जिंदगी के पल

अपनी मुस्कानो के बारे में बतलाना चाहता हूँ,
दर्द दिल में नहीं मेरी मुस्कानो में है सिर्फ यह समझाना चाहता हूँ ,
खुशियों के पलो को बिखेरना मै भी चाहता हूँ,
पर स्याही सिर्फ आंसुओ की है सिर्फ यह बतलाना चाहता हूँ |
वक्त की कदर ना मैंने की ना वक्त ने मेरी,
वक्त का बंधन मुझे मंजूर नहीं सिर्फ यह समझाना चाहता हूँ,
वक्त की कदर मै भी करना चाहता हूँ,
पर वक्त को मुनाफों में भुनाना नहीं आता यह बतलाना चाहता हूँ |
सिर कभी झुकाकर चलता हूँ तो कभी उठाकर,
अपनी समझ से कुछ भी ना समझो सिर्फ यह समझाना चाहता हूँ,
देखकर मुस्कुराना मै भी चाहता हूँ,
पर अनदेखा करते है लोग यह बतलाना चाहता हूँ |

6 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 30/06/2017
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 30/06/2017
  3. Kajalsoni 01/07/2017

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