टूटे शाख के पत्ते…… काजल सोनी

टूटे शाख के ये पत्ते ,
बेपनाह और बेघर लगते…….
छुटा अपनो से साथ जिनका ,
पनाह की खोज में तरसते फिरते………

चले वक्त की गहरी थपेड़ों से ,
तन मन जिसका उजड़ा हुआ…….
उम्मीदो का दामन थामे ,
सुखे सुखे से बस दिखते रहते…………

दर्द उसका कोई न जाने ,
दुआ उसकी खुदा भी न मानें ……
अरमानों की बारिश में ,
सहमे से बस भीगते रहते…….

अपनों से बड़ी दुर निकल कर ,
भीड़ में भी तन्हा गुजरते…….
कुचले जाते पैरों तले ,
धूमिल होकर दुनिया में ,
सांस जिंदगी की थामे रहते……….

टूटे शाख के ये पत्ते……..

” काजल सोनी ”

9 Comments

  1. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 29/06/2017
  2. subhash 29/06/2017
  3. arun kumar jha Arun kumar jha 29/06/2017
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 30/06/2017
  5. babucm babucm 30/06/2017
  6. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 30/06/2017
  7. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 30/06/2017
  8. raquimali raquimali 01/07/2017
  9. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 02/07/2017

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