बस इस देश का परचम लहराए – अनु महेश्वरी

राह सबकी अलग हो सकती जहाँ,
पर मंजिल सबकी एक ही है यहाँ|

सही रास्ते पे चले हर इंसान,
हुआ इसलिए धर्म का निर्माण|

धर्म के भी ठेकेदारों ने जन्म लिया,
इस पर भी है अपना कब्जा किया|

इंसान को इंसान से अलग किया,
पशुओं और रंगो को भी बाँट दिया|

खून का रंग भी एक ही सभी का,
यह तो होता बस लाल सभी का|

साँसे, ऑक्सीजन से ही, सभी की चलती,
न वो, हिन्दू, मुस्लमान या ईसाई ही देखती|

फिर क्यों, इतनी मारा मारी,
धर्म के नाम पर, हिंसा जारी|

और न किसी की, बातों में आए,
सब मिल हम अब, एक हो जाए|

आओ सब मिल हम हाथ बढ़ाए,
बस इस देश का परचम लहराए|

अनु महेश्वरी
चेन्नई

10 Comments

  1. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 29/06/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 30/06/2017
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 30/06/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 30/06/2017
  3. C.M. Sharma babucm 30/06/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 30/06/2017
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 30/06/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 30/06/2017
  5. Kajalsoni 01/07/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 01/07/2017

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