवन की खींचतान में से,
आत्मश्लाघा व आत्मसम्मान में से,
व्यापक चाटुकारिता और अल्प स्वाभिमान में से,
मैं तो विकल्प को संकल्प कर चुनूँगा ।।

द्रुत-धनवान और पुष्ट खानदान में से,
ठंडे वातानूकूल और उष्ण सूर्यपान में से,
शोक-प्रसार और हर्ष-दान में से,
मैं तो विकल्प को संकल्प कर चुनूँगा ।।

द्रव-रसायन और दुग्धपान में से,
छद्मवेषी धूर्त और वीर जवान में से,
धूम्र-शोषक जीव और दारा पहलवान में से,
मैं तो विकल्प को संकल्प कर चुनूँगा ।।

ऐश्वर्य-कोलाहल और सन्तोष-मुस्कान में से,
सुखमय प्रासाद और राणा की आन में से,
द्रोण के सीमाओं और व्यापक एकलव्य-तान में से,
मैं तो विकल्प को संकल्प कर चुनूँगा ।।

विजयी अधर्म और पराजित कवच-दान में से,
सूर्पनखा के छद्म में और हाड़ी के शीशदान में से,
निर्भया पर मौन और द्रौपदी-सम्मान में से,
मैं तो विकल्प को संकल्प कर चुनूँगा ।।

जीविका और जीवन की खींचतान में से,
आत्मश्लाघा व आत्मसम्मान में से,
व्यापक चाटुकारिता और अल्प स्वाभिमान में से,
मैं तो विकल्प को संकल्प कर चुनूँगा ।।

17 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 03/07/2017
    • Vivek Singh Vivek Singh 03/07/2017
  2. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 03/07/2017
    • Vivek Singh Vivek Singh 03/07/2017
  3. raquimali raquimali 03/07/2017
    • Vivek Singh Vivek Singh 03/07/2017
  4. Madhu tiwari madhu tiwari 03/07/2017
    • Vivek Singh Vivek Singh 03/07/2017
  5. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 03/07/2017
    • Vivek Singh Vivek Singh 03/07/2017
  6. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 03/07/2017
    • Vivek Singh Vivek Singh 03/07/2017
  7. babucm babucm 04/07/2017
  8. angel yadav ANJALI YADAV 04/07/2017
  9. Kajalsoni 04/07/2017
  10. moniya singh 06/07/2017

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